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बैकुंठपुर@13 किलोमीटर सड़क चौड़ीकरण पर फिर पेच…कोई 7 तो कोई 11 मीटर का पक्षधर,9 मीटर पर प्रशासन कायम

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  • सड़क चौड़ीकरण पर सहमति का इंतजार,82 लोग प्रभावित,मुआवजा प्रक्रिया शुरू,कलेक्टर ने फिर कराई अंतिम नाप की तैयारी
  • बैकुंठपुर को कैसी सड़क चाहिए? 7 मीटर की मांग,9 मीटर का आदेश और 11 मीटर की जरूरत का तर्क
  • बैठक पर बैठक,प्रस्ताव पर
  • प्रस्ताव… बैकुंठपुर की सड़क आखिर कितनी चौड़ी होगी?
  • शहर के भविष्य की सड़क पर वर्तमान की खींचतान,9 मीटर चौड़ीकरण पर भी नहीं थम रहा विवाद
  • 13 मीटर से 9 मीटर तक सिमटा प्रस्ताव, अब 7 मीटर की मांग,11 मीटर के पक्ष में भी उठी आवाज…
  • 82 प्रभावितों का मुआवजा शुरू,नजूल भूमि का होगा नवीनीकरण,फिर भी सड़क चौड़ीकरण पर असमंजस


-संवाददाता-
बैकुंठपुर,01 नवम्बर 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिला मुख्यालय बैकुंठपुर की सड़क चौड़ीकरण परियोजना अब विकास की जरूरत और व्यक्तिगत हितों के बीच उलझती नजर आ रही है,शहर को बेहतर यातायात सुविधा देने के उद्देश्य से प्रस्तावित इस महत्वपूर्ण परियोजना पर लंबे समय से चर्चा चल रही है,कभी 11 मीटर चौड़ी सड़क बनाने की बात सामने आई, फिर प्रस्ताव घटाकर 9 मीटर किया गया और अब कुछ प्रभावित लोगों की ओर से इसे 7 मीटर तक सीमित रखने की मांग की जा रही है, दूसरी ओर शहर के कई नागरिकों का तर्क है कि जब वर्षों बाद सड़क चौड़ीकरण का अवसर मिल रहा है तो इसे 9 मीटर तक सीमित करने के बजाय 11 मीटर किया जाना चाहिए,ताकि आने वाले लंबे समय तक शहर को पर्याप्त सड़क सुविधा मिल सके।
यानी एक ही सड़क के लिए तीन अलग-अलग मांगें सामने हैं, कुछ लोग 7 मीटर चाहते हैं,प्रशासन 9 मीटर के प्रस्ताव पर आगे बढ़ना चाहता है,जबकि शहर का एक वर्ग 11 मीटर चौड़ीकरण की जरूरत बता रहा है,इस पूरे विवाद के बीच 13 किलोमीटर सड़क परियोजना में लगभग 82 लोगों के प्रभावित होने का अनुमान है और उनके मुआवजे की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है,कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने प्रभावित लोगों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए नजूल भूमि के नवीनीकरण की प्रक्रिया भी जल्द शुरू कराने की बात कही है, प्रशासन का स्पष्ट प्रयास है कि किसी भी प्रभावित व्यक्ति के साथ अन्याय या अनावश्यक नुकसान न हो,लेकिन सड़क चौड़ीकरण का काम भी अब और लंबित नहीं रहना चाहिए,इसके लिए सभी पक्षों से सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है,अब सवाल यह है कि आखिर बैकुंठपुर की सड़क कितनी चौड़ी होगी और वर्षों से लंबित यह परियोजना कब धरातल पर उतरेगी?
नजूल भूमि का नवीनीकरण
भी बनेगा समाधान का रास्ता

