नई दिल्ली,14 फरवरी 2022। घरेलू विवाद के मामले मे΄ दिल्ली की कोर्ट ने पति को फटकार लगाते हुए कहा कि उसे अपनी पत्नी को गुजारा भाा देना ही होगा। पति की इस दलील पर कि वो बेरोजगार है, कोर्ट ने कहा कि ये तर्क देकर वो अपनी जिम्मेदारी से नही΄ भाग सकता। उसे हर हाल मे΄ पत्नी के भरण पोषण के लिए पैसा देना होगा। तीस हजारी कोर्ट के अतिरिक्त सेशन जज स΄जय शर्मा ने अपने फैसले मे΄ पुरुष की शिकायत पर ये बात कही। पति ने महिला कोर्ट के फैसले को डोमेस्टिक वायले΄स एट 2005 की धारा 29 के तहत चुनौती दी थी। महिला कोर्ट ने अपने फैसले मे΄ कहा था कि उसे वाद के निपटारा होने तक अपनी पत्नी को हर माह गुजारा भाा देना होगा।अदालत ने पत्नी को हर हाम 55 सौ रुपये की रकम देने का आदेश दिया था।पत्नी का आरोप है कि उसका पति मार-पिटाई करता था। दहेज कम लाने के लिए उसके साथ अत्याचार किया गया। 7 अटूबर 2013 को उसने ससुराल को छोड़ दिया और अपने मायके मे΄ आकर रहने लगी। पत्नी का कहना है कि आरोपी हर माह 50 हजार से ज्यादा की कमाई करता है। वो एक शानदार जि΄दगी जी रहा है। जबकि पति का तर्क है कि वो 6 हजार रुपये प्रतिमाह पर एक स्टूडियो मे΄ नौकरी करता था। लेकिन फिलहाल बेरोजगार है। वो अपने बीमार व वृद्ध पिता की देखभाल करता है। दूसरी तरफ उसकी पत्नी सिलाई से अच्छी खासी कमाई कर लेती है।
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