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अम्बिकापुर@जनहित में सवाल : क्या जनप्रतिनिधियों के लिए अलग हैं यातायात नियम?

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ई-स्कूटी से पर्यावरण बचाने का संदेश,लेकिन बिना हेलमेट घूमते दिखे जिला पंचायत उपाध्यक्ष

कलेक्ट्रेट परिसर में नियमों की अनदेखी पर उठा सवाल,लोगों ने कहा-‘नेता खुद नहीं मानेंगे कानून तो जनता क्या सीखेगी …
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,16 मई 2026 (घटती-घटना)। देशभर में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों और प्रदूषण को देखते हुए इलेक्टि्रक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। शासन से लेकर जनप्रतिनिधि तक लोगों को ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहे हैं। लेकिन जब यही संदेश देने वाले जिम्मेदार लोग खुद यातायात नियमों की अनदेखी करते नजर आएं तो सवाल उठना स्वाभाविक हो जाता है।
ऐसा ही मामला सरगुजा जिले में सामने आया है,जहां जिला पंचायत उपाध्यक्ष देव नारायण यादव ई-स्कूटी से आवागमन करते दिखाई दिए। ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण की उनकी पहल को लोग सराह रहे हैं,लेकिन बिना हेलमेट कलेक्ट्रेट परिसर में वाहन चलाते नजर आने के बाद अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
कलेक्ट्रेट परिसर में बिना हेलमेट घूमते दिखे उपाध्यक्ष : जानकारी के अनुसार जिला पंचायत उपाध्यक्ष को अंबिकापुर कलेक्ट्रेट परिसर में बिना हेलमेट ई-स्कूटी चलाते देखे गये। यह वही परिसर है जहां कलेक्टर कार्यालय,एसपी कार्यालय,जिला पंचायत और कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक विभाग संचालित होते हैं। ऐसे संवेदनशील परिसर में एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि द्वारा खुलेआम यातायात नियमों की अनदेखी किए जाने पर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
जनता बोली— ‘क्या नेताओं पर लागू नहीं होता कानून? स्थानीय लोगों का कहना है कि आम नागरिकों को हेलमेट नहीं पहनने पर चालान थमा दिया जाता है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के मामले में अक्सर नियमों को नजरअंदाज कर दिया जाता है। लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि समाज के लिए रोल मॉडल माने जाते हैं। ऐसे में यदि वे खुद नियमों का पालन नहीं करेंगे तो आम जनता तक गलत संदेश जाएगा।
ईंधन बचत की पहल की हो रही सराहना : देव नारायण यादव ने मीडिया से चर्चा में कहा कि वे पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से ई-बाइक का उपयोग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनका क्षेत्र करीब 10 किलोमीटर के दायरे में है और वहां ई-वाहन से आसानी से पहुंचा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि वे लोगों को भी इलेक्टि्रक वाहनों के उपयोग के लिए प्रेरित कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और ईंधन बचत की सोच निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन सड़क सुरक्षा नियमों का पालन भी उतना ही जरूरी है।
सड़क सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल : यातायात विशेषज्ञों के अनुसार दोपहिया वाहन चालकों के लिए हेलमेट सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा उपकरण है। सड़क दुर्घटनाओं में सिर की चोट सबसे खतरनाक मानी जाती है और हेलमेट ऐसे मामलों में जान बचाने में बड़ी भूमिका निभाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि चाहे वाहन पेट्रोल से चले या बैटरी से, सड़क सुरक्षा नियम सभी के लिए समान हैं।
सोशल मीडिया पर भी बहस तेज : मामले की तस्वीरें और चर्चा सोशल मीडिया पर पहुंचने के बाद लोगों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आने लगी हैं। कुछ लोगों ने ई-वाहन को बढ़ावा देने की पहल की तारीफ की,जबकि कई लोगों ने बिना हेलमेट वाहन चलाने को गैरजिम्मेदाराना बताया। कई यूजर्स ने लिखा कि ‘देशभक्ति और पर्यावरण संरक्षण का संदेश अच्छा है,लेकिन कानून पालन की शुरुआत खुद से होनी चाहिए। ‘
कार्रवाई की मांग : कुछ नागरिकों ने यातायात पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि नियमों का पालन सभी के लिए समान रूप से सुनिश्चित किया जाए। लोगों का कहना है कि यदि आम नागरिकों पर चालानी कार्रवाई होती है तो जनप्रतिनिधियों पर भी वही नियम लागू होने चाहिए। हालांकि इस मामले में अब तक प्रशासन या यातायात विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


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