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अंबिकापुर@शहीद भगत सिंह वार्ड में बढ़ा असंतोष: “बालू में सुई खोजने जैसा हो गया पार्षद का मिलना”

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सड़क, नाली, सफाई और स्ट्रीट लाइट की समस्याओं से जूझ रहे लोग, बीच मोहल्ले में सांड के आतंक से भी दहशत

अंबिकापुर,22 मई 2026 (घटती-घटना)। नगर निगम के शहीद भगत सिंह वार्ड क्रमांक 28 में इन दिनों स्थानीय समस्याओं को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आने लगा है। वार्डवासियों का आरोप है कि चुनाव के दौरान बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि अब जनता से दूर हो चुके हैं। सड़क, नाली, सफाई, पेयजल और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत समस्याएं लगातार बनी हुई हैं, लेकिन उन्हें सुनने और समाधान करने वाला कोई नजर नहीं आता।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वार्ड पार्षद दीपक यादव से मिलना अब “बालू में सुई खोजने जैसा” हो गया है। लोगों का आरोप है कि छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर कई दिनों तक चक्कर लगाने पड़ते हैं, लेकिन न तो आसानी से मुलाकात हो पाती है और न ही समाधान मिलता है।
“जनता ने प्रतिनिधि चुना था, नेता नहीं”
वार्ड में यह चर्चा तेजी से फैल रही है कि पार्षद बनने के बाद जनहित पीछे छूट गया और नेतागिरी आगे आ गई। लोगों का कहना है कि चुनाव जीतने के बाद वार्ड की समस्याओं की बजाय राजनीतिक मंचों और कार्यक्रमों में सक्रियता अधिक दिखाई दे रही है।
स्थानीय रहवासियों का आरोप है कि कई मोहल्लों में सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, नालियों की सफाई नियमित नहीं हो रही, जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और कई स्ट्रीट लाइट महीनों से बंद पड़ी हैं। शिकायतों के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं।
एक स्थानीय बुजुर्ग ने नाराजगी जताते हुए कहा, “चुनाव के समय हर गली में दिखाई देते थे, अब समस्या लेकर जाओ तो मिलने तक में परेशानी होती है।”
बीच मोहल्ले में सांड का आतंक, लोग घरों से निकलने में डर रहे
वार्ड की अन्य समस्याओं के बीच अब आवारा सांडों का आतंक भी लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन गया है। मोहल्लेवासियों का कहना है कि वार्ड की गलियों और मुख्य सड़कों पर कई सांड खुलेआम घूमते रहते हैं, जिससे आए दिन हादसे का खतरा बना रहता है।
स्थानीय लोगों के अनुसार सुबह और शाम के समय सांड आपस में लड़ते हुए सड़कों पर दौड़ते हैं, जिससे महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे सबसे ज्यादा भयभीत रहते हैं। कई बार लोग गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं, लेकिन निगम स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
रहवासियों ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों और दोपहिया वाहन चालकों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। बाजार और गली मोहल्लों में अचानक सांडों के आ जाने से भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है।
एक महिला निवासी ने कहा, “घर से बच्चों को बाहर भेजने में डर लगता है। कभी भी सांड दौड़ाने लगते हैं। शिकायत करने के बाद भी कोई पकड़ने नहीं आता।”
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नगर निगम की टीम कभी-कभार अभियान चलाने की बात करती है, लेकिन स्थिति में कोई स्थायी सुधार नजर नहीं आता।
भाजपा-कांग्रेस की राजनीति में पिस रही जनता
वार्डवासियों का कहना है कि स्थानीय समस्याओं के समाधान की बजाय भाजपा और कांग्रेस की राजनीति के बीच आम जनता पिस रही है। लोगों का आरोप है कि विकास को लेकर कोई ठोस योजना जमीन पर दिखाई नहीं देती।
कई स्थानों पर अधूरे निर्माण कार्य, जल निकासी की समस्या और गंदगी के कारण लोगों को रोजाना परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि शिकायतें केवल फाइलों और आश्वासनों तक सीमित होकर रह गई हैं।
“दूसरे वार्ड के व्यक्ति को प्रतिनिधि बनाने की गलती नहीं दोहराएंगे”
कुछ नागरिकों ने खुलकर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि भविष्य में वे दूसरे वार्ड के निवासी को अपना प्रतिनिधि बनाने की भूल नहीं करेंगे। लोगों का कहना है कि स्थानीय समस्याओं को वही बेहतर समझ सकता है जो प्रतिदिन वार्ड की परिस्थितियों से जुड़ा हो।
वर्तमान स्थिति ने लोगों को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि केवल चुनावी वादों और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर प्रतिनिधि चुनना कितना भारी पड़ सकता है।

वार्डवासियों की प्रमुख मांगें

वार्ड के लोगों ने निगम प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि:

  • वार्ड स्तर पर नियमित जनसुनवाई शुरू की जाए
    – सड़क, नाली और सफाई की समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई हो
    – बंद पड़ी स्ट्रीट लाइट जल्द सुधारी जाएं
    – आवारा सांडों को पकड़ने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए
    – विकास कार्यों की सार्वजनिक जानकारी दी जाए
    – समस्याओं के निराकरण की समय-सीमा तय हो

“चुनाव के समय सक्रियता, बाद में दूरी क्यों?”

अब वार्ड में सबसे बड़ा सवाल यही गूंज रहा है कि चुनाव के समय घर-घर पहुंचने वाले जनप्रतिनिधि जीत के बाद जनता से दूर क्यों हो जाते हैं?
शहीद भगत सिंह वार्ड क्रमांक 28 में बढ़ती नाराजगी साफ संकेत दे रही है कि अब जनता केवल भाषण और आश्वासन नहीं, बल्कि जमीन पर काम देखना चाहती है।


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