प्रयागराज,09 सितम्बर 2023 (ए)। उत्तर प्रदेश में मदरसों का निरीक्षण करने वाली विशेष जांच टीम की रिपोर्ट के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसों के खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई को चुनौती देने वाली याचिकाओं को खारिज कर दिया. अदालत ने कहा कि राज्य सरकार अधिनियम, 2004 (यूपी बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004) के अनुरूप कुछ आपातकालीन परिस्थितियों में भी बोर्ड (उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन) का कोई संदर्भ दिए बिना तत्काल कार्रवाई करने के लिए सरकार पूरी तरह से सशक्त है. यह आदेश न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र की एकलपीठ ने अंजुमन सिद्धिकिया जामिया नुरुल ओलूम व चार अन्य के साथ संबंधित याचिकाएं खारिज करते हुए पारित किया. याचिकाओं में यह आरोप लगाया गया था कि उनके खिलाफ राज्य सरकार की कार्रवाई एकपक्षीय है. अतः एसआईटी की रिपोर्ट और परिणामी निर्णयों को रद्द किया जाना चाहिए. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड और राज्य सरकार शक्तिहीन या कार्यहीन नहीं है. अगर किसी भी तरह से कोई अवैधता, अनियमितता, दोष या गलतबयानी आदि संज्ञान में आती है, जिससे यह निष्कर्ष निकाला जा सके कि किसी मदरसे को गलत तरीके से मान्यता दी गई है या मान्यता की शर्तों का उल्लंघन किया जा रहा है तो मान्यता खारिज करने के लिए तत्काल कार्रवाई की जा सकती है.
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