महाकालेश्वर की गूंजे जयकारे,वैभव,ऐश्वर्य और गरिमा की छटा बिखेरते नगर भ्रमण पर निकले भगवान भोलेनाथ
उज्जैन,11 सितंबर 2023 (ए)। भगवान श्री महाकालेश्वर की भाद्रपद माह की दूसरी और शाही सवारी सोमवार 11 सितंबर को पूरे ठाट-बांट और शाही रूप में निकाली गई। भगवान श्री महाकालेश्वर की जय-जयकार से पूरी अवंतिका नगरी गूंज उठी। साथ ही चारों ओर भगवान महाकाल की भक्ति में लीन श्रद्धालुओं की आंखें श्री महाकालेश्वर की एक झलक पाने के लिए लालायित थी।
श्री महाकालेश्वर भगवान की शाही सवारी बड़े धूमधाम व उल्लास के साथ श्री महाकालेश्वर मंदिर से शाम 4 बजे नगर भ्रमण को निकली। नगर भ्रमण के पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर परिसर में कोटितीर्थ कुण्ड के पास स्थित सभामंडप में श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान श्री चन्द्रमौलेश्वर का षोडशोपचार से पूजन-अर्चन कर भगवान की आरती की गई। पूजन-अर्चन मुख्य पुजारी पं. घनश्याम शर्मा द्वारा संपन्न कराया गया।
सवारी निकलने के पूर्व सभामंडप में संभाग आयुक्त संजय गोयल, आई. जी. संतोष कुमार सिंह, कलेक्टर एवं अध्यक्ष महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति कुमार पुरुषोत्तम, पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा, पंचायती महानिर्वाणी अखाड़े के महंत विनीत गिरी महाराज, महापौर मुकेश टटवाल, निगम आयुक्त रोशन सिंह, अपर कलेक्टर एवं प्रशासक संदीप सोनी, मंदिर प्रबंध समिति सदस्य पुजारी प्रदीप गुरु, राजेंद्र शर्मा ‘गुरु’, राम पुजारी आदि ने भगवान महाकालेश्वर की पूजा-अर्चना की और आरती में शामिल हुए।
आरती के बाद भगवान चन्द्रमौलेश्वर रजत पालकी विराजमान होकर मंदिर प्रांगण से नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान किया। रजत पालकी में विराजित भगवान श्री चन्द्रमोलेश्वर जैसे ही मुख्य् द्वार पर पहुंचे, असंख्य श्रद्धालुओं ने भगवान महाकालेश्वर का स्वागत कर वंदन किया। भगवान श्री महाकालेश्वर की शाही सवारी महाकाल मंदिर से जैसे ही मुख्य द्वार पर पहुंची वहां सशस्त्र पुलिस बल के जवानों द्वारा भगवान को सलामी (गार्ड ऑफ ऑनर) दी गई। भाद्रपद माह की यह दूसरी और दसवीं शाही सवारी में रजत पालकी में श्री चन्द्रमौलेश्वर, हाथी पर श्री मनमहेश, गरूड़ रथ पर शिवतांडव, नन्दी रथ पर उमा-महेश और डोल रथ पर होल्कर स्टेट के मुखारविंद, रथ पर श्री घटाटोप मुखौटा, रथ पर श्री जटाशंकर, रथ पर श्री रुद्रेश्वर स्वरूप, रथ पर श्री चन्द्रशेखर स्वरुप व दसवीं सवारी में आज ही श्री महाकालेश्वर भगवान को गुप्त दानदाता द्वारा भेंट नवीन रथ पर श्री सप्तधान का मुखारविंद नगर भ्रमण पर अपनी प्रजा का हाल जानने निकले।
सवारी के साथ घुडसवार, नगर सैनिक, विशेष सशस्त्र बल की टुकडियां एवं भजन मंडलियां, बैंड, चल रहे थे। वहीं दक्षिण भारत से विशेष रूप में सवारी में सम्मिलित होने दल आया है। सवारी परंपरात मार्ग महाकाल चौराहा,गुदरी चौराहा,बक्षी और कहारवाड़ी से होती हुई रामघाट के लिए प्रस्थान किया। सवारी मार्ग में भगवान श्री महा कालेश्वर की जयकारे व फूलों की वर्षा कर रहे थे। श्रद्धालु भगवान की एक झलक पाकर पुण्य लाभ कमाया।
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