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28 अक्टूबर से 1 नवंबर तक सरगुजा में गरज-चमक और तेज हवाओं की आशंका,किसानों को कटाई रोकने और उपज सुरक्षित रखने की सलाह
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,27 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। खेतों में पककर तैयार हो रही धान की फसल पर अब मौसम की मार का खतरा मंडराने लगा है। रायपुर मौसम केंद्र से प्राप्त जानकारी के अनुसार, 28 अक्टूबर से 1 नवंबर 2026 के बीच सरगुजा जिले में बारिश, गरज-चमक,आकाशीय बिजली और तेज हवाओं की संभावना जताई गई है। इस दौरान प्रतिदिन लगभग 15 से 70 मिलीमीटर तक वर्षा हो सकती है। विशेष रूप से 30 अक्टूबर को करीब 70 मिलीमीटर बारिश का अनुमान है। ऐसे में खेतों में खड़ी धान की फसल गिरने और कटाई के बाद खुले में रखी उपज भीगने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। धान की फसल किसानों की सालभर की मेहनत और आमदनी का प्रमुख आधार है। ऐसे समय में लगातार बारिश होने से फसल की गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ कटाई और मड़ाई का काम भी बाधित हो सकता है। तेज हवाओं के साथ बारिश होने पर पककर तैयार धान के खेतों में गिरने की आशंका रहती है। वहीं, खुले में रखी कटी फसल और अनाज की बोरियां भीगने से उपज को सुखाने,भंडारण और बिक्री में परेशानी बढ़ सकती है।
बिजली गिरने के खतरे को भी नजरअंदाज न करें : जोनल एग्रीकल्चरल रिसर्च स्टेशन, अंबिकापुर के सहायक संचालक अनुसंधान डॉ. के.एल. पैंकरा ने किसानों से मौसम संबंधी आधिकारिक चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। उन्होंने फसलों के साथ पशुधन और कृषि संसाधनों की सुरक्षा पर भी ध्यान देने को कहा है। गरज-चमक और आकाशीय बिजली के दौरान खेतों में काम करने से बचें। ऐसी स्थिति में पेड़ों, बिजली के खंभों और खुले स्थानों से दूर किसी सुरक्षित, पक्के भवन में शरण लें। पशुओं को भी सुरक्षित और ढके हुए स्थान पर रखें।
मौसम देखकर ही खेतों में उतरें किसान : अगले कुछ दिनों में मौसम की स्थिति धान उत्पादक किसानों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाली है। ऐसे में जल्दबाजी में कटाई या मड़ाई करने के बजाय स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और आधिकारिक चेतावनियों को ध्यान में रखकर कृषि कार्यों की योजना बनाना जरूरी है। समय रहते फसल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने, तिरपाल की व्यवस्था करने और खेतों से अतिरिक्त पानी निकालने जैसे उपाय संभावित नुकसान को कम कर सकते हैं। फिलहाल किसानों के सामने चुनौती दोहरी है—एक ओर तैयार फसल को सुरक्षित बचाना और दूसरी ओर मौसम के कारण कृषि कार्यों में होने वाली देरी से निपटना। ऐसे में अगले पांच दिनों का मौसम धान की फसल और किसानों की उपज की सुरक्षा के लिहाज से अहम साबित हो सकता है।
कटाई-मड़ाई रोकने और उपज ढककर रखने की सलाह
कृषि मौसम विशेषज्ञ डॉ. रंजीत कुमार एवं यमलेश निषाद ने किसानों को प्रतिकूल मौसम के दौरान धान की कटाई, मड़ाई और कीटनाशकों के छिड़काव जैसे कृषि कार्य स्थगित रखने की सलाह दी है। उन्होंने कहा है कि कटी हुई धान की फसल तथा अनाज को सूखे और सुरक्षित स्थान पर रखा जाए। खेतों या खलिहानों में रखी फसल के ढेर तथा अनाज की बोरियों को तिरपाल से अच्छी तरह ढकें,ताकि बारिश का पानी उपज को नुकसान न पहुंचा सके। खेतों में जलभराव से बचने के लिए निकासी नालियों को साफ रखना भी जरूरी है। भारी बारिश के कारण सब्जियों और दलहनी फसलों में पानी भरने तथा फलदार पौधों की शाखाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है। इसलिए किसान अपने खेतों की स्थिति पर नजर रखें और जरूरत के अनुसार जल निकासी की व्यवस्था करें।
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