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खड़गवां @ बिहान योजना के ऋण वितरण की जांच पर सवाल अधिकारी बोले…जांच हुई,कार्रवाई भी होगी!

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सीईओ के आदेश के बाद जांच पूरी होने का दावा,लेकिन न रिपोर्ट सार्वजनिक हुई और न कार्रवाई की तस्वीर साफ,समूह की महिलाओं को अब भी निष्पक्ष कार्रवाई का इंतजार
-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां,05 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)।
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से संचालित बिहान योजना ही अब सवालों के घेरे में है, स्व-सहायता समूहों को वितरित किए गए ऋण में कथित अनियमितताओं को लेकर जिला पंचायत सीईओ द्वारा जांच के आदेश दिए जाने के बाद उम्मीद जगी थी कि मामले की परतें खुलेंगी और वास्तविक हितग्राहियों के साथ हुए व्यवहार की सच्चाई सामने आएगी, लेकिन जांच के बाद भी स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर जांच में क्या मिला और जिम्मेदारों पर कार्रवाई कब होगी? इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि विभागीय अधिकारी जांच होने और कार्रवाई किए जाने की बात कह रहे हैं, ऐसे में अब विभाग को केवल यह कहने तक सीमित नहीं रहना चाहिए कि जांच हो गई है, बल्कि यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आए, किन बिंदुओं का सत्यापन किया गया और यदि अनियमितता मिली है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन हैं।
सीईओ के आदेश के बाद जांच, लेकिन नतीजा कहां?
बिहान योजना के अंतर्गत स्व-सहायता समूहों को दिए गए ऋण को लेकर पहले सवाल उठे थे, इसके बाद जिला पंचायत सीईओ ने मामले की जांच के निर्देश दिए थे। जांच का उद्देश्य ऋण वितरण की प्रक्रिया और वास्तविक हितग्राहियों तक राशि पहुंचने की स्थिति की पड़ताल करना था, ऐसे मामलों में समूहों के ऋण प्रस्ताव, बैठक की कार्यवाही, आवेदन, स्वीकृति संबंधी दस्तावेज,बैंक रिकॉर्ड और ऋण वितरण से जुड़े अभिलेखों का मिलान जरूरी होता है, इसके साथ ही यह भी देखना आवश्यक है कि स्वीकृत राशि वास्तव में संबंधित समूहों के बैंक खातों में पहुंची या नहीं और महिला सदस्यों को योजना का लाभ मिला अथवा नहीं, लेकिन अब तक जांच के निष्कर्षों की स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आने से हितग्राहियों के बीच असमंजस बना हुआ है, यदि जांच पूरी हो चुकी है तो उसकी रिपोर्ट और निष्कर्षों को लेकर पारदर्शिता क्यों नहीं दिखाई जा रही?
महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की योजना में गड़बड़ी के आरोप गंभीर
बिहान योजना का मूल उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत करना, उन्हें समूहों के माध्यम से स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है, ऐसे में ऋण वितरण में अनियमितता के आरोप केवल वित्तीय प्रक्रिया पर सवाल नहीं हैं, बल्कि उन महिलाओं के भरोसे से भी जुड़े हैं जिनके नाम पर यह योजना संचालित की जा रही है, अब जिला पंचायत और संबंधित विभाग के सामने चुनौती है कि जांच के निष्कर्ष स्पष्ट किए जाएं और यदि कहीं गड़बड़ी मिली है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए, वहीं, यदि जांच में सभी प्रक्रियाएं सही पाई गई हैं तो इसकी तथ्यात्मक जानकारी भी सामने लाई जाए।
जांच हुई तो कार्रवाई किस आधार पर होगी?
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जांच हो चुकी है और कार्रवाई भी की जाएगी, अधिकारियों के इस बयान के बाद अब कार्रवाई की समय-सीमा और जांच के निष्कर्षों को लेकर जवाबदेही तय होना जरूरी है, सवाल यह है कि जांच में अनियमितता पाई गई है तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? क्या किसी अधिकारी, कर्मचारी या अन्य संबंधित व्यक्ति की भूमिका सामने आई है? क्या राशि के लेन-देन और बैंक रिकॉर्ड का मिलान किया गया है? यदि जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली तो इसकी जानकारी सार्वजनिक कर हितग्राहियों की शंकाओं का समाधान क्यों नहीं किया जा रहा? सिर्फ जांच होने का दावा कर देना पर्याप्त नहीं है। जांच का उद्देश्य दोषियों की पहचान और वास्तविक हितग्राहियों को न्याय दिलाना होना चाहिए, कार्रवाई की बात तभी सार्थक होगी जब उसके पीछे जांच के स्पष्ट निष्कर्ष और ठोस कदम दिखाई दें।
फाइलों से आगे बढ़कर बैंक खातों तक पहुंचे जांच
बिहान योजना के ऋण वितरण में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए जांच केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं होनी चाहिए,प्रत्येक स्व-सहायता समूह के बैंक खाते,ऋण स्वीकृति,वास्तविक भुगतान और महिला सदस्यों तक पहुंची राशि का मिलान किया जाना जरूरी है,इसके अलावा समूह की महिला सदस्यों से सीधे बातचीत कर उनके बयान दर्ज किए जाने चाहिए, ताकि यह पता चल सके कि उन्हें वास्तव में कितनी राशि मिली,ऋण किस उद्देश्य से लिया गया और उसका उपयोग किस प्रकार किया गया,यदि किसी समूह के नाम पर ऋण स्वीकृत हुआ है तो यह भी सत्यापित होना चाहिए कि संबंधित समूह की महिलाओं को इसकी पूरी जानकारी थी या नहीं।
अब बयान नहीं, कार्रवाई का इंतजार
खड़गवां में बिहान योजना के ऋण वितरण को लेकर उठे सवालों का जवाब अब केवल आश्वासन से नहीं मिलने वाला, विभागीय अधिकारियों ने जांच होने और कार्रवाई की बात कही है, इसलिए अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि कार्रवाई कब और किसके विरुद्ध होती है,क्या जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर जिम्मेदारी तय होगी या फिर कार्रवाई का आश्वासन भी फाइलों में ही दर्ज होकर रह जाएगा? समूह की महिलाओं और स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों का जवाब अब संबंधित विभाग को पारदर्शी जांच निष्कर्ष और ठोस कार्रवाई के माध्यम से देना होगा।


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