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अम्बिकापुर@ वायरल वीडियो के बाद हरकत में आई पुलिस,पांच नाबालिग पकड़ाए

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नमनाकला पॉलिटेक्निक ग्राउंड में छात्र से मारपीट का मामला…बुलेट जब्त,लेकिन सवाल यह कि ऐसी घटनाओं पर पहले से अंकुश क्यों नहीं?
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,27 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
शहर में मामूली विवाद पर मारपीट, सरेआम दबंगई और घटनाओं के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नमनाकला स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड में दसवीं कक्षा के एक छात्र के साथ मारपीट के मामले में गांधीनगर पुलिस ने पांच विधि से संघर्षरत बालकों को पकड़ने और घटना में प्रयुक्त एक बुलेट मोटरसाइकिल जब्त करने की जानकारी दी है। पुलिस की कार्रवाई को मामले में प्रगति जरूर माना जा सकता है,लेकिन इस घटना ने शहर में किशोरों की सुरक्षा,कानून के प्रति सम्मान और पुलिस की निवारक कार्रवाई को लेकर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रकरण के अनुसार,छात्र अपने साथी के साथ मोटरसाइकिल से जा रहा था। इसी दौरान बुलेट मोटरसाइकिल चलाने की बात को लेकर कुछ युवकों से विवाद हो गया। आरोप है कि युवकों ने गाली-गलौज करते हुए छात्र को नमनाकला स्थित पॉलिटेक्निक कॉलेज ग्राउंड की ओर ले जाकर उसके साथ मारपीट की। उसे बचाने पहुंचे साथी के साथ भी मारपीट किए जाने की शिकायत है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद मामला चर्चा में आया। प्रार्थी की रिपोर्ट पर गांधीनगर थाने में अपराध क्रमांक 679/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं में अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई। पुलिस के मुताबिक, कार्रवाई करते हुए पांच विधि से संघर्षरत बालकों को पकड़ा गया है। उनके कब्जे से घटना में इस्तेमाल की गई बुलेट मोटरसाइकिल भी जब्त की गई है। आगे की वैधानिक प्रक्रिया जारी है।
नाबालिग होना राहत नहीं, सुधार की जिम्मेदारी भी जरूरी : इस प्रकरण में पकड़े गए पांचों को पुलिस ने विधि से संघर्षरत बालक बताया है। ऐसे मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई के साथ किशोर न्याय व्यवस्था के उद्देश्यों को भी ध्यान में रखना आवश्यक है। नाबालिग होने का अर्थ यह नहीं कि हिंसा को सामान्य या स्वीकार्य मान लिया जाए। वहीं, कानून का उद्देश्य केवल दंड देना नहीं, बल्कि बालकों को सुधार और पुनर्वास का अवसर देना भी है।
परिवार,स्कूल, समाज और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि किशोरों में बढ़ती आक्रामकता, समूह के दबाव और दूसरों को डराने की प्रवृत्ति को समय रहते पहचाना जाए। सोशल मीडिया पर मारपीट का वीडियो बनाना या उसे प्रसारित करना किसी घटना को सामने लाने में मददगार हो सकता है,लेकिन हिंसा को मनोरंजन या बहादुरी के प्रदर्शन के रूप में प्रस्तुत करना समस्या को और गंभीर बना सकता है।
बुलेट जब्त हुई,अब जांच कितनी गहराई तक पहुंचेगी? पुलिस ने घटना में प्रयुक्त बुलेट मोटरसाइकिल जब्त की है। अब जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई,पीडि़त को किस तरह ग्राउंड तक ले जाया गया,मारपीट में किसकी क्या भूमिका रही और वायरल वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम की पुष्टि उपलब्ध साक्ष्यों से किस सीमा तक होती है। घटना के समय तेज रफ्तार वाहन चलाने या अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन की बात सामने आती है तो उसकी भी नियमानुसार जांच होनी चाहिए।
पुलिस के सामने यह सुनिश्चित करने की चुनौती है कि मामला केवल वायरल वीडियो के बाद हुई कार्रवाई बनकर न रह जाए। पीडि़त और उसके साथी को न्याय दिलाने,सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। अब सवाल सरगुजा पुलिस से हैः क्या नमनाकला और शहर के अन्य संवेदनशील इलाकों में नियमित गश्त,संदिग्ध गतिविधियों पर निगरानी और किशोरों की हिंसक गतिविधियों की रोकथाम के लिए कोई प्रभावी रणनीति बनाई जाएगी? पांच बालकों को पकड़ना इस मामले में कार्रवाई का महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन पुलिस की वास्तविक सफलता तब मानी जाएगी जब शहर में आम नागरिक और स्कूली बच्चे बिना भय के आवागमन कर सकें।
वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई,पहले की सतर्कता कहां थी?
इस मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि एक छात्र के साथ कथित मारपीट की घटना सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हुई। सवाल यह नहीं कि पुलिस ने आरोपियों को पकड़ा क्यों, बल्कि सवाल यह है कि शहर के संवेदनशील इलाकों में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से कितनी प्रभावी निगरानी और गश्त हो रही है। 24 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित समाचार रिपोर्टों में बताया गया था कि छात्र को कथित रूप से जबरन पॉलिटेक्निक ग्राउंड ले जाकर पीटा गया और घटना का वीडियो वायरल हुआ। शुरुआती रिपोर्टों में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने की जानकारी थी। अब पांच बालकों को पकड़े जाने की पुलिस की सूचना सामने आई है। इससे कार्रवाई में प्रगति स्पष्ट है,लेकिन यह भी सामने आता है कि घटना के बाद जांच और आरोपियों की पहचान का काम महत्वपूर्ण रहा। यहां पुलिस की भूमिका केवल अपराध दर्ज करने और घटना के बाद आरोपियों को पकड़ने तक सीमित नहीं हो सकती। सार्वजनिक स्थानों, स्कूल-कॉलेज के आसपास और उन इलाकों में जहां तेज रफ्तार वाहन चलाने तथा विवाद की शिकायतें सामने आती हैं, नियमित निगरानी और त्वरित हस्तक्षेप भी जरूरी है।
अंबिकापुर में पहले भी सामने आ चुकी हैं ऐसी घटनाएं…
यह मामला किसी एक घटना को शहर की पूरी कानून-व्यवस्था का प्रमाण मानने का आधार नहीं है, लेकिन पिछले कुछ समय में सामने आए दूसरे प्रकरणों को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता। फरवरी 2026 में महामाया चौक के पास नगर सैनिक और युवकों के बीच विवाद तथा मारपीट का वीडियो सामने आया था। अप्रैल 2026 में अंबिकापुर के एक पटवारी कार्यालय में मारपीट की घटना की रिपोर्ट प्रकाशित हुई। अगस्त में वाटर पार्क में दो गुटों के बीच मारपीट का वीडियो प्रसारित होने की खबर आई। इन घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग थीं,लेकिन सार्वजनिक स्थानों पर विवाद के हिंसा में बदलने और वीडियो के माध्यम से मामला व्यापक चर्चा में आने का पहलू सामने आया। दिसंबर 2025 में घटती-घटना ने मणिपुर थाना क्षेत्र के दर्रीपारा में दो युवकों की पिटाई के मामले में भाजपा पार्षद के बेटे सहित छह आरोपियों की गिरफ्तारी की खबर भी प्रकाशित की थी। इन घटनाओं से यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि हर मामले में पुलिस निष्कि्रय रही, लेकिन इतना जरूर है कि मारपीट की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए केवल बाद की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। रोकथाम,निगरानी और अपराध के प्रति स्पष्ट संदेश भी उतने ही जरूरी हैं।


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