
- तीन बड़े टेंडर,हजारों करोड़ की राशि और पात्रता पर सवाल! गुलाब कमरो ने खोला शिकायत का मोर्चा, 5,576 करोड़ की निविदाओं पर निरस्तीकरण की मांग…अपात्र फर्मों को पात्र बनाने का आरोप
- सिंचाई परियोजनाओं के टेंडर पर घमासान,14 अधिकारियों की भूमिका जांच के दायरे में लाने की मांग…
- तीन निविदाओं में कथित गड़बड़ी का आरोप,गुलाब कमरो ने मुख्य सचिव से की शिकायत
- जल संसाधन विभाग के बड़े टेंडरों पर सवालों की बौछार, जांच और निलंबन की मांग…
- हजारों करोड़ के सिंचाई टेंडर पर उठे सवाल, पात्रता से लेकर अधिकारियों की भूमिका तक जांच की मांग…
- 5,576 करोड़ की निविदाओं पर शिकायत से हलचल, टेंडर रद्द कर दोबारा प्रक्रिया अपनाने की मांग…
-रवि सिंह-
रायपुर/एमसीबी,27 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के जल संसाधन विभाग की तीन बड़ी सिंचाई परियोजनाओं की निविदा प्रक्रिया को लेकर पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने गंभीर सवाल उठाए हैं,उन्होंने इस संबंध में राज्य शासन के मुख्य सचिव और जल संसाधन विभाग के सचिव को शिकायत भेजकर लगभग 5,576 करोड़ रुपये की कुल निविदा राशि से जुड़ी तीन निविदाओं को निरस्त करने, पारदर्शी प्रक्रिया से दोबारा आमंत्रित करने तथा कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जांच कराने की मांग की है।
गुलाब कमरो की शिकायत में निविदा क्रमांक 190885, 190886 और 190888 का उल्लेख है,शिकायतकर्ता का आरोप है कि तकनीकी मूल्यांकन और दर खोलने की प्रक्रिया में पात्रता संबंधी गंभीर विसंगतियां सामने आने के बावजूद कुछ ठेकेदारों को पात्र माना गया,उन्होंने आरोपों के समर्थन में निविदावार विवरण देते हुए संबंधित अधिकारियों की कथित भूमिका का भी उल्लेख किया है, शिकायत के तीसरे पृष्ठ पर 14 अधिकारियों के नाम, पद और उनकी बताई गई भूमिका की सूची संलग्न है, हालांकि,शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है, इन मामलों में विभागीय जांच, मूल निविदा अभिलेखों और तकनीकी दस्तावेजों के परीक्षण के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
तीन निविदाएं,हजारों करोड़ की राशि और पात्रता पर सवाल…
शिकायत के अनुसार,तीनों निविदाएं अलग-अलग सिंचाई परियोजनाओं से संबंधित हैं,इनमें सिकासार-कोडार रिजर्वायर लिंक कैनाल,मोहामेला-सिसरार बैराज तथा मटनार-देवसराय बैराज परियोजनाओं का उल्लेख किया गया है,शिकायतकर्ता ने निविदाओं की पात्रता प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि अपात्र फर्मों को नियमों के विपरीत पात्र घोषित किया गया है,तो इससे प्रतिस्पर्धा और सरकारी धन के उचित उपयोग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, शिकायत में निविदा राशि लगभग 5,576 करोड़ रुपये बताई गई है,इसके साथ ही जीएसटी सहित लगभग 4,760 करोड़ रुपये की राशि का भी उल्लेख किया गया है,इन दोनों आंकड़ों का सटीक वित्तीय मिलान संबंधित निविदा दस्तावेजों और विभागीय रिकॉर्ड से किया जाना आवश्यक है,कमरो ने शासन से आग्रह किया है कि केवल शिकायत के आधार पर औपचारिक जवाब लेकर मामला समाप्त न किया जाए, बल्कि निविदा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की जांच की जाए, इसमें निविदा शर्तें, तकनीकी पात्रता, अनुभव प्रमाणपत्र, उपलब्ध कार्यभार,वित्तीय क्षमता और मूल्यांकन से जुड़े दस्तावेजों का परीक्षण शामिल होना चाहिए।
पहली निविदा में एनसीसी और रिथविक प्रोजेक्ट्स की पात्रता पर आपत्ति
