- महिला आरक्षण,परिसीमन सहित कई अहम विधेयक हो सकते हैं पेश
- महंगाई और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में विपक्ष
नई दिल्ली,03 जुलाई 2026। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलने की संभावना है। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार इस दौरान कुल 19 बैठकें आयोजित की जा सकती हैं। आगामी सत्र के काफी हंगामेदार रहने के आसार हैं, क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने अपनी-अपनी रणनीति तैयार कर ली है। कई राजनीतिक दलों में हाल में हुए दलबदल और बदलते राजनीतिक समीकरण भी सदन की कार्यवाही को प्रभावित कर सकते हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक प्रमुख हैं। दोनों ही संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक हैं, जिन्हें पारित कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत आवश्यक होगा। महिला आरक्षण विधेयक पिछले सत्र में पारित नहीं हो सका था, इसलिए इसे दोबारा प्रस्तुत किए जाने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा सरकार संविधान (130वां संशोधन) विधेयक भी पेश कर सकती है, जो फिलहाल संयुक्त संसदीय समिति के विचाराधीन है। प्रस्तावित संशोधन के अनुसार यदि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री 30 दिनों से अधिक समय तक जेल में रहता है तो उसे पद छोडऩा होगा। इसके साथ ही एक देश-एक चुनाव, विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफ सी आर ए) संशोधन, उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने, कंपनी कानून में सुधार तथा शिक्षा क्षेत्र से जुड़े कई विधेयक भी सदन में लाए जा सकते हैं। दूसरी ओर विपक्ष ने भी सरकार को घेरने के लिए व्यापक रणनीति बनाई है। विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतें,राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक प्रकरण, राम मंदिर को मिले दान में कथित अनियमितताओं तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है। इसके अलावा विभिन्न राज्यों में राजनीतिक दलों में टूट-फूट और दलबदल के मामलों को भी विपक्ष सदन में उठाएगा। राजनीतिक हलकों में यह भी चर्चा है कि मानसून सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों तथा शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के 6 सांसदों के दूसरे दलों में विलय से जुड़े मामलों पर निर्णय ले सकते हैं। साथ ही बागी सांसदों के सदन में बैठने की व्यवस्था को लेकर भी फैसला होने की संभावना है।
टीएमसी और शिवसेना के सांसदों पर होगा फैसला
सत्र शुरू होने से पहले लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला टीएमसी के बागी सांसदों और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसदों के नए गुट में शामिल होने से जुड़े मामलों पर फैसला ले सकते हैं। इन फैसलों का असर संसद के राजनीतिक समीकरणों पर पड़ सकता है।
सरकार पेश कर सकती है कई बड़े विधेयक
सरकार इस सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक को फिर से ला सकती है। इसके अलावा ‘एक देश, एक चुनाव’ बिल, एफसीआरए संशोधन, विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, एंटी-डोपिंग बिल और सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़े विधेयक भी पेश किए जा सकते हैं।
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