भारत में महिलाओं के विकास का अति संवेदनशील एवं महत्वपूर्ण प्रश्न स्वतंत्रता एवं भारत की मुक्ति के साथ अनिवार्य रूप से जुड़ गया हैद्य स्वतंत्र काल से जुड़ी हुई महिला सशक्तिकरण की यात्रा आज तक अनवरत जारी हैद्य आज भी महिलाएं सामाजिक राजनीतिक आर्थिक एवं सांस्कृतिक सभी मोर्चों और सवालों पर पुरुषों के समकक्ष संघर्ष करती नजर आ रही हैद्य …
Read More »संपादकीय
लेख@ पार्श्वभूमि की धूमिलता:जनप्रहरी दादूलाल दिनेश पारीवाल
साभार दस्तक,युगेश चौबे! बालाघाट जिले की पार्श्वभूमि की धूमिलता में यदि प्रतिभाशाली व्यक्तित्व-कृतित्व,जनप्रहरी,अज्ञात संगीत, कलाप्रेमी, जनगायक, कवि, नाटककार, कहानी लेखक, अध्यापक,व्यंग्यकार और सर्वोपरि एक शिक्षा संगठक के रूप में यदि किसी एक व्यक्ति की खोज की जावे तो वे होंगे दादूलाल दिनेश पारीवाल। आपका जन्म 4 जून 1906 को मध्यप्रदेश, बालाघाट जिले के वारासिवनी के एक बहुत ही गरीब विश्वकर्मा …
Read More »लेख@ यू-आकार की कक्षा में बैठने से गर्दन में दर्द हो सकता है
मलयालम फिल्म,स्थानार्थी श्रीकुट्टन में चरमोत्कर्ष दृश्य से एक क्यू लेते हुए, दक्षिण भारत के कई स्कूल कक्षाओं में यू-आकार के बैठने की व्यवस्था को अपना रहे हैं। कर्नाटक की एक बाल अधिकार कार्यकर्ता नरसिम्हा राव ने राज्य के शिक्षा मंत्री मधु बांगरप्पा से औपचारिक अनुरोध किया है,जिसमें अर्ध-परिपत्र बैठने के पैटर्न को लागू करने का आग्रह किया गया है। राव …
Read More »लेख@गरीब देशों की महामारी?
प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंगभारत जैसे कई विकासशील देशों में ही जहां गरीबी ने अपना परचम फैला रखा है। शहरों में पेट्रोल ,डीजल,केरोसिन से चलने वाली गाडि़यों और वातानुकूलित यंत्रों याने ए,सी की संख्या में बेतहाशा वृद्धि होने से वातावरण में उष्णता बढ़ते जा रही है इसके अलावा वनों का विनाश एक भयानक समस्या के रूप में देश में फैलता जा …
Read More »लेख@ 21 वीं सदी का भारत:विश्व व्यवस्था में एक निर्णायक आवाज
भारत का लोकतंत्र विश्व में सबसे बड़ा और जीवंत माना जाता है। यहां की चुनाव प्रणाली को संविधान द्वारा सुनिश्चित की गई स्वतंत्रता, निष्पक्षता और पारदर्शिता की कसौटी पर खरा उतरना होता है। परंतु कुछ ऐसे क्षण आते हैं, जब लोकतंत्र को उसकी परिभाषा और नैतिकता पर कसौटी से गुजरना पड़ता है। ऐसा ही एक ऐतिहासिक अवसर वर्ष 1975 में …
Read More »लेख@ क्या बिहार में सुशासन अब जंगलराज में बदल रहा है?
बिहार में एक बार फिर कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। बेखौफ अपराधियों का आतंक,दिन-दहाड़ेहत्याएं,लूट, अपहरण और महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध यह संकेत दे रहे हैं कि ‘सुशासन बाबू’ के नाम से मशहूर नीतीश कुमार का प्रशासन कहीं अपने वादों और आदर्शों से भटकता नजर आ रहा है। आगामी विधानसभा चुनाव की दस्तक के बीच आमजन में …
Read More »लेख@ आया सावन झुमके,आया सावन
बारिश की ठंडी हवा और बूँदों का स्पर्श,सावन का मौसम,इश्क¸ और मोहब्बत की कहानियों के लिए सबसे खूबसूरत पृष्ठभूमि है।बादलों की गूंज में आशिक का दिल और भी बेचैन हो जाता है, और माशूक की यादें भीगी फिज़ाओं में कुछ ज़्यादा ही जुनून के साथ नाचती महसूस होती हैं। आशिक इस बरसात में दीवार की ओट में उस माशूक को …
Read More »लेख@ बाजार दिखा बड़ा लेकिन खरीदार है छोटा क्या टिक पाएगी टेस्ला इंडिया में?
मुंबई के बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स की चमचमाती सड़कें,शीशे के भव्य शोरूम में खड़ी एक कार और बाहर भीड़ का उत्साह 15 जुलाई की सुबह कुछ ऐसी ही थी,जब भारत में टेस्ला ने आधिकारिक तौर पर कदम रखा। टेस्ला यानी उस सपने का नाम, जो अमेरिका में नवाचार की पहचान बन चुका है। लेकिन भारत में यह सपना साकार होगा या फिर …
Read More »लेख@ मुगल शासक अकबर के शासन पर उठते सवाल क्यों?
अभी एक चर्चा का विषय बना है मुग़ल सम्राट अकबर का एन सी आर टी के पाठ्यक्रम में बदलाव जिसमें पहले अकबर क़ो इतिहास की पाठ्यपुस्तकों में एक अच्छा मुग़ल शासक बताया गया उसपर कई çफ़ल्म भी बने लेकिन अच्छे इतिहासकार से अहले जानने की कोशिश करें जलालुद्दीन मोहम्मद अकबर मुगल को अक्सर एक महान और सहिष्णु व्यक्ति बताया जाता …
Read More »लेख@ बिहार चुनाव 2025: ईमान,इस्लाम औरइंतकाम के त्रिकोण में उलझा मुस्लिम वोट बैंक
बिहार की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक हमेशा से एक निर्णायक शक्ति रहा है, लेकिन 2025 के विधानसभा चुनाव में यह वोट बैंक पहली बार तीन गहरे और परस्पर विरोधी विमर्शों के बीच फंसा हुआ है ईमान, इस्लाम, और इंतकाम। यह न सिर्फ चुनावी रणनीतियों को जटिल बना रहा है, बल्कि मुस्लिम मतदाताओं को भी गहरे अंतर्द्वंद्व में डाल रहा …
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