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अम्बिकापुर@1.82 करोड़ से अधिक के कथित गबन मामले में हाईकोर्ट सख्त,4 सप्ताह में चालान पेश करने का आदेश

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  • छत्तीसगढ़ स्टेट पावर लिमिटेड अंबिकापुर के अधिकारियों व ठेकेदारों पर फर्जी ईपीएफ-ईएसआईसी दस्तावेजों से
  • भुगतान का आरोप,एक साल बाद भी न गिरफ्तारी न चालान,हाईकोर्ट की फटकार के बाद तेज हुई कार्रवाई की उम्मीद


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ स्टेट पावर लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) अंबिकापुर के करोड़ों रुपये के कथित गबन और फर्जी भुगतान मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस को चार सप्ताह के भीतर विवेचना पूरी कर अंतिम प्रतिवेदन (चालान) न्यायालय में पेश करने का निर्देश दिया है। मामला थाना कोतवाली अंबिकापुर में दर्ज अपराध क्रमांक 282/2025 से जुड़ा है, जिसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 409,419,420,467, 468 एवं 471 के तहत अपराध दर्ज किया गया है। यह मामला अधिवक्ता एवं आरटीआई कार्यकर्ता डॉ. डी.के. सोनी की पहल पर न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुआ था। आरोप है कि बिजली कंपनी के अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत से फर्जी एवं कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर ईपीएफ, बोनस और ईएसआईसी मद में करोड़ों रुपये का भुगतान कराया गया।
कार्यपालन निदेशक की जांच में सामने आईं अनियमितताएं : कार्यपालन निदेशक (अंचल) अंबिकापुर की 24 फरवरी 2023 की जांच रिपोर्ट में बताया गया कि मेसर्स आर.के. एसोसिएट्स,मैट्रिक्स सर्विसेज तथा गुरुकृपा ग्रुप के भुगतान से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। जांच में पाया गया कि कई मामलों में कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति से अधिक भुगतान किया गया तथा ईपीएफ और ईएसआईसी चालानों का सत्यापन किए बिना ही देयक पारित कर दिए गए। रिपोर्ट के अनुसार कई देयकों के साथ संलग्न ईपीएफ चालान कथित रूप से फर्जी तरीके से परिवर्तित कर लगाए गए थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना भुगतान स्वीकृत कर दिया।
करीब 1.83 करोड़ रुपये के अधिक भुगतान का आरोप…
जांच रिपोर्ट के अनुसार-आर.के. एसोसिएट्स को विभिन्न मदों में लगभग 20.86 लाख रुपये का अधिक भुगतान किया गया। मैट्रिक्स सर्विसेज को उपस्थिति और ईपीएफ दस्तावेजों में कथित गड़बड़ी के कारण लगभग 1.62 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि का भुगतान हुआ। कुल मिलाकर तीनों प्रकरणों में 1,82,86,907 रुपये के अधिक भुगतान का उल्लेख जांच प्रतिवेदन में किया गया है। जांच में यह भी कहा गया कि वास्तविक उपस्थिति पत्रक,ईपीएफ और ईएसआईसी दस्तावेजों का सत्यापन किए बिना भुगतान करना अधिकारियों और ठेकेदारों की कथित मिलीभगत को दर्शाता है।
सीजेएम के आदेश पर दर्ज हुई थी एफआईआर
मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) ने प्रथम दृष्टया मामले में अपराध बनना मानते हुए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने का निर्देश दिया था। इसके बाद कोतवाली अंबिकापुर में अपराध दर्ज किया गया।
एक वर्ष बाद भी न गिरफ्तारी,न चालान…
याचिका के अनुसार एफआईआर दर्ज होने के बाद आरोपियों की अग्रिम जमानत याचिकाएं निरस्त होने के बावजूद पुलिस ने न तो आरोपियों को गिरफ्तार किया और न ही न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। इसी के बाद डॉ. डी.के. सोनी ने हाईकोर्ट में डब्ल्यूपीसीआर क्रमांक 357/2026 दायर की।
हाईकोर्ट का निर्देश…
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने 3 जुलाई 2026 को पारित आदेश में पुलिस को अपराध क्रमांक 282/2025 की विवेचना शीघ्र पूर्ण कर चार सप्ताह के भीतर अंतिम प्रतिवेदन (चालान) प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।


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