शिकायत में निविदा क्रमांक 190888, मटनार-देवसराय बैराज परियोजना का उल्लेख किया गया है,इसकी अनुमानित लागत लगभग 1,636.69 करोड़ रुपये बताई गई है, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि एल-1 के रूप में उल्लेखित एनसीसी लिमिटेड के पास निविदा में मांगी गई भौतिक क्षमता संबंधी योग्यता उपलब्ध नहीं होने के बावजूद उसे पात्र मानकर आगे बढ़ाया गया, इसी निविदा में रिथविक प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की पात्रता पर भी आपत्ति जताई गई है, शिकायत के मुताबिक,संबंधित कंपनी के अन्य कार्यों और उपलब्ध कार्यभार के दस्तावेजों की तुलना करने पर उसकी पात्रता को लेकर सवाल खड़े होते हैं,शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि निविदा प्रक्रिया में कार्यभार और वित्तीय क्षमता से जुड़े तथ्यों का समुचित परीक्षण नहीं किया गया,इन आरोपों की पुष्टि के लिए कंपनी के प्रस्तुत दस्तावेजों,विभागीय मूल्यांकन रिपोर्ट और निविदा की मूल शर्तों का परीक्षण आवश्यक होगा,संबंधित कंपनियों और विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही इस मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
मोहामेला-सिसरार बैराज निविदा पर भी सवाल…
शिकायत में निविदा क्रमांक 190886,मोहामेला-सिसरार बैराज परियोजना का भी उल्लेख किया गया है,इसकी लागत लगभग 574.73 करोड़ रुपये बताई गई है,शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि इस निविदा में संबंधित ठेकेदारों की कार्यक्षमता और पात्रता का आकलन करते समय आवश्यक शर्तों का पालन नहीं किया गया,शिकायत में ओम मेटल्स इन्फ्राप्रोजेक्ट लिमिटेड तथा सहायक निविदाकार एमएस दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड का नाम दर्ज है,शिकायत के अनुसार, एक ओर कार्यभार पूरा नहीं होने और दूसरी ओर प्रस्तुत दस्तावेजों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठाए गए हैं,शिकायतकर्ता ने इन बिंदुओं की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है,यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि किसी कंपनी के विरुद्ध शिकायत में आरोप दर्ज होना अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है, संबंधित अभिलेखों की जांच और विभागीय जवाब के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
सिकासार-कोडार परियोजना में अनुभव प्रमाणपत्र पर आपत्ति
तीसरी निविदा क्रमांक 190885 सिकासार-कोडार रिजर्वायर लिंक कैनाल, गरियाबंद से संबंधित है,शिकायत में इसकी अनुमानित लागत लगभग 2,549.86 करोड़ रुपये बताई गई है,इस निविदा में दिलीप बिल्डकॉन लिमिटेड की पात्रता पर सवाल उठाते हुए शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि समान प्रकृति के कार्य का स्वतंत्र रूप से पूर्ण अनुभव होने संबंधी शर्तों का उचित परीक्षण नहीं किया गया,शिकायत में प्रस्तुत अनुभव प्रमाणपत्र और कार्य के वास्तविक हिस्से के बीच अंतर होने का दावा किया गया है, शिकायतकर्ता ने मांग की है कि अनुभव प्रमाणपत्रों,पूर्व कार्यों की प्रकृति, वास्तविक निष्पादन और निविदा की पात्रता शर्तों का तकनीकी स्तर पर परीक्षण कराया जाए, यदि दस्तावेजों में कोई विसंगति पाई जाती है,तो उसके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
शिकायत के तीसरे पृष्ठ पर 14 अधिकारियों के नाम
इस प्रकरण का महत्वपूर्ण पहलू यह है कि शिकायत केवल निविदा प्रक्रिया पर सामान्य सवाल उठाने तक सीमित नहीं है, तीसरे पृष्ठ पर संलग्न सूची में 14 अधिकारियों के नाम, पद और शिकायतकर्ता द्वारा बताई गई कथित भूमिका का उल्लेख किया गया है,सूची में जितेंद्र नेताम,आबताब आलम,संजय गुप्ता,अरविंद कोसल,अनन्या गुप्ता,आई.ई. सिद्धकी,एस.के. बर्मन,मक्सी कुंजूर,एलेक्जेंडर ग्राहम,नरेन्द्र कुमार पाण्डेय,वेद प्रकाश पाण्डेय,सुमन कुमार मिंज,संतोष साहू और ललित राजते के नाम दर्ज हैं,शिकायत में अलग-अलग अधिकारियों की भूमिका निविदा पात्रता,नोटशीट तैयार करने,दस्तावेजों की स्वीकृति अथवा परिवर्तन और तकनीकी मूल्यांकन से संबंधित बताई गई है, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि अपात्र फर्मों को पात्र घोषित करने की प्रक्रिया में संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की जानी चाहिए,यह सूची शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोपों का हिस्सा है। इसे अधिकारियों के विरुद्ध प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जा सकता,संबंधित अधिकारियों का पक्ष,उनकी वास्तविक भूमिका और विभागीय रिकॉर्ड की जांच इस मामले में महत्वपूर्ण होगी।
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