- 2000 साल पुरानी तकनीक से बना,ना कमरे
- ना बिजली,टीम ने 18 दिन खिचड़ी खाकर बिताए
नई दिल्ली,14 जनवरी २०२६। इंडियन नेवी का 2000 साल पुरानी पाल विधि से निर्मित जहाज ढ्ढहृस्ङ्क कौंडिन्य बुधवार को 18 दिनों की यात्रा पूरी कर गुजरात से ओमान पहुंच गया। कौंडिन्य ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से यात्रा शुरू की थी और 14 जनवरी को ओमान के मस्कट पहुंचा। इस यात्रा का मकसद भारत की प्राचीन समुद्री विरासत को फिर से पुनर्जीवित करना है। यह जहाज 4थी-5वीं शताब्दी के भारतीय जहाजों के मॉडल पर बना है। बिना कील या धातु के लकड़ी के तख्तों को रस्सियों से सिलकर तैयार किया गया। इस पर कोई कमरा नहीं है। कू्र मेंबर्स स्लीपिंग बैग में सोते थे। वहां बिजली की भी व्यवस्था नहीं थी। अन्य जहाजों को चेतावनी देने के लिए कू्र के पास सिर्फ हेडलैंप्स थे, जो अपने सिर पर लगाकर रखते थे। कू्र मेंबर्स ने 18 दिन खिचड़ी और अचार खाकर बिताए। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ङ्ग पर शिप के ओमान पहुंचने की जानकारी दी। उन्होंने स्किपर कमांडर विकास श्योराण और प्रोजेक्ट हेड हेमंत कुमार के साथ तस्वीर पोस्ट करते हुए एक्स पर लिखा- इस पल का आनंद ले रहे हैं…हमने कर दिखाया। जहाज के एक अन्य कू्र सदस्य हेमंत ने पोस्ट किया-लैंड अहॉय! मस्कट दिख गया। गुड मॉर्निंग इंडिया,गुड मॉर्निंग ओमान। समुद्री मार्ग से बिना रुके अकेले विश्व का चक्कर लगाने वाले पहले भारतीय, रिटायर्ड नौसेना कमांडर अभिलाष टॉमी ने भी कौंडिन्य की टीम को बधाई दी।
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