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बैकुंठपुर@ अधूरी सड़क और वन विभाग की फेंसिंग पर सवाल, अविनाश पाठक ने कलेक्टर को सौंपे दो ज्ञापन

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कटगोड़ी-चरचा सड़क पूरी कराने की मांग, सोनहत-देवगढ़ फेंसिंग की जांच पर जोर,सड़क निर्माण से सरकारी कामों की गुणवत्ता तक, अविनाश पाठक ने उठाए दो जनहित के मुद्दे
-संवाददाता-
बैकुंठपुर, 27 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
जिले में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति और शासकीय निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर दो महत्वपूर्ण मुद्दे प्रशासन के सामने उठाए गए हैं,सांसद प्रतिनिधि एवं जिला कांग्रेस प्रवक्ता अविनाश पाठक ने कलेक्टर कोरिया से मुलाकात कर दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे, पहले ज्ञापन में कटगोड़ी से चरचा तक अधूरे पड़े सड़क निर्माण कार्य को पूरा कराने की मांग की गई,जबकि दूसरे ज्ञापन में कोरिया वनमंडल के अंतर्गत सोनहत एवं देवगढ़ रेंज में एएनआर योजना के तहत कराए गए तार फेंसिंग कार्यों की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई गई।
दोनों ज्ञापनों के जरिए एक ओर क्षेत्रीय आवागमन की समस्या के समाधान की आवश्यकता बताई गई,तो दूसरी ओर वन विभाग के निर्माण कार्यों में निर्धारित तकनीकी मानकों के पालन और सरकारी धन के उपयोग को लेकर सवाल खड़े किए गए,अविनाश पाठक ने प्रशासन से दोनों मामलों की गंभीरता से समीक्षा कर संबंधित विभागों के माध्यम से आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है, कटगोड़ी-चरचा सड़क का मामला लंबे समय से अधूरे पड़े निर्माण कार्य और क्षेत्रीय संपर्क व्यवस्था से जुड़ा है, वहीं, सोनहत एवं देवगढ़ रेंज में तार फेंसिंग की स्थिति को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप हुए हैं या नहीं।
पांच किलोमीटर की सीधी दूरी, लेकिन आवागमन में लगाना पड़ता है लंबा चक्कर
अविनाश पाठक ने कलेक्टर को सौंपे पहले ज्ञापन में कटगोड़ी से चरचा तक सड़क निर्माण का मुद्दा प्रमुखता से उठाया,उन्होंने बताया कि कटगोड़ी और चरचा कोयलांचल क्षेत्र के महत्वपूर्ण स्थान हैं, दोनों के बीच सीधी दूरी लगभग पांच किलोमीटर बताई गई है,लेकिन वर्तमान आवागमन व्यवस्था के कारण लोगों को अपेक्षाकृत लंबा रास्ता तय करना पड़ता है, ज्ञापन में दावा किया गया है कि यदि प्रस्तावित सड़क का निर्माण पूरा हो जाता है,तो आवागमन की दूरी में लगभग 20 किलोमीटर तक की कमी आ सकती है, इससे क्षेत्र के लोगों को समय और परिवहन खर्च की बचत होने के साथ एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में सहूलियत मिल सकती है,यह मार्ग क्षेत्रीय संपर्क के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सड़क उपलब्ध होने से स्थानीय नागरिकों और आसपास के क्षेत्रों से आने-जाने वाले लोगों को लाभ मिलने की संभावना है,हालांकि,दूरी में संभावित कमी और सड़क की उपयोगिता का सटीक आकलन संबंधित विभाग के मार्ग नक्शे,वर्तमान सड़क मार्ग तथा प्रस्तावित सड़क की लंबाई के आधार पर किया जाना आवश्यक होगा।
पहले शुरू हुआ निर्माण कार्य बीच में क्यों बंद हुआ?
