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बैकुण्ठपुर@ ग्राउंड जीरो पर भाजपा जिलाध्यक्ष,बूथों तक संगठन की पड़ताल

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संगठन नीचे तक उतरा या नहीं,बूथ पर काम हो रहा है या नहीं—जमीनी हकीकत जानने निकला जिला नेतृत्व
-संवाददाता-
बैकुण्ठपुर,17 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)
। भारतीय जनता पार्टी जिला कोरिया ने संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद तेज कर दी है, इसी क्रम में 15 सितंबर 2026 को भाजपा जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में बूथ प्रवास कार्यक्रम निर्धारित किया गया, कार्यक्रम का फोकस केवल बूथों तक पहुंचने तक सीमित नहीं,बल्कि स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधे संवाद कर संगठन की जमीनी स्थिति, सक्रियता और सामने आ रही समस्याओं की जानकारी लेने पर रखा गया है, भाजपा के घोषित संगठनात्मक अभियान में बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं और आम लोगों से संवाद पर जोर दिया जा रहा है, राज्य स्तर पर भी ‘सेवा संकल्प अभियान’ के संदर्भ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भाजपा कार्यकर्ताओं के बूथ स्तर तक पहुंचकर लोगों से संवाद करने की बात कही है।
सुबह 7ः30 बजे से रात 9 बजे तक प्रवास
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भाजपा जिलाध्यक्ष का बूथ प्रवास सुबह 7ः30 बजे से रात 9 बजे तक चलेगा, इस दौरान महोरा-01 से प्रवास की शुरुआत करते हुए महोरा-02, डकई पारा, मानपुर,कोटकताल, हंतधवर,जमगहना,चंपा झर,बरदिया,पीपरडांड,नांगरा-भट्ठा,करदैयाखुर्द,पुंटा और अंगा सहित विभिन्न बूथों तक पहुंचने का कार्यक्रम है,लगातार लगभग पूरे दिन चलने वाले इस प्रवास में अलग-अलग बूथों पर स्थानीय पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से बातचीत प्रस्तावित है, इस लिहाज से कार्यक्रम को जिला संगठन और बूथ स्तर के कार्यकर्ताओं के बीच सीधे संवाद के अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।
सवाल सिर्फ बूथ तक पहुंचने का नहीं,सक्रियता जांचने का…
चुनावी संगठन में बूथ स्तर को महत्वपूर्ण इकाई माना जाता है,जिला नेतृत्व के इस प्रवास में यह समझने का अवसर रहेगा कि बूथ समितियां कितनी सक्रिय हैं, स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय कैसा है और पार्टी के संगठनात्मक कार्यक्रमों को बूथ तक किस तरह पहुंचाया जा रहा है,स्थानीय कार्यकर्ताओं से क्षेत्र की राजनीतिक एवं सामाजिक परिस्थितियों,लोगों से संपर्क और संगठन के कामकाज को लेकर फीडबैक लिया जा सकता है,इसके साथ ही बूथ स्तर पर सामने आने वाली व्यावहारिक समस्याओं की जानकारी भी नेतृत्व तक पहुंचने की संभावना है।
कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद,कमियों की पहचान पर जोर- कार्यक्रम में अलग-अलग बूथों के अध्यक्षों की जिम्मेदारी भी निर्धारित की गई है,ऐसे में जिला नेतृत्व के सामने बूथ अध्यक्षों और स्थानीय कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत का अवसर रहेगा, संगठन के लिए यह संवाद इसलिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि जिला या मंडल स्तर की बैठकों में प्रस्तुत रिपोर्ट और बूथ स्तर की वास्तविक स्थिति में अंतर होने की स्थिति में प्रत्यक्ष प्रवास के माध्यम से स्थानीय फीडबैक सामने आ सकता है,यदि किसी बूथ पर संगठनात्मक गतिविधियां अपेक्षित रूप से सक्रिय नहीं हैं,तो वहां अतिरिक्त कार्यकर्ताओं को जोड़ने या गतिविधियों को बढ़ाने की रणनीति बनाई जा सकती है।
‘मेरा बूथ-मेरा गौरव’ का संदेश- बूथ प्रवास के दौरान पार्टी की ओर से ‘मेरा बूथ, मेरा गौरव’, ‘सशक्त बूथ, सशक्त भाजपा, सशक्त भारत’ और ‘हर बूथ पर संवाद, हर कार्यकर्ता के साथ’ जैसे संदेशों पर जोर दिया गया है, इन नारों के जरिए पार्टी संगठन की प्राथमिकता बूथ स्तर तक सक्रियता और कार्यकर्ताओं से लगातार संपर्क के रूप में सामने रख रही है। भाजपा के संगठनात्मक साहित्य में भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं से संवाद और संगठन की उपस्थिति मजबूत करने पर लंबे समय से जोर दिया जाता रहा है।
ग्राउंड रिपोर्ट के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा प्रवास-जिला अध्यक्ष का सीधे बूथों तक पहुंचना संगठन के लिए स्थानीय स्तर का फीडबैक जुटाने का अवसर है,बड़े नेताओं की बैठकों में संगठन की स्थिति की समीक्षा एक स्तर पर होती है,जबकि बूथ पर जाकर कार्यकर्ताओं से बातचीत करने पर स्थानीय समस्याओं, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और संगठन के कार्यक्रमों के क्रियान्वयन की अलग तस्वीर सामने आ सकती है, इस दौरान यह भी देखा जा सकता है कि बूथ अध्यक्ष और अन्य जिम्मेदार पदाधिकारी अपनी निर्धारित जिम्मेदारियों को किस तरह निभा रहे हैं और आम लोगों के साथ उनका संपर्क कितना है।
सुबह महोरा से शुरुआत, रात अंगा में समापन- निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार बूथ प्रवास की शुरुआत सुबह 7ः30 बजे महोरा-01 से होगी, इसके बाद महोरा-02,डकई पारा,मानपुर,कोटकताल, हंतधवर,जमगहना,चंपा झर,बरदिया,पीपरडांड,नांगरा-भट्ठा,करदैयाखुर्द और पुंटा होते हुए रात 9 बजे अंगा बूथ में कार्यक्रम का समापन निर्धारित है, एक ही दिन में इतने बूथों तक पहुंचने के कार्यक्रम का उद्देश्य जिला नेतृत्व और बूथ कार्यकर्ताओं के बीच संपर्क को मजबूत करना तथा संगठन की गतिविधियों का स्थानीय स्तर पर फीडबैक लेना बताया जा रहा है।
अब फीडबैक पर रहेगी नजर- इस बूथ प्रवास के बाद सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह होगा कि जिला संगठन को जमीनी स्तर से क्या फीडबैक मिलता है, किन बूथों पर संगठन सक्रिय है, कहां कार्यकर्ताओं को अतिरिक्त सहयोग की जरूरत है और किन क्षेत्रों में संगठनात्मक गतिविधियों को और मजबूत करने की आवश्यकता महसूस होती है—इन पहलुओं पर आगे की रणनीति निर्भर कर सकती है,इस लिहाज से 15 सितंबर का यह बूथ प्रवास सिर्फ दौरा नहीं,बल्कि संगठन की जमीनी सक्रियता को समझने की प्रक्रिया के रूप में देखा जा रहा है,अंतिम तस्वीर जिला नेतृत्व को बूथों से मिलने वाले फीडबैक और उसके बाद किए जाने वाले संगठनात्मक कदमों से ही स्पष्ट होगी।


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