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सूरजपुर@घुई वन परिक्षेत्र में बाघ की संदिग्ध मौत…वन्यजीव संरक्षण पर गंभीर सवाल

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-संवाददाता-
सूरजपुर,15दिसम्बर 2025
(घटती-घटना)।

सूरजपुर जिले के घुई वन परिक्षेत्र अंतर्गत भैसामुंडा सर्किल के रेवटी क्षेत्र से एक बेहद चौंकाने वाली और चिंताजनक खबर सामने आई है। यहां जंगल के भीतर एक बाघ का शव संदिग्ध परिस्थितियों में बरामद किया गया है। शव पर गहरी चोटों के निशान मिले हैं और एक नाखून गायब बताया जा रहा है। घटनास्थल से लोहे का एक हथियार भी मिला है, जो भाले जैसा प्रतीत होता है। इन तथ्यों ने बाघ के शिकार या तस्करी की आशंका को और मजबूत कर दिया है।
प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि बाघ की मौत लगभग तीन से चार दिन पहले हो चुकी थी। इतने लंबे समय तक जंगल में शव का पड़े रहना वन विभाग की गश्त और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। रेवटी क्षेत्र को संरक्षित वन्यजीव क्षेत्र माना जाता है,जहां कैमरा ट्रैप,नियमित पेट्रोलिंग और आधुनिक निगरानी साधनों के इस्तेमाल के दावे किए जाते रहे हैं। इसके बावजूद इतनी बड़ी घटना का देर से सामने आना विभागीय दावों की हकीकत उजागर करता है। स्थानीय ग्रामीणों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वन अमले की गतिविधियां काफी सीमित हैं। जंगल में असामाजिक तत्वों का डर बहुत कम दिखाई देता है। एक ग्रामीण के अनुसार, कुछ दिन पहले जंगल से संदिग्ध आवाजें सुनाई दी थीं, जिसकी सूचना भी दी गई थी, लेकिन उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों का कहना है कि कागजों में दिखने वाली निगरानी और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। ऐसे में सवाल उठता है कि ड्रोन,जीपीएस ट्रैकिंग और अन्य आधुनिक उपकरणों की भूमिका इस क्षेत्र में आखिर क्या रही। बाघ के शव पर पाए गए चोट के निशान प्राकृतिक मौत से मेल नहीं खाते। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि बाघ को जाल या किसी धारदार हथियार से मारा गया हो सकता है। शव से एक नाखून का गायब होना तस्करी माफिया की ओर इशारा करता है, क्योंकि बाघ के अंगों की अंतरराष्ट्रीय काले बाजार में भारी कीमत है। घटनास्थल से बरामद लोहे का हथियार इस पूरे मामले को और रहस्यमय बना देता है। वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. रामेश्वर पटेल का कहना है कि इस तरह की मौतें प्रायोजित शिकार का संकेत देती हैं और मामले में तत्काल डीएनए टेस्ट व फॉरेंसिक जांच बेहद जरूरी है। घटना की सूचना मिलते ही बलरामपुर और सूरजपुर वन मंडलों के डीएफओ समेत संयुक्त वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। बाघ के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सटीक कारणों का खुलासा हो सकेगा। फिलहाल पूरे इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) तथा वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो को भी मामले की जानकारी दे दी गई है। गौरतलब है कि यह घटना कोई अकेला मामला नहीं है। हाल के वर्षों में छत्तीसगढ़ में बाघों की कई संदिग्ध मौतें सामने आ चुकी हैं। वन विभाग के बजट में बढ़ोतरी के बावजूद जमीनी स्तर पर निगरानी और संरक्षण में कमी साफ नजर आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक स्थानीय समुदाय को संरक्षण व्यवस्था में सक्रिय रूप से शामिल नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाना मुश्किल होगा। फिलहाल ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार दोषियों को पकड़ा जाएगा और यह मामला फाइलों में दबकर नहीं रह जाएगा।


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