ज्ञापन के अनुसार,कटगोड़ी से चरचा तक सड़क निर्माण कार्य पूर्व में शुरू किया गया था, लेकिन किन्हीं कारणों से इसे बीच में ही रोक दिया गया, इसके बाद से मार्ग को पूरा करने की आवश्यकता बनी हुई है। अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि निर्माण कार्य किस स्थिति में बंद हुआ,कितने हिस्से में काम पूरा हुआ और शेष निर्माण को पूरा करने के लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जानी है,अविनाश पाठक ने मांग की है कि संबंधित विभाग सड़क निर्माण की वर्तमान स्थिति की समीक्षा करे और अधूरे कार्य को पूरा कराने के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू करे, यदि पूर्व में निर्माण के लिए स्वीकृति, बजट या तकनीकी प्रक्रिया पूरी की गई थी,तो उसके आधार पर आगे की कार्ययोजना स्पष्ट की जानी चाहिए,किसी सड़क परियोजना का बीच में रुक जाना केवल निर्माण कार्य का मामला नहीं होता, बल्कि इससे उस मार्ग पर निर्भर लोगों की अपेक्षाएं भी प्रभावित होती हैं, ऐसे में परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट करना और निर्माण अधूरा रहने के कारणों की जानकारी सामने लाना जरूरी है।
कोयलांचल क्षेत्र की कनेक्टिविटी मजबूत करने की मांग…
कटगोड़ी और चरचा के बीच सड़क निर्माण की मांग क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के उद्देश्य से उठाई गई है,सड़क पूरी होने पर स्थानीय लोगों को आवागमन के लिए अधिक सुविधाजनक विकल्प मिल सकता है, इससे समय की बचत के साथ परिवहन संबंधी खर्च कम होने की संभावना भी जताई गई है, अविनाश पाठक ने प्रशासन से इस मार्ग की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए निर्माण कार्य को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाने की मांग की है,ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत सरकार के कोयला मंत्री और लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) को भी भेजे जाने का उल्लेख किया गया है, ताकि संबंधित स्तर पर इस विषय पर ध्यान दिया जा सके,अब यह देखना होगा कि सड़क निर्माण के संबंध में संबंधित विभाग क्या जानकारी उपलब्ध कराता है और अधूरे कार्य को पूरा करने के लिए क्या समय-सीमा तय की जाती है,निर्माण की वर्तमान स्थिति,स्वीकृत राशि और शेष कार्य का विवरण सामने आने से इस मांग की प्रशासनिक स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
सोनहत-देवगढ़ रेंज में एएनआर तार फेंसिंग की गुणवत्ता पर सवाल
दूसरे ज्ञापन में अविनाश पाठक ने कोरिया वनमंडल के अंतर्गत सोनहत और देवगढ़ रेंज में एएनआर योजना के तहत कराए गए तार फेंसिंग कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठाए हैं, उन्होंने आरोप लगाया है कि कई स्थानों पर निर्धारित मानकों के अनुरूप निर्माण नहीं किया गया और कार्य पूरा होने के कुछ समय बाद ही सीमेंट के पोल तथा तार जमीन पर गिरने लगे, ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया है कि निर्माण के दौरान बालू और सीमेंट का निर्धारित अनुपात में उपयोग नहीं किया गया,यदि स्थल निरीक्षण और तकनीकी जांच में इन आरोपों की पुष्टि होती है, तो निर्माण की गुणवत्ता,सामग्री के उपयोग और कार्य की निगरानी से जुड़े पहलुओं की समीक्षा करना आवश्यक होगा, फिलहाल ये आरोप ज्ञापन के माध्यम से लगाए गए हैं, इनकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं हुई है,इसलिए निर्माण की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने के लिए संबंधित विभागीय अभिलेखों,स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी मानकों के आधार पर निष्पक्ष जांच जरूरी होगी।
स्टीमेट के अनुरूप काम हुआ या नहीं,जांच में हो स्पष्ट
