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एमसीबी/खड़गवां@ 35 साल पुरानी पानी टंकी बनी खतरे का संकेत,हादसे के इंतजार में पीएचई विभाग?

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जनपद पंचायत,मनरेगा कार्यालय और आदिम जाति सहकारी समिति के बैंक के बीच स्थित टंकी, रोजाना पहुंचते हैं सैकड़ों ग्रामीण, तकनीकी सुरक्षा जांच की जरूरत…
-राजेन्द्र शर्मा-
एमसीबी/खड़गवां,01 नवम्बर 2026(घटती-घटना)।
मुख्यालय में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (पीएचई) की नल-जल योजना के तहत मध्यप्रदेश शासन के समय निर्मित लगभग 35 साल पुरानी पानी टंकी अब सुरक्षा को लेकर चिंता का विषय बनती जा रही है,लंबे समय से उपयोग में रही इस टंकी की वर्तमान स्थिति और संरचनात्मक मजबूती को लेकर तकनीकी जांच की आवश्यकता महसूस की जा रही है,यदि समय रहते इसकी स्थिति का परीक्षण नहीं कराया गया तो भविष्य में किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह टंकी किसी सुनसान स्थान पर नहीं,बल्कि खड़गवां मुख्यालय के ऐसे हिस्से में स्थित है,जहां जनपद पंचायत कार्यालय,मनरेगा कार्यालय,ग्रामीण यांत्रिकी विभाग और आदिम जाति सहकारी समिति का बैंक सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालय संचालित हैं,इन कार्यालयों में प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण अपने शासकीय कार्यों के सिलसिले में पहुंचते हैं,ऐसे में टंकी की सुरक्षा का सवाल सीधे आम नागरिकों की जान-माल की सुरक्षा से जुड़ जाता है।
35 साल पुरानी संरचना की जांच जरूरी
करीब साढ़े तीन दशक पुरानी पानी टंकी की वर्तमान स्थिति का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाना आवश्यक है,समय के साथ कंक्रीट का क्षरण, सरिया में जंग,दरारें और अन्य संरचनात्मक कमजोरियां पैदा हो सकती हैं,हालांकि,टंकी की वास्तविक स्थिति तकनीकी परीक्षण के बाद ही स्पष्ट होगी,इसलिए विशेषज्ञों से इसकी मजबूती और सुरक्षा की जांच कराना जरूरी है,सवाल यह भी है कि निर्माण के बाद से अब तक टंकी की मरम्मत और रखरखाव कब-कब कराया गया? क्या नियमित रूप से इसका निरीक्षण हुआ है? यदि तकनीकी परीक्षण कराया गया है तो उसकी रिपोर्ट क्या है? पीएचई विभाग को इन सवालों पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
सरकारी कार्यालयों के बीच संभावित खतरा
टंकी के आसपास सरकारी कार्यालय होने के कारण यहां ग्रामीणों की लगातार आवाजाही बनी रहती है,जनपद पंचायत और मनरेगा कार्यालय में पंचायत संबंधी कार्यों के लिए लोग पहुंचते हैं, वहीं सहकारी समिति के बैंक और अन्य कार्यालयों में भी प्रतिदिन लोगों की उपस्थिति रहती है,ऐसे स्थान पर स्थित पुरानी पानी टंकी की सुरक्षा को लेकर किसी भी तरह की अनदेखी गंभीर साबित हो सकती है,यदि संरचना में कोई कमजोरी है तो उसका समय रहते पता लगाना और आवश्यक सुरक्षा उपाय करना विभाग की जिम्मेदारी है, तकनीकी जांच पूरी होने तक जरूरत के अनुसार टंकी के आसपास सुरक्षा घेरा बनाने जैसे कदम भी उठाए जा सकते हैं।
क्या हादसे के बाद जागेगा विभाग?
अब सबसे बड़ा सवाल पीएचई विभाग की जिम्मेदारी को लेकर है। क्या विभाग ने हाल के वर्षों में इस टंकी का तकनीकी निरीक्षण कराया है? यदि टंकी सुरक्षित है तो उसकी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए,वहीं,यदि जांच में कोई कमजोरी सामने आती है तो तत्काल मरम्मत,मजबूतीकरण अथवा आवश्यकतानुसार टंकी को निष्कि्रय करने की कार्रवाई होनी चाहिए,खड़गवां मुख्यालय में रोजाना पहुंचने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन और संबंधित विभाग को मौके का निरीक्षण कराना चाहिए,आखिर किसी सार्वजनिक संरचना की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हादसे का इंतजार क्यों किया जाए? 35 साल पुरानी पानी टंकी की तकनीकी जांच कराकर पीएचई विभाग को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,ताकि सरकारी कार्यालयों में आने वाले ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर बनी आशंका दूर हो सके।


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