-संवाददाता-
खड़गवां (एमसीबी),21 फरवरी 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी जिले के खड़गवां विकासखंड में स्थित जल संसाधन विभाग का स्थानीय कार्यालय इन दिनों बदहाल कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में है, आरोप है कि विभागीय अधिकारी और जिम्मेदार कर्मचारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते,जिसके कारण पूरा कार्यालय व्यावहारिक रूप से एक चपरासी के भरोसे संचालित हो रहा है।
ग्रामीणों और किसानों का कहना है कि सिंचाई,नहर मरम्मत,जल वितरण,मोटर पंप स्वीकृति,मरम्मत प्रस्ताव और लंबित भुगतान जैसी महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए जब वे कार्यालय पहुंचते हैं,तो उन्हें संबंधित अधिकारी या तकनीकी कर्मचारी नहीं मिलते, अक्सर आवेदन और शिकायत पत्र चपरासी को ही सौंपने पड़ते हैं,ग्रामीणों का आरोप है कि कई मामलों में शिकायतें दर्ज तो हो जाती हैं, पर उनकी प्रगति की कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिलती, फाइलें कार्यालय में लंबित पड़ी रहती हैं और उनका निस्तारण अनिश्चित काल तक टलता रहता है।
रबी सीजन में पानी संकट
रबी फसल के समय सिंचाई की निर्बाध व्यवस्था अत्यंत आवश्यक होती है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि कई नहरों की समय पर सफाई और मरम्मत नहीं हो पाई है, कुछ जगहों पर पानी का प्रवाह बाधित है, जल वितरण का शेड्यूल स्पष्ट नहीं है, किसानों का आरोप है कि यदि समय पर निरीक्षण और मॉनिटरिंग होती,तो समस्याएं बढ़ती नहीं। पानी की अनियमित आपूर्ति से गेहूं, चना और अन्य रबी फसलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
तकनीकी निगरानी का अभाव
जल संसाधन विभाग का कार्य केवल कार्यालयी प्रक्रिया तक सीमित नहीं है,बल्कि क्षेत्रीय निरीक्षण, नहरों की स्थिति का आकलन,पानी के प्रवाह की निगरानी और शिकायतों का स्थल पर समाधान भी इसकी जिम्मेदारी है,ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में क्षेत्र में विभागीय निरीक्षण कम ही देखने को मिले हैं, इससे यह आशंका बढ़ रही है कि तकनीकी स्तर पर भी निगरानी कमजोर हो गई है।
स्टाफ की कमी या प्रशासनिक लापरवाही?
सूत्रों के अनुसार कार्यालय में पदस्थ कुछ कर्मचारी लंबे समय से नियमित उपस्थिति दर्ज नहीं करा रहे हैं, वहीं विभागीय सूत्रों का कहना है कि स्टाफ की कमी, अतिरिक्त प्रभार और अन्य प्रशासनिक दायित्वों के कारण स्थिति उत्पन्न हुई है, हालांकि नागरिकों का सवाल है कि यदि स्टाफ की कमी है तो, वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? उच्चाधिकारियों को स्थिति की जानकारी क्यों नहीं दी गई? जनहित के कार्यों को प्राथमिकता क्यों नहीं दी गई?
पारदर्शिता पर उठे सवाल-
कार्यालय की कार्यप्रणाली को लेकर पारदर्शिता का अभाव भी चर्चा का विषय है,ग्रामीणों का कहना है कि आवेदन की स्थिति,कार्यों की प्रगति और बजट उपयोग की जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है,यदि शिकायतों का समयबद्ध निराकरण और कार्यों की नियमित समीक्षा होती, तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।
प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग…
स्थानीय नागरिकों,किसान संगठनों और जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि,कार्यालय की नियमित उपस्थिति की जांच कराई जाए,लंबित फाइलों और कार्यों की समीक्षा की जाए,जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए, सिंचाई और जल प्रबंधन कार्यों की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए, जनहित से जुड़े इस महत्वपूर्ण विभाग की वर्तमान स्थिति प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करती है। यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो इसका सीधा असर किसानों की आजीविका और क्षेत्रीय कृषि उत्पादन पर पड़ सकता है, अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और क्या जल संसाधन विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो पाती है या नहीं।
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