सरकारी निर्माण कार्यों में स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी मापदंडों का पालन महत्वपूर्ण होता है, इसी आधार पर अविनाश पाठक ने मांग की है कि एएनआर तार फेंसिंग के निर्माण की जांच संबंधित स्टीमेट और तकनीकी मानकों के अनुरूप कराई जाए, जांच के दौरान कार्य से जुड़े स्वीकृत प्राक्कलन,माप पुस्तिका,सामग्री के उपयोग और भुगतान संबंधी अभिलेखों की समीक्षा की जा सकती है, इसके साथ ही स्थल पर उपलब्ध निर्माण की स्थिति का मिलान विभागीय रिकॉर्ड से किया जाना चाहिए, ताकि वास्तविक कार्य और दस्तावेजों में दर्ज प्रगति के बीच किसी अंतर की स्थिति स्पष्ट हो सके,अविनाश पाठक ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही प्रमाणित होती है, तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों अथवा निर्माण एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई की जाए,इस मामले में निष्पक्ष जांच का महत्व इसलिए भी है कि इससे आरोपों की तथ्यात्मक स्थिति सामने आ सकेगी, यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप पाया जाता है,तो संबंधित विभाग तथ्य प्रस्तुत कर स्थिति स्पष्ट कर सकता है,वहीं, यदि कमियां प्रमाणित होती हैं, तो नियमों के अनुसार सुधार और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।
वन क्षेत्र में फेंसिंग की उपयोगिता और गुणवत्ता दोनों महत्वपूर्ण
वन क्षेत्र में तार फेंसिंग जैसे निर्माण कार्यों का उद्देश्य निर्धारित क्षेत्र के घेराव और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करना होता है,ऐसे कार्यों की उपयोगिता इस बात पर भी निर्भर करती है कि निर्माण निर्धारित मानकों के अनुसार हुआ है या नहीं और उसकी वर्तमान स्थिति कैसी है,यदि पोल और तार वास्तव में जगह-जगह गिर रहे हैं,जैसा कि ज्ञापन में आरोप लगाया गया है, तो इससे फेंसिंग की प्रभावशीलता प्रभावित होने की आशंका हो सकती है, हालांकि,इसकी वास्तविक स्थिति जानने के लिए मौके पर निरीक्षण और तकनीकी परीक्षण आवश्यक है,ऐसे मामलों में केवल शिकायत या विभागीय जवाब के आधार पर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय निर्माण की गुणवत्ता,सामग्री,स्वीकृत लागत और वास्तविक स्थिति का संयुक्त परीक्षण किया जाना चाहिए,इससे सरकारी कार्यों की पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने में मदद मिल सकती है।
केवल कागजी जांच नहीं, मौके पर हो भौतिक सत्यापन
अविनाश पाठक ने मांग की है कि सोनहत और देवगढ़ रेंज में एएनआर योजना के अंतर्गत कराए गए तार फेंसिंग कार्यों की जांच केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, जांच के दौरान संबंधित स्थलों का निरीक्षण कर यह देखा जाना चाहिए कि सीमेंट पोल और तारों की वर्तमान स्थिति क्या है तथा निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन के अनुरूप कराया गया है या नहीं,उन्होंने निर्माण में उपयोग की गई सामग्री,पोल की मजबूती,तारों की स्थिति और कार्य की पूर्णता की जांच कराने की मांग की है, इसके साथ ही स्वीकृत राशि और वास्तविक निर्माण के बीच किसी अंतर की स्थिति में उसका कारण भी स्पष्ट किया जाना चाहिए,यदि किसी स्थान पर पोल और तार गिरने की शिकायत है, तो उस स्थान का भौतिक सत्यापन कर निर्माण की मजबूती तथा संभावित तकनीकी खामियों का परीक्षण किया जा सकता है,इससे यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि समस्या निर्माण की गुणवत्ता,सामग्री,रखरखाव या किसी अन्य कारण से जुड़ी है।
दो ज्ञापन सौंपकर प्रशासन से कार्रवाई की अपेक्षा
कलेक्टर कोरिया को सौंपे गए दोनों ज्ञापनों के माध्यम से अविनाश पाठक ने जिले से जुड़े दो अलग-अलग जनहित के मुद्दों पर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया है,कटगोड़ी-चरचा सड़क का मामला क्षेत्रीय आवागमन को सुगम बनाने और अधूरे निर्माण कार्य को पूरा कराने से जुड़ा है,जबकि सोनहत एवं देवगढ़ रेंज में एएनआर तार फेंसिंग का मामला निर्माण की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं की जांच से संबंधित है,एक मामले में सड़क निर्माण की वर्तमान स्थिति और आगे की कार्ययोजना स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है, दूसरे मामले में निर्माण की गुणवत्ता और स्वीकृत प्राक्कलन के अनुपालन की जांच की मांग की गई है, दोनों ही मामलों में संबंधित विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी,अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि प्रशासन इन ज्ञापनों पर क्या कार्रवाई करता है,सड़क निर्माण के संबंध में क्या निर्णय लिया जाता है और वन विभाग के फेंसिंग कार्यों की जांच कराई जाती है या नहीं,फिलहाल दोनों मुद्दों पर ज्ञापन के माध्यम से मांग उठाई गई है, सड़क निर्माण और फेंसिंग की गुणवत्ता को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित विभागों की जांच, अभिलेखों और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


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