रायपुर,16 मई 2026। छत्तीसगढ़ में लंबे समय से चल रही ‘सरपंच पति’ व्यवस्था पर अब पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने बड़ा प्रहार किया है। विभाग ने साफ कर दिया है कि महिला जनप्रतिनिधियों की जगह अब कोई पति, रिश्तेदार या प्रतिनिधि पंचायत बैठकों में शामिल नहीं हो सकेगा। आदेश के मुताबिक महिला सरपंचों और जनपद सदस्यों की मौजूदगी अनिवार्य होगी। जरूरत पड़ने पर फेस रिकॉग्निशन और बायोमीट्रिक अटेंडेंस से सत्यापन किया जाएगा।
महिला प्रतिनिधियों की जगह अब नहीं बैठेंगे रिश्तेदार : राज्य सरकार को लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि कई पंचायतों में निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों की जगह उनके पति या परिवार के लोग फैसले ले रहे हैं। बैठकों में दस्तखत से लेकर योजनाओं के संचालन तक में बाहरी दखल देखा गया। अब विभाग ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। निर्देश में कहा गया है कि पंचायतों में महिलाओं को दिया गया आरक्षण केवल कागजी व्यवस्था नहीं है। सरकार चाहती है कि महिलाएं खुद निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनें। गांव की सड़क, पानी, राशन और विकास योजनाओं पर अंतिम राय निर्वाचित प्रतिनिधि की ही हो। पंचायत विभाग ने जिला और जनपद स्तर के अधिकारियों को निर्देश भेजे हैं कि बैठकों की उपस्थिति रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए। कई जगहों पर डिजिटल उपस्थिति प्रणाली लागू करने की तैयारी है। अधिकारियों का कहना है कि बायोमीट्रिक अटेंडेंस और फेस रिकॉग्निशन सिस्टम से फर्जी उपस्थिति पर रोक लगेगी। गांवों में अक्सर यह देखा गया कि महिला सरपंच का नाम आगे रहता था, लेकिन बैठकों में फैसले कोई और लेता था। इस बार सरकार ने सीधे उसी व्यवस्था पर चोट की है। पंचायत भवनों में अब माहौल बदलने की चर्चा शुरू हो गई है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस फैसले का असर सिर्फ बैठकों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे पंचायत स्तर पर महिलाओं का आत्मविश्वास बढ़ेगा। कई महिला प्रतिनिधि अब खुद अधिकारियों से संवाद करेंगी और योजनाओं की निगरानी संभालेंगी। रायपुर के एक पंचायत अधिकारी ने बताया कि कई बार बैठकों में महिला प्रतिनिधि दिखाई ही नहीं देती थीं। पूरा संचालन उनके पति संभालते थे। ‘अब नियम साफ है।
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