वन मंडला अधिकारी के बिना सहमति के कैसे बनाई जा रही है एक किलोमीटर सीसी सड़क?
-रवि सिंह-
एमसीबी,06 जून 2025 (घटती-घटना)। वन विभाग अपना रहा दोहरा मापदंड…रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में यदि कोई ग्रामीण बना लेता है घर तो उसे गिराने सैकड़ो की संख्या में पहुंच जाते हैं वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी,नगर निगम चिरमिरी के अधिकारी फॉरेस्ट से एनओसी लिए बगैर कैसे निर्माण का वर्क आर्डर किया जारी कर सैकड़ो सागौन के पेड़ ठेकेदार द्वारा काटे गए,वन विभाग और नगर निगम ने साधी चुप्पी, क्या ठेकेदार सुमित के लिए सारे नियम कर दिए गए शिथिल,निगम के भ्रष्टाचारी अधिकारी और भ्रष्ट ठेकेदार मिलकर जमकर कर रहे लूटपाट? निगम में चल रही है सुमित के भ्रष्टाचार का जमकर बोलबाला,70 प्रतिशत काम पूरे क्षेत्र का उसी का पूरे अधिकारी कर्मचारी उसके सामने हिलाते हैं दुम,क्या निगम में अब मेयर की जरूरत नहीं? अधिकारी कर्मचारी सिर्फ सुमित के इशारों पर नाच रहे…आखिर क्या वजह है की निगम चिरमिरी के सभी आंतरिक मामले को तय करता है सुमित? क्या सुमित के चरणों पर पर कई जन प्रतिनिधि भी नतमस्तक,उसके सहमति का करते हैं इंतजार,क्या कुछ जनप्रतिनिधि अपने निजी लाभ के लिए देते हैं उसे संरक्षण…इसलिए सुमित की मनमानी और भ्रष्टाचार चरम पर है? जिसकी सत्ता उसका सुमित,क्या यही है उक्त भ्रष्ट ठेकेदार का चरित्र?
आपको बताना जरूरी है की नगर निगम चिरमिरी के वार्ड क्रमांक एक में सुमित बंगाली नामक एक फर्जीवाडे का मास्टरमाइंड कहे जाने वाले ठेकेदार की मनमानी चरम पर है,कुछ सालों में अपने भ्रष्टाचार और ठगी के कारनामों से पूरे चिरमिरी के बड़े ठेकेदारों का पत्ता काटकर अपना बड़ा साम्राज्य स्थापित करने वाला ठेकेदार इन दिनों फिर से काफी चर्चा में बना हुआ है,टेंडर होने से पहले इस्टीमेट बनावाता है,अधिकारियों से सेटिंग कर पहले तय कर लेता है और जिस काम में वह हाथ रखता है 100 प्रतिशत वह कम उसे ही मिल जाता है आखिर जादूगर सुमित के पास ऐसी कौन सी जादुई छड़ी है की जिसको चाहता है अपने बस में कर लेता है चाहे फिर वह निर्माण कार्य हो या फिर अधिकारी कर्मचारी,निगम के वार्ड क्रमांक एक में पड़ने वाले साजापहाड़ रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में बिना अनुमति 49 लाख की लागत से एक किलोमीटर सड़क बनाने का काम शुरू हुआ है निर्माण बाला क्षेत्र वन भूमि के अंतर्गत आता है वन मंडल अधिकारी सहित किसी भी अधिकारी की सहमति नहीं मिलने के बाद भी सुमित आखिर किस नियम के तहत अप निर्माण कार्य को बेरोक-टोक करता जा रहा है,क्या आयुक्त साहब वन मंडल अधिकारी रेंजर से ठेकेदार सेटिंग करके उस सड़क को मनमानी तरीके से बना रहे इंजीनियर बिल भी बनाने से कतरा रहे उन पर भी ये लोग दबाव बना रहे है निगम आयुक्त के मुताबिक डीएफओ से मौखिक चर्चा कर निर्माण की स्वीकृति ली गई है फिलहाल आयुक्त का यह भी पता नहीं है कि निर्माण स्थल राजस्व भूमि है या वन भूमि उनका कहना है कि जमीन का सीमांकन नहीं कराया गया है इसलिए थोड़ी बहुत वन भूमि फंसी होगी,बाकी राजस्व भूमि में निर्माण करवा रहे हैं।
वन विभाग के अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध…क्या विभाग अपना रहे है दोहरा मापदंड?