सड़क चौड़ीकरण को लेकर प्रभावित लोगों के सामने केवल मुआवजे का ही सवाल नहीं है, बल्कि नजूल भूमि से जुड़े दस्तावेज और उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया भी एक महत्वपूर्ण विषय है, कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने बैठक में कहा कि जिन लोगों की जमीन नजूल भूमि के अंतर्गत आती है,उनके नवीनीकरण की प्रक्रिया भी जल्द से जल्द शुरू कराने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे,इस पहल से उन प्रभावित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है,जिनकी भूमि नजूल श्रेणी में है और जिनके दस्तावेजी मामलों को लेकर शंकाएं हैं,हालांकि, नवीनीकरण की प्रक्रिया नियमानुसार और पात्रता के आधार पर पूरी की जाएगी,प्रशासन की कोशिश है कि भूमि संबंधी मामलों को स्पष्ट कर प्रभावित लोगों की आशंकाओं को दूर किया जाए,ताकि सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ सके,कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी का नुकसान नहीं चाहता और प्रभावित परिवारों की समस्याओं को समझते हुए उचित कदम उठाए जा रहे हैं,ऐसे में मुआवजा और नजूल भूमि के नवीनीकरण की प्रक्रिया इस परियोजना में सहमति बनाने के महत्वपूर्ण आधार बन सकते हैं।
11 मीटर से 9 मीटर और अब 7
मीटर की मांग,आखिर विवाद कहां?

सड़क चौड़ीकरण के पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल सड़क की प्रस्तावित चौड़ाई को लेकर है,शुरुआत में 11 मीटर चौड़ी सड़क की चर्चा थी,इसके बाद प्रस्तावित चौड़ाई घटाकर 9 मीटर की गई, इसके बावजूद कुछ लोगों की ओर से 7 मीटर तक चौड़ीकरण रखने की मांग की जा रही है,प्रशासन की ओर से 9 मीटर चौड़ीकरण के प्रस्ताव को स्वीकृत परियोजना के अनुरूप बताया गया है,बैठक में यह भी जानकारी दी गई कि 9 मीटर चौड़ीकरण का आदेश आ चुका है और इसी के आधार पर आगे की प्रक्रिया की जा रही है,अब सवाल यह है कि जब प्रस्तावित चौड़ाई पहले ही 11 मीटर से घटाकर 9 मीटर की जा चुकी है,तब इसे और घटाकर 7 मीटर करने की मांग का आधार क्या है? प्रभावित लोगों की आपत्तियों को समझना जरूरी है,लेकिन सड़क चौड़ीकरण के मूल उद्देश्य और शहर की भविष्य की जरूरतों को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता,यदि सड़क की चौड़ाई लगातार घटाने की मांग उठती रहेगी तो परियोजना का स्वरूप ही प्रभावित हो सकता है,इसलिए यह जरूरी है कि सभी पक्षों के तर्कों को सुनने के बाद तकनीकी और सार्वजनिक हित के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाए।
शहरवासियों की मांग—9
नहीं,11 मीटर हो चौड़ीकरण…

