अंबिकापुर,23 जून 2025 (घटती-घटना)। सरस्वती शिशु मंदिर देवीगंज रोड अंबिकापुर के सांस्कृतिक भवन में आयोजित किया गया। अतिथि सम्मान के साथ-साथ सभागार में उपस्थित समस्त परिवारजनों का अक्षय तिलक द्वारा अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मंचस्थ अतिथियों के द्वारा मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम दरबार की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन, पुष्पार्चन एवं राम स्तुति व मन्त्रोच्चार के साथ हुआ द्य
अतिथि आसन पर मुख्य रूप से जिला संघ चालक भगवान दास बंसल, सुभाषचंद्र अग्रवाल- अध्यक्ष सरस्वती शिशु मंदिर, जिला सह संयोजक कुटुंब प्रबोधन-माधवेन्द्र तिवारी, अशोक सिंह- नगर संघचालक, श्रीमती उर्वशी तिवारी, राम प्रसाद गुप्ता- विभाग संयोजक कुटुंब प्रबोधन तथा दीनदयाल गोयल जिला संयोजक रहे।
कुटुंब प्रबोधन के परिपेक्ष में सुभाषचंद्र अग्रवाल ने प्रकाश डालते हुए हिंदू परिवार, हिंदू जीवन दर्शन ,संयुक्त परिवार व्यवस्था, परिवार में परस्पर आपसी संबंध,परिवार में केवल मात्र एक प्रबोधन कार्यक्रम नहीं है बल्कि कार्यक्रमों के द्वारा रोज अच्छे संस्कार का निर्माण होता है। इस दृष्टि से यहां जो भी बिंदु प्रस्तुत किए जाएंगे वे सभी आपस में मिलकर परिवार व्यवस्था तथा सामाजिक सुदृढ़ता को बढ़ावा देता है। उक्त अवसर पर सभागार में उपस्थित सभी परिवारजनों ने अपने-अपने जीवन एवं अपने परिवार की घटित घटनाओं की झलकियों को शदों के माध्यम से चित्रित किया।
कुटुम्ब प्रबोधन परिवार सम्मलेन के मुख्य विषयों- परिवार में समरसता कैसे आए विषय पर श्रीमती सुमन गुप्ता ने अपने विचार रखे।
परिवार में संस्कार मय वातावरण का निर्माण के बारे में बोलते हुए पीयूष त्रिपाठी ने व्यापक रुप से विषयों को रखते हुए कहा कि बहू को बहू रहने दीजिए, बेटी बनाने की बात बोलकर हम बहू शद को अभिशाप सिद्ध करने पर क्यों तुले हुए हैं। हर रिश्ते का अपना अलग और अनूठा महत्व है, जिसे बदलने की आवश्यकता नहीं है। यदि आवश्यकता है तो मर्यादा, संयम, संस्कारों के साथ संतुलित आचरण की। युवा दंपतियों का दायित्व विषय पर श्रीमती देवकी त्रिपाठी ने सम्बोधित किया। दादा/बाबा से नाती-पोतों का संबंध विषय पर राज नारायण द्विवेदी ने विचार रखे।
वहीं मोबाइल-टीवी के दैनिक उपयोग का परिवार पर प्रभाव विषय पर विस्तार से मीरा साहू, प्राचार्य ने प्रकाश डाला। मनोज सिंह द्वारा हमारे द्वारा किया गया व्यवहार स्वयं तथा समाज को कैसे प्रभावित करता है। पर खुले मन से सभी से विचार साझा किए। इसके अतिरिक्त उपस्थित अन्य परिवारों ने स्वत: अपने-अपने विचार कुटुंब प्रबोधन ,वसुदेव कुटुंबकम पर रखे।
परहित सरिस धर्म नहीं भाई और तुलसी मीठे बचन ते सुख उपजत चहुंओर आदि बिंदुओं पर व्यापक परिचर्चा हुई।
कार्यक्रम का सफलतापूर्वक संचालन राम प्रसाद गुप्ता, विभाग संयोजक कुटुंब प्रबोधन के द्वारा करते हुए परिवार में एकरूपता, सहजता, अपनापन, बड़ों के प्रति सम्मान, औद्योगिकरण में परिवार का एकल होना तथा परिवार में भजन, भोजन, भाषा, वेशभूषा, भवन, भ्रमण, आदि बिंदुओं पर विभाग संयोजक ने मध्य चर्चा विषय रखे।
चर्चा में कुटुंब मित्र 5-5 बनाने तथा आगामी कार्यक्रम में उनकी सहभागिता हो पर जोर दिया गया।
आभार प्रदर्शन जिला संयोजक दीनदयाल गोयल ने करते हुए विद्यालय प्रांगण भवन, लाईट प्रदाता तथा उपस्थित जनों की सहभागिता, भोजन व्यवस्था में लगे समस्त भैया-भगिनी के प्रति आभार व्यक्त किए। कार्यक्रम का समापन प्रभु श्री राम जी की आरती एवं शांति पाठ मंत्र के साथ हुआ। उक्त अवसर पर युगल दंपति नवयुवक, प्रौढ़ युगल, तथा वृद्ध जोड़े के साथ 23 जोड़े, एकल माताएँ-बहनें पुरुष वर्ग 100 की संख्या तथा 40 युवा-युवती सहित कुल 186 लोगों ने कार्यक्रम में सहभागिता सुनिश्चित की।
इस अवसर पर आयोजित सहभोज कार्यक्रम में सभी ने भाग लिया तथा कुटुंब प्रबोधन कार्यक्रम की विशेषता लोगों की सहभागिता की महत्ता पर उपस्थित जनों ने प्रशंसा की।
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