नई दिल्ली,01 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को संघ लोक सेवा आयोग की चयन प्रक्रिया को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढालने पर जोर देते हुए कहा कि भर्ती परीक्षा में केवल उम्मीदवार का ज्ञान ही नहीं बल्कि यह भी परखा जाना चाहिए कि वह सिविल सेवा में क्यों आना चाहता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत के लिए ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘सिटीजन फर्स्ट’ चयन की प्रमुख कसौटी होनी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि विकसित भारत के लिए जिस तरह की गवर्नेंस चाहिए उसका माध्यम यूपीएससी है। इसमें भर्ती होने वाले युवाओं की 2 कसौटी होनी चाहिए। पहली नेशन फर्स्ट और दूसरी सिटिजंस फर्स्ट। पीएम मोदी संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के 100 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में भारत मंडपम पहुंचे। उन्होंने आयोग से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित किताब का लोकार्पण किया। साथ ही शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी की। मोदी ने फ्लाई दुबई फ्लाइट को क्रैश से बचाने वाले पायलट स्मित मच्छर का जिक्र कर कहा कि भारतीय पायलट ने 9/11 होने से बचा लिया। मोदी ने कहा- आज मेरी उनके माता-पिता से बात हुई। आज पूरी दुनिया उन पर गर्व कर रही है। यूपीएससी हर साल इंजीनियरिंग, मेडिकल, डिफेंस समेत करीब 250 भर्ती परीक्षाएं कराता है। संस्था के पहले अध्यक्ष सर रॉस बार्कर (1926-32) थे।
100 के इतिहास में इसका नाम दो बार बदल चुका है। 1926 में नाम पब्लिक सर्विस कमीशन था,फिर 1937 में नाम फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन किया गया। 1950 में संविधान लागू होने के बाद यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन नाम दिया गया। कभी माना जाता था कि सरकार ही माई-बाप है,लेकिन आज हमारा मंत्र है नागरिक देवोभवः। देश का नागरिक हमारे लिए किसी देव से कम नहीं है। हमारे लिए नागरिक की सेवा सर्वोपरि है। इसलिए आज 21वीं सदी का भारत नई कार्य संस्कृति से आगे बढ़ रहा है। इसका मूल सिद्धांत है- प्रो पीपल,प्रो एक्टिव और गुड गवर्नेंस। प्रो पीपल यानी नागरिक के हितों को सर्वोपरी रखते हुए काम करना। प्रो एक्टिव यानी जब समस्या आए तब एक्शन के बजाय समस्या को पहले से एंटिसिपेट करके उसका समाधान तैयार हो। गुड गवर्नेंस यानी सरकार का अभाव, दवाब और अनावश्यक प्रभाव भी न हो। हमें प्रो पीपल,प्रो एक्टिव,गुड गवर्नेंस के आधार पर देश को वो प्रोफेशनल्स देने हैं जिनमें गरीब की तकलीफ समझने की संवेदना हो। जो युवा जोश के साथ आगे बढ़कर काम करे। जो इनोवेटिस तरीके से कठिन समस्याओं का रास्ता निकाले। जो देश की आवश्यक्ता को समझे। जो कानून का पालन कराए। ये भी परख सके कि लोगों का जीवन आसान हो रहा है। यूपीएससी और राज्यों के लोक सेवा आयोगों की क्षमता बढ़ाने का काम लगातार जारी रहना चाहिए। मिशन कर्मयोगी के तहत बनाए गए iGOT प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल आयोगों की आंतरिक व्यवस्था और वहां काम करने वाली टीम की ट्रेनिंग व क्षमता बढ़ाने के लिए किया जा सकता है।
सुभाष चंद्र बोस ने संस्कृत में पेपर लिखा था : मोदी
यूपीएससी के 100 साल एक उत्सव है। इसे लाखों लाख स्टूडेंट्स जीते हैं। हर भारतवासी को इस संस्था पर विश्वास है। 100 साल की यात्रा में पीढि़यां, सरकार, टेक्नोलॉजी, सिलेबस बदले, लेकिन यूपीएससी पर भरोसा आज भी उतना ही अटूट है। मैं एक गैलरी को देख रहा था। 1920 में सुभाष चंद्र बोस जब इस प्रक्रिया यानी आईसीएस से गुजरे तो उसकी पूरी जानकारी इस गैलरी में है। उस समय अंग्रेजों की हुकूमत थी, लेकिन तब संस्कृत का पेपर होता था और सुभाष जी ने संस्कृत में पेपर लिखा था।
कैंडिडेट के लिए दो कसौटियां : मोदी
मोदी ने कहा कि विकसित भारत के लिए जिस तरह की गवर्नेंस देश को चाहिए, उसका माध्यम यूपीएससी है। आज जिन युवाओं की भर्ती कर रहे हैं वो विकसित भारत के निर्माण में भूमिका निभाएंगे। इसी को ध्यान में रखते हुए हमें 2 कसौटियों को हमेशा ध्यान रखना है। पहली कसौटी है नेशन फर्स्ट, दूसरी कसौटी है सिटिजन्स फर्स्ट। इन्हीं दो भाव के आधार पर कैंडिडेट को परखा जाएगा और उनका सिलेक्शन होगा तो राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति आसान हो जाएगी।
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