इस पूरे मामले का एक दूसरा महत्वपूर्ण पहलू भी है,जहां कुछ प्रभावित लोग 7 मीटर चौड़ीकरण की मांग कर रहे हैं,वहीं शहर के कई नागरिकों का कहना है कि 9 मीटर भी भविष्य की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं हो सकता,उनका तर्क है कि सड़क चौड़ीकरण वर्षों बाद होने जा रहा है,इसलिए इसे दूरगामी सोच के साथ किया जाना चाहिए,शहरवासियों का कहना है कि यदि सड़क की चौड़ाई 11 मीटर रखी जाती है तो भविष्य में बढ़ते यातायात के दबाव को संभालने में अधिक सुविधा होगी, वर्तमान में 11 मीटर की अपेक्षा से प्रस्ताव को 9 मीटर तक सीमित किए जाने के बाद कुछ लोगों को आशंका है कि आने वाले वर्षों में सड़क फिर संकरी महसूस होने लगेगी,उनका तर्क है कि आज यदि सड़क को कम चौड़ा बनाया गया और कुछ वर्षों बाद यातायात का दबाव बढ़ने पर फिर चौड़ीकरण की जरूरत पड़ी तो दोबारा भूमि और संपत्ति प्रभावित हो सकती है,इससे न केवल लोगों को फिर परेशानी होगी,बल्कि सरकारी संसाधनों और निर्माण लागत पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है,यह तर्क भी विचारणीय है कि एक बार सड़क चौड़ीकरण होने के बाद लंबे समय तक शहर को सुविधा मिलनी चाहिए,हालांकि, 11 मीटर चौड़ीकरण की मांग पर अंतिम निर्णय परियोजना की तकनीकी स्वीकृति, उपलब्ध भूमि,लागत और संबंधित नियमों के अनुरूप ही संभव होगा।
कलेक्टर की पहल—किसी का नुकसान नहीं,लेकिन चौड़ीकरण जल्द शुरू हो-कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने बैठक में प्रभावित परिवारों और व्यवसायियों की बातों को गंभीरता से सुना,उन्होंने सभी पक्षों को समझाने और उनकी समस्याओं का समाधान निकालने पर जोर दिया,प्रशासन की ओर से यह प्रयास किया जा रहा है कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान किसी व्यक्ति को अनावश्यक नुकसान न हो और मुआवजे सहित भूमि से जुड़े मामलों का नियमानुसार निराकरण किया जाए, कलेक्टर का यह भी कहना है कि सड़क चौड़ीकरण का काम जल्द से जल्द शुरू होना चाहिए,इसके लिए सभी पक्षों को सहमति बनाने की दिशा में आगे आना होगा,उन्होंने एक बार फिर अंतिम नाप कराने की बात कही,ताकि किसी भी प्रभावित व्यक्ति को सड़क की सीमा, अपनी भूमि या प्रस्तावित चौड़ाई को लेकर कोई संदेह न रहे,अंतिम नाप के माध्यम से वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और लोगों की शंकाओं का समाधान करने की कोशिश की जाएगी,इससे यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि परियोजना के दायरे में किसकी कितनी भूमि या संपत्ति प्रभावित हो रही है।
निविदा प्रक्रिया जारी,दीपावली के बाद फिर होगी बैठक-प्रशासन की ओर से बताया गया है कि सड़क चौड़ीकरण की निविदा प्रक्रिया जारी है,वहीं प्रभावित परिवारों,व्यापारी संघों और प्रशासन के बीच दीपावली के बाद फिर बैठक आयोजित करने पर सहमति बनी है, अगली बैठक में शेष आपत्तियों और सुझावों पर चर्चा कर आगे का रास्ता निकालने की कोशिश होगी,अब इस बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्या 9 मीटर चौड़ीकरण को लेकर अंतिम सहमति बन पाएगी? क्या 7 मीटर की मांग करने वाले प्रभावित लोगों की शंकाओं का समाधान होगा? क्या शहरवासियों की 11 मीटर चौड़ीकरण की मांग पर तकनीकी स्तर पर विचार किया जाएगा? और क्या अंतिम नाप के बाद परियोजना को निर्माण की दिशा में आगे बढ़ाया जा सकेगा? इन सवालों के जवाब ही तय करेंगे कि बैकुंठपुर की यह बहुप्रतीक्षित सड़क परियोजना अब कितनी तेजी से आगे बढ़ेगी।
