
- स्कूल टाइम बना ‘स्पीड शो’: तेज रफ्तार बाइकर्स से मासूमों की जान खतरे में…
- हेलमेट गायब,रफ्तार बेहिसाब—सोनहत में स्टंटबाजों का आतंक,कार्रवाई का इंतजार
- अस्पताल और स्कूल के पास तेज रफ्तार का खतरा,बेरिकेट्स की मांग तेज…
- साइलेंसर के धमाके,प्रशासन की खामोशी—सोनहत में ‘स्पीड शो’ जारी…
-राजन पाण्डेय-
कोरिया/ सोनहत,13 फरवरी 2026(घटती-घटना)। पहले शांत और सादगी भरे माहौल के लिए पहचाना जाने वाला सोनहत अब तेज रफ्तार और स्टंटबाजी की वजह से लोगों के डर और नाराजगी का केंद्र बनता जा रहा है, खासकर स्कूल खुलने और छुट्टी होने के समय कुछ युवक बिना हेलमेट,बिना नंबर प्लेट और मॉडिफाइड साइलेंसर वाली बाइकों से खतरनाक स्टंट करते नजर आ रहे हैं। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह सिर्फ ट्रैफिक नियमों की अनदेखी नहीं,बल्कि मासूमों की जिंदगी से खिलवाड़ है।
प्रशासन की चुप्पी पर जनता का गुस्सा?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई बार शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग, हेलमेट जांच अभियान और स्टंटबाजी पर सख्त कार्रवाई की मांग लगातार उठ रही है,जनता का सवाल है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है।
क्या हो सकते हैं समाधान?
विशेषज्ञों और नागरिकों का सुझाव है कि स्कूल क्षेत्रों को नो स्टंट जोन घोषित किया जाए,ट्रैफिक पुलिस की नियमित निगरानी बढ़ाई जाए, मॉडिफाइड साइलेंसर और बिना हेलमेट बाइकर्स पर सख्त चालानी कार्रवाई हो,स्कूलों के माध्यम से युवाओं में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता अभियान चलाया जाए।
रफ्तार नहीं,जिम्मेदारी जरूरी
सोनहत की सड़कों पर बढ़ती यह ‘रफ्तार की सनक’ अब सिर्फ ट्रैफिक उल्लंघन नहीं रही, बल्कि सामाजिक सुरक्षा का मुद्दा बन चुकी है, जब तक प्रशासन सख्ती और जागरूकता दोनों पर बराबर ध्यान नहीं देगा, तब तक यह खतरा बना रहेगा, अब पूरे सोनहत की नजरें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं — क्योंकि एक छोटी सी लापरवाही किसी मासूम की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है।
स्कूल टाइम बना ‘स्पीड शो’ का मंच
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह और दोपहर के समय,जब सड़कों पर स्कूली बच्चों की सबसे ज्यादा आवाजाही रहती है, उसी दौरान कुछ बाइकर्स तेज रफ्तार में बाइक लहराते हुए निकलते हैं,कई बार बाइक को एक पहिए पर चलाने,अचानक ब्रेक लगाने और तेज आवाज वाले साइलेंसर से ‘धमाके’ जैसी आवाज निकालने की घटनाएं सामने आई हैं, स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि ये युवा जानबूझकर भीड़भाड़ वाले समय को चुनते हैं ताकि ज्यादा लोगों के बीच ‘दिखावा’ किया जा सके। इससे न सिर्फ सड़क पर अफरा-तफरी मचती है बल्कि ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित होती है।
मासूमों की सुरक्षा पर मंडरा रहा खतरा
हायर सेकेंडरी स्कूल और आसपास के प्राथमिक विद्यालयों के पास रोजाना सैकड़ों छात्र पैदल या साइकिल से गुजरते हैं। अभिभावकों का कहना है कि कई बार बच्चे तेज रफ्तार बाइकों की चपेट में आते-आते बचे हैं, एक अभिभावक ने बताया,बच्चों को स्कूल भेजना अब डर का कारण बन गया है। हर दिन लगता है कि कहीं कोई बड़ी दुर्घटना न हो जाए। बिना हेलमेट और तेज रफ्तार में बाइक चलाने से न सिर्फ स्टंट करने वाले युवाओं की जान खतरे में है,बल्कि राहगीरों और छोटे बच्चों की सुरक्षा भी दांव पर लग रही है।
मॉडिफाइड साइलेंसर बना ध्वनि प्रदूषण का कारण
युवाओं द्वारा बाइकों में लगाए जा रहे मॉडिफाइड साइलेंसर से निकलने वाली तेज आवाजें अब लोगों के लिए परेशानी बन चुकी हैं, अस्पताल के पास से गुजरते समय तेज आवाजें मरीजों और उनके परिजनों के लिए मानसिक तनाव का कारण बन रही हैं, स्थानीय लोगों का कहना है कि बार-बार एक्सीलेटर घुमाकर तेज आवाज निकालना सिर्फ शौक नहीं, बल्कि सार्वजनिक शांति भंग करने जैसा है।
अस्पताल और स्कूल के पास सुरक्षा उपायों की मांग
लगातार बढ़ती घटनाओं के बाद अब लोगों ने अस्पताल और हायर सेकेंडरी स्कूल के सामने स्पीड ब्रेकर, बेरिकेट्स और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग तेज कर दी है, उनका कहना है कि यह मांग किसी सुविधा के लिए नहीं बल्कि मासूमों और मरीजों की सुरक्षा के लिए जरूरी है, अस्पताल क्षेत्र: तेज रफ्तार और शोर मरीजों की हालत बिगाड़ सकता है, स्कूल क्षेत्र: छुट्टी के समय बच्चों की भीड़ के बीच स्टंटबाजी किसी भी समय बड़े हादसे में बदल सकती है।
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