भारतीय दंड संहिता की धारा-494 बहुविवाह,हलाला आदि
की अनुमति देती है और इसे खत्म किए जाने की जरूरत है
नई दिल्ली,23 मार्च 2023 (ए)। सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि वह मुसलमानों में बहुविवाह और ‘निकाह हलाला की प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 5 न्यायाधीशों की नयी संविधान पीठ का गठन ‘सही समय पर करेगा। चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस जेबी पारदीवाला की पीठ से वकील अश्विनी उपाध्याय ने मामले पर नई संविधान पीठ के गठन का अनुरोध किया है।उपाध्याय की ओर से दायर जनहित याचिका में कहा गया कि भारतीय दंड संहिता की धारा-494 बहुविवाह, हलाला आदि की अनुमति देती है और इसे खत्म किए जाने की जरूरत है। चीफ जस्टिस ने कहा, ‘मैं इस पर गौर करूंगा। सही समय पर मैं संविधान पीठ का गठन करूंगा। पिछली 5 सदस्यीय संविधान पीठ ने गत 30 अगस्त 2022 को राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी), राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम) को जनहित याचिकाओं में पक्षकार बनाया था और उनसे जवाब मांगा था। तत्कालीन संविधान पीठ की अध्यक्षता जस्टिस बनर्जी कर रही थीं। दो जजों के सेवानिवृत्त होने से बहुविवाह और निकाह हलाला की प्रथाओं के खिलाफ आठ याचिकाओं पर सुनवाई के लिए संविधान पीठ के पुनर्गठन की आवश्यकता पड़ी। शीर्ष अदालत ने जुलाई 2018 में उपाध्याय की याचिका पर विचार किया था और इस मामले को संविधान पीठ के पास भेज दिया था, जो पहले से ही ऐसी ही याचिकाओं की सुनवाई कर रही थी।
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