विकास की जरूरत और प्रभावितों के हित में संतुलन जरूरी-बैकुंठपुर जिला मुख्यालय होने के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं, सरकारी कार्यालय,अस्पताल,बाजार और अन्य जरूरी संस्थानों तक आवागमन के लिए शहर की सड़कें महत्वपूर्ण हैं,बढ़ते वाहनों और यातायात की जरूरतों को देखते हुए सड़क चौड़ीकरण की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है,लेकिन विकास का अर्थ प्रभावित परिवारों की समस्याओं की अनदेखी करना भी नहीं है,जिनकी जमीन या संपत्ति प्रभावित हो रही है,उन्हें नियमानुसार मुआवजा और भूमि संबंधी मामलों में स्पष्टता मिलनी चाहिए,दूसरी ओर, कुछ लोगों की आपत्तियों के कारण पूरे शहर की जरूरत से जुड़ी परियोजना अनिश्चितकाल तक लंबित भी नहीं रहनी चाहिए,इसलिए प्रशासन को ऐसा निर्णय लेना होगा जो तकनीकी रूप से उचित हो,प्रभावित लोगों के हितों की रक्षा करे और भविष्य की यातायात जरूरतों को भी ध्यान में रखे,7, 9 और 11 मीटर की मांगों के बीच अंतिम चौड़ाई का निर्धारण भावनाओं या व्यक्तिगत आग्रह के बजाय स्वीकृत परियोजना,तकनीकी आकलन और सार्वजनिक हित के आधार पर होना चाहिए,बैकुंठपुर की सड़क चौड़ीकरण परियोजना अब केवल सड़क की चौड़ाई का विवाद नहीं रह गई है,यह शहर के भविष्य, प्रभावित परिवारों के अधिकार,मुआवजे की पारदर्शिता और प्रशासनिक निर्णय क्षमता से जुड़ा विषय बन चुका है,82 प्रभावित लोगों की मुआवजा प्रक्रिया,नजूल भूमि का नवीनीकरण और अंतिम नाप जैसे कदम आगे बढ़ने की उम्मीद जरूर जगाते हैं,लेकिन शहर को अब केवल बैठकों और आश्वासनों की नहीं, बल्कि स्पष्ट समयसीमा और धरातल पर काम शुरू होने की प्रतीक्षा है। सवाल अब भी वही है—बैकुंठपुर की सड़क आखिर 7,9 या 11 मीटर की होगी और इसका अंतिम फैसला कब होगा?
13 किलोमीटर सड़क,82 प्रभावित परिवारों का मामला
खरवत चौक से जमगहना स्थित राष्ट्रीय राजमार्ग-43 के फोरलेन मार्ग तक लगभग 13 किलोमीटर लंबी सड़क का चौड़ीकरण प्रस्तावित है,इस परियोजना में करीब 82 लोगों के प्रभावित होने का अनुमान लगाया गया है,सड़क चौड़ीकरण के दायरे में आने वाले लोगों की भूमि और संपत्ति से जुड़े मामलों को लेकर प्रशासन ने मुआवजे की प्रक्रिया शुरू कर दी है,यह परियोजना केवल सड़क की चौड़ाई बढ़ाने तक सीमित नहीं है,बल्कि इससे प्रभावित परिवारों की भूमि,मकान,दुकान और अन्य संपत्तियों से जुड़े हित भी जुड़े हुए हैं,ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती है कि विकास कार्य के साथ प्रभावित लोगों को नियमानुसार मुआवजा और आवश्यक राहत उपलब्ध कराई जाए,किसी भी सड़क परियोजना में प्रभावित लोगों की आपत्तियों और आशंकाओं को सुनना जरूरी है,जिन लोगों की संपत्ति प्रभावित हो रही है, उनके लिए यह केवल सड़क निर्माण का मामला नहीं,बल्कि उनकी आजीविका और वर्षों से स्थापित व्यवसाय से भी जुड़ा विषय हो सकता है,इसलिए प्रशासन की ओर से मुआवजे की प्रक्रिया शुरू करना और व्यक्तिगत समस्याओं को सुनना महत्वपूर्ण कदम है।
9 मीटर में सड़क के साथ नाली,
शोल्डर और डिवाइडर की व्यवस्था

30 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर रोक्तिमा यादव की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में 9 मीटर चौड़ीकरण के पक्ष में कई महत्वपूर्ण तर्क रखे गए। बताया गया कि प्रस्तावित चौड़ाई में सड़क के साथ नाली,शोल्डर और रोड डिवाइडर के लिए स्थान उपलब्ध हो सकेगा,इससे केवल आवागमन ही नहीं,बल्कि सड़क के आसपास की सुविधाओं को व्यवस्थित करने में भी मदद मिल सकती है,बैठक में व्यापारी संघ के अधिकांश सदस्यों ने 9 मीटर चौड़ीकरण पर सहमति जताई,जबकि कुछ लोगों ने इसे 7 मीटर तक सीमित रखने का आग्रह किया,इससे स्पष्ट है कि प्रभावित परिवारों और व्यापारियों के बीच भी इस विषय पर एक जैसी राय नहीं है,सड़क की वास्तविक उपयोगिता केवल उसकी चौड़ाई से तय नहीं होती,उसके साथ नाली,जल निकासी, शोल्डर,पैदल आवागमन और यातायात प्रबंधन की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण होती है, इसलिए अंतिम निर्णय में इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखना जरूरी है।


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