गरीब के घर पर चला बुलडोजर और ठेकेदार को दे रहे हैं संरक्षण?- वार्ड क्रमांक एक में एक बेहद ही गरीब परिवार अपने गुजर बसर के लिए कुछ दिन पहले ईट की कच्ची दीवार बनाकर और छत डालकर वहां पर निवास करना चाह रहा था,वन विभाग के अधिकारियों सहित सभी अधिकारियों को आप किया था कि उसे व्यक्ति ने रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में बिना अनुमति घर का निर्माण किया है इस कारण उसके घर पर बुलडोजर चला दिया गया और पूरा घर को तहस नहस कर दिया गया बताया यहां भी जाता है कि उक्त भूमि के आसपास सैकड़ो घर बने हैं जो इसी तरह के भूमि पर बसे हैं लेकिन रेंजर की आवश्यकताओं की पूर्ति नहीं करने के कारण वह घर बड़े बेदर्दी से तोड़ दिया गया…वार्ड क्रमांक 1 में रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में बीते दिवस हुई कार्रवाई से महज़ कुछ दूर पर ही सड़क निर्माण कार्य चल रहा है जो सैकड़ो रोपित सागौन के पेड़ों को काटकर बनाया जा रहा है ग्रामीणों ने बताया कि कुछ साल पहले वन विभाग ने इस पूरे इलाकों को घेराव कर कई सैकड़ा पौधे रोपे गए थे उन्हें रोहित पौधों के बीच अब बड़े पैमाओं पर पेड़ों को काटकर सड़क बनाई गई है सड़क बननी भी थी तो थोड़ा छोटे-बड़े पेड़ों को बचाकर किनारे से भी बनाई जा सकती थी लेकिन ठेकेदार अपनी मनमानी करते हुए सैकड़ो पेड़ों को काटकर उक्त घटिया निर्माण कार्य संपन्न कर रहा है। सड़क में ठेकेदार उसी जंगल से लाकर गिट्टी डाल रहा है और अवैध रेत भी वही नदी नालों से इकट्ठा करके सड़क का निर्माण कर रहा है फॉरेस्ट विभाग के अधिकारी उसकी गाडि़यों पर किसी तरह का कोई कार्रवाई भी नहीं कर रहे हैं रिजर्व फॉरेस्ट एरिया में यदि कोई गाड़ी बिना अनुमति प्रवेश करती है तो उक्त गाड़ी को जपत करके दंडित करने का प्रावधान है किंतु ठेकेदार के आगे नतमस्तक हो गया है…क्यों घर में आएंगे साथ ही सीसी सड़क निर्माण के बाद तराई भी नहीं करवा रहे हैं, सड़क निर्माण साजापहाड़ में शासकीय स्कूल के पास महेंद्र के घर के पास से कारीमाटी तक होना है। गौरतलब है कि नगर निगम चिरमिरी में बिन अनुमति निर्माण शुरू करा देते हैं, जबकि बाद में रोक लगती है। एसईसीएल की जमीन पर कुछ साल पहले करीब तीन करोड़ की लागत से डॉ अंबेडकर भवन डोमनहिल और चौपाटी बड़ी बाजार के नाम पर निर्माण कार्य शुरू कराए गए थे। मामले में रोक लगने के बाद निर्माण बंद पड़ा हुआ है।
सड़क निर्माण स्थल की जमीन का सीमांकन नहीं कराया गया है। इससे पता नहीं है कि कितनी जमीन वन भूमि फंस रही है। हालांकि,मौखिक रूप से डीएफओ से चर्चा कर निर्माण की अनुमति ली गई है। एक किलोमीटर लंबी सड़क करीब 49 लाख की लागत से निर्माण करवा रहे हैं।
राम प्रसाद,आयुक्त नगर निगम चिरमिरी
मारे विभाग से सड़क निर्माण की लिए कोई भी अनुमति नहीं दी गई है
सूर्य देव सिंह,रेंजर चिरमिरी
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