- पिछले बार जिन निर्वाचित सदस्यों को आश्वासन देकर बने थे उपाध्यक्ष,उनकी मंशा पर फ़ेरा था पानी,जिस वजह से इनकी बातों में इस बार आने को नहीं है कोई तैयार
- उपाध्यक्ष बनने के लिए किया पूरा प्रयास,पर नहीं बनी बात तो फिर कहा नए चेहरे को देना है मौका, जबकि खुद का चेहरा है ही कितना पुराना?
- पिछली बार उपाध्यक्ष बनने के लिए जनपद सदस्यों को दिया था लालच,बाद में दिया धोखा:सूत्र
- विगत पंचवर्षीय न केवल जनपद सदस्यों को बल्कि पूर्व विधायक सहित आकाओं को भी मिला था धोखा
- पैसा खुदा नहीं, तो खुदा से कम भी नहीं की तर्ज पर काम करते हैं पूर्व जनपद उपाध्यक्ष के शिक्षक पति
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर,03 मार्च 2025 (घटती-घटना)। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के संपन्न होने के बाद अब जनपद पंचायत बैकुंठपुर में अध्यक्ष व उपाध्यक्ष का निर्वाचन होना है। जिसे लेकर सभी दावेदार दावा कर रहे हैं कि उनके पास पर्याप्त सदस्य हैं,पर यदि देखा जाए तो अध्यक्ष उपाध्यक्ष पद के लिए कई दावेदार हैं, अध्यक्ष से ज्यादा दावेदार उपाध्यक्ष के लिए बताया जा रहा है, उपाध्यक्ष बनने के लिए सदस्यों की खरीद फरोख्त शुरू हो गई है, अध्यक्ष व उपाध्यक्ष बनने की दावेदारी करने वाले लोग अपने अनुसार सदस्यों को खरीदने का दाम तय कर रहे हैं…ऐसा सूत्रों का दावा है। वहीं एक चौंकाने वाली खबर आई है जिसमें उपाध्यक्ष पद के दावेदार बताने वाली नेत्री आशा महेश साहू ने उपाध्यक्ष चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया है। इस ऐलान के बाद कई सवाल खड़े हो गए हैं, सवाल इसलिए खड़े हो गए हैं क्योंकि इन्होंने बयान जारी कर कहा है कि नए चेहरे को मौका देना चाह रहे हैं। ऐसे में सवाल यह हो रहा है कि आखिर यह कितनी बार की जनपद पंचायत उपाध्यक्ष हैं कि अब यह युवा को मौका देना चाह रहे हैं। पर वहीं सूत्रों का कहना यह है कि उन्होंने अपने सहयोगी के साथ घूम-घूम कर पूरे क्षेत्र का दौरा कर चुके हैं,जब कोई भी सदस्य इनके साथ देने को तैयार नहीं हुआ,कहा जाए इन से बिकने को तैयार नहीं हुआ तब इन्होंने इस बात का ऐलान किया कि वह उपाध्यक्ष चुनाव नहीं लड़ेंगे। वहीं एक दावा यह भी किया जा रहा है कि पिछले बार जनपद पंचायत बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष बनने के लिए इनके द्वारा सदस्यों को प्रलोभन और लालच दिया गया था और इसके साथ ही नगद राशि देने के बात तय की गई थी, परंतु उपाध्यक्ष बनने के लिए वोट लेने के बाद यह अपने वादे से मुकर गए थे और अपने पाले में किए गए जनपद सदस्यों को सीधे तौर पर धोखा दिया था। संभवत इसी कारण इस बार जनपद पंचायत के अध्यक्ष उपाध्यक्ष के चुनाव में इनका साथ देने को कोई भी सदस्य तैयार नहीं हुआ और अंततः इन्हें मजबूर होकर अपनी साख बचाने के लिए यह कहना पड़ रहा है कि युवाओं को मौका देने के लिए यह उपाध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ना चाहते। जबकि यह बड़ा ही हास्यप्रद बात है जिसमें राजनीति के लिए कोई अपना जगह त्यागने को स्वेक्षा से तैयार हो जाए, निश्चित है की गुंजाइश न बनने पर अपनी लोक लाज बचाने के लिए ऐसी घोषणा करनी पड़ती है।
नए चेहरे को अपनी जगह मौका देना है, परंतु स्वयं का चेहरा है ही कितना पुराना?
कुछ खबरों के और सोशल मीडिया में चल रहे बयानों के मुताबिक पूर्व जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती आशा साहू ने वर्तमान में जनपद सदस्य का चुनाव जीतने के बाद जनपद उपाध्यक्ष का चुनाव में ना उतरकर युवा चेहरे को मौका देने की बात की है। यह देखने सुनने में ही अजीबोगरीब है क्योंकि राजनीति में स्वेक्षा से कोई अपना स्थान छोड़ना नहीं चाहता और जब तक गुंजाइश बनी रहती है, भले शरीर साथ दे या ना दे,लोग पद पाने के लिए हर संभव प्रयास करते हैं। परंतु केवल एक बार जनपद सदस्य रहने के साथ-साथ उपाध्यक्ष बनने पर दूसरों के लिए जगह छोड़ने की बात गले नहीं उतर रही। नए युवा चेहरे को मौका देने वाली बात उन पर लागू होती जिनकी राजनीति में बाल पक चुके होते हैं। पर केवल एक चुनाव के बाद ही हथियार डाल देने की स्थिति में औरों को मौका देने की बात हजम होने वाली नहीं है। निश्चय ही गुंजाइश न बनते देख यह बात सामने आ रही है।
उपाध्यक्ष बनने के लिए सदस्यों से किया संपर्क,पर निर्वाचित सदस्य समर्थन देने नहीं हुए तैयार…तब किया उपाध्यक्ष चुनाव न लड़ने का ऐलान:सूत्र
पंचायत चुनाव 2025 के कोरिया जिले के जनपद पंचायत बैकुंठपुर के हाई प्रोफाइल सीट क्रमांक 11 के विवादास्पद चुनाव परिणाम उपरांत पुन: अपनी जीत दर्ज कर आने वाले भूतपूर्व जनपद उपाध्यक्ष श्रीमती आशा महेश साहू ने जनपद सदस्य के चुनाव जीतने के बाद से ही अपने शिक्षक पति और साथियों के साथ जनपद पंचायत बैकुंठपुर के निर्वाचित सभी जनपद सदस्यों से मिल-जुल बढ़ाने की कोशिशें तेज की और उन्हें अपने पाले में करने के लिए हर संभव प्रयास किया। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार विगत पंचवर्षीय में जनपद पंचायत बैकुंठपुर के उपाध्यक्ष बनने के लिए उनकी टीम ने जनपद सदस्यों से नगद राशि के लेनदेन सहित और भी कई प्रलोभन दिए थे और अपनी स्वार्थ पूर्ति के बाद अपने वादे से मुकर गए थे, इसी कारण इस बार निर्वाचित जनपद सदस्यों ने इनको और उनकी टीम को कोई भाव नहीं दिया। जब निर्वाचित जनपद सदस्यों ने समर्थन देने से इन्हें पूरी तरह नकार दिया और इनकार कर दिया, तब मजबूरीवश इन्होंने अपनी साख बचाने के लिए ऐलान कर दिया कि इस बार यह उपाध्यक्ष के लिए चुनाव नहीं लड़ेंगे और नए चेहरे को मौका देंगे, जो की सुनने में ही बड़ा अजीब और हास्यास्पद लगता है।
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