नई दिल्ली, 30 अगस्त 2022। सर्वोच्च न्यायालय ने 1992 मे बाबरी ढाचे गिराए जाने से सबधित सभी तरह की कार्यवाही को बद करने का बड़ा फैसला लिया है। इसी के साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले से जुड़ी दाखिल अवमानना याचिका को भी बद करने का फैसला लिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि समय के साथ अयोध्या मे राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले मे शीर्ष अदालत के 2019 के फैसले को देखते हुए अब इस सबध मे अवमानना याचिका का कोई औचित्य नही रह जाता। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता असलम भूरे अब इस दुनिया मे नही है, इसलिए अब इस मामले को बनाए रखना जरूरी नही है।
बता दे कि 6 दिसबर 1992 मे अयोध्या मे बाबरी ढाचे को भीड़ द्वारा गिरा दिया गया था। इस मामले मे भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती सहित कई नेताओ के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
जिसके बाद देश मे हुए साप्रदायिक दगो मे दो हजार से ज्यादा लोगो की जान गई थी। हालाकि बाद मे अधिकाश आरोपियो को कोर्ट ने राहत दे दी। बाद मे 2019 मे सुप्रीम कोर्ट ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मे रामजन्मभूमि के पक्ष मे फैसला सुनाया। वही मुस्लिमो के लिए अयोध्या मे एक अलग स्थान मे मस्जिद बनाने के लिए 5 एकड़ की जमीन मुहैया कराया।
सुप्रीम कोर्ट मे याचिकाकर्ता मोहम्मद असलम भूरे ने 1991 मे एक याचिका दायर की थी। इसके बाद बाबरी ढाचा गिर गया। इसके बाद 1992 मे उन्होने अवमानना याचिका दायर की थी। असलम भूरे की की 2010 मे मौत हो गई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा याचिकाकर्ता की मौत भी हो गई है, इसलिए अवमानना याचिका का कोई औचित्य नही है।
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