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बिलासपुर @ एनआरआई कोटा मेडिकल प्रवेश मामले में उच्च न्यायालय बिलासपुर ने सरकार से मांगा जवाब

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बिलासपुर, 15 जून 2025 (घटती-घटना)। राज्य में मेडिकल प्रवेश में लागू किए गए एनआरआई कोटे को लेकर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य शासन को नोटिस जारी किया है। रायपुर निवासी प्रेम नारायण शुक्ला ने एडवोकेट जयप्रकाश शुक्ला के माध्यम से जनहित याचिका दायर कर बताया कि छत्तीसगढ़ मेडिकल एडमिशन रूल 2018 में एन आर आई कोटे से संबंधित प्रावधान है। इसमें रूल 13 स-1में एनआरआई का अर्थ बताया गया है। इसमें दी गई लंबी चौड़ी व्याख्या को ही याचिका में चुनौती दी गई है। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ ने पीए इनामदार विरुद्ध महाराष्ट्र राज्य मामले में कहा था इस कोटे में खुद एनआरआई माता पिता और उनके बच्चे ही शमिल हो सकते हैं। इस बारे में पहले याचिकाकर्ता ने अभ्यावेदन पेश किया था, इस पर विचार नहीं होने पर हाईकोर्ट की शरण ली। चीफ जस्टिस और जस्टिस बीडी की डिवीजन बेंच में सुनवाईं बहस में एडवोकेट जय प्रकाश शुक्ला ने राज्य के नियम में सुप्रीम कोर्ट आदेश का उल्लंघन होने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार पंजाब हरयाणा सरकार प्रावधान लाई थी, उसे हाईकोर्ट नेनिरस्त कर दिया था। मेडिकल कॉलेज में एनआरआई कोटे पर पंजाब और हरियाणा कोर्ट- पंजाब और हरियाणा सरकार द्वारा एनआरआई कोटे के नियम में बदलाव किया गया था जिसके तहत एनआरआई कोटे में केवल भाई-पुत्र व पहली पीढ़ी के रिश्तेदार को ही प्रवेश दिया जा सकता था. जिस पर हाईकोर्ट ने दूसरी पीढ़ी के छात्रों को प्रवेश नहीं देने का आदेश दिया था. इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की गई, जिसे खारिज कर दिया गया है. पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के इस फैसले के आधार पर छत्तीसगढ़ के मेडिकल एजुकेशन विभाग ने एनआरआई कोटे के छात्रों का प्रवेश निरस्त किया था. मामले में सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने एनआरआई छात्रों के प्रवेश निरस्त करने के आदेश को खारिज कर दिया है।


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