भारतेन्दु जयंती पर साहित्य-कला समिति का वार्षिकोत्सव,वंदना दत्ता को मिला ‘पं. जीवन नाथ मिश्र सम्मान’
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,11 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। हिन्दी साहित्य के युग प्रवर्तक भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की जयंती के अवसर पर भारतेन्दु साहित्य-कला समिति का वार्षिकोत्सव साहित्य,संगीत,नृत्य,विचार-विमर्श और सम्मान समारोह के साथ उत्साहपूर्वक मनाया गया। स्टेडियम परिसर स्थित भारतेन्दु साहित्य-कला भवन में आयोजित कार्यक्रम में साहित्य और कला से जुड़े बड़ी संख्या में सुधीजनों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों एवं समिति की अध्यक्ष श्रीमती नीलिमा मिश्र ने मां सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इसके बाद भारतेन्दु हरिश्चन्द्र एवं समिति के संस्थापक स्व. पं. जीवन नाथ मिश्र के छायाचित्र पर माल्यार्पण किया गया। मुख्य अतिथि मनेन्द्रगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र श्रीवास्तव, विशिष्ट अतिथि डॉ. सुदामा मिश्र एवं राजेश मिश्र तथा कार्यक्रम अध्यक्ष वरिष्ठ साहित्यकार बबन जी पाण्डेय का स्वागत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. संध्या सिंह ने किया।
भारतेन्दु हिन्दी के उत्थान के मील का पत्थर : विचार गोष्ठी में वरिष्ठ साहित्यकार वीरेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा कि भारतेन्दु काल हिन्दी गद्य की अनेक विधाओं के विकास का साक्षी रहा है। आज हिन्दी देश ही नहीं,बल्कि विदेशों में भी व्यापक रूप से बोली और समझी जा रही है। ऐसे दौर में हिन्दी के उत्थान में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के योगदान को मील का पत्थर कहा जा सकता है। डॉ. सुदामा मिश्र ने भारतेन्दु को नवजागरण का पुरोधा और राष्ट्रीय चेतना का संवाहक बताते हुए कहा कि उनके व्यक्तित्व में राष्ट्रप्रेम और भाषा के प्रति गहरा लगाव था। राजेश मिश्र ने कहा कि आधुनिक हिन्दी के निर्माण में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र की भूमिका केंद्रीय रही है। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार बबन जी पाण्डेय ने कहा कि भारतेन्दु हिन्दी साहित्य में युग प्रवर्तक के रूप में जाने जाते हैं। उन्होंने हिन्दी को जनभाषा के रूप में स्थापित करने और सामाजिक रूढि़यों के विरुद्ध चेतना जगाने का कार्य किया।
‘साहित्य समाज का दर्पण, सत्ता से सवाल करने का माध्यम’ : संस्था के संरक्षक-संयोजक द्वितेन्द्र मिश्र ने साहित्य और साहित्यकारों की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि साहित्यकार समाज के दर्पण की भूमिका निभाता है। वह तटस्थ रहकर समाज को दिशा दिखाने के साथ सत्ता से सवाल करने का साहस भी रखता है। इसी अवसर पर समिति के संस्थापक एवं दिवंगत पूर्व अध्यक्ष स्व. जीवन नाथ मिश्र की स्मृति में प्रदान किए जाने वाले ‘पं. जीवन नाथ मिश्र सम्मान-2026’ की घोषणा की गई। इस वर्ष सरगुजा की समाजसेविका वंदना दत्ता को उनके सामाजिक एवं बहुआयामी योगदान के लिए सम्मानित किया गया। अतिथियों ने उन्हें शॉल,श्रीफल,पुष्पगुच्छ,प्रशस्ति पत्र,स्मृति चिह्न एवं 11 हजार रुपए की सम्मान राशि प्रदान की। समिति की अध्यक्ष श्रीमती नीलिमा मिश्र ने वंदना दत्ता के व्यक्तित्व और सामाजिक कार्यों पर प्रकाश डालते हुए उन्हें समाज की महत्वपूर्ण धरोहर बताया। सम्मान प्राप्त करने के बाद वंदना दत्ता ने समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सम्मान को सभी के सहयोग का परिणाम बताया।
गीत-संगीत और लोककला ने बांधा समां : कार्यक्रम के दूसरे चरण में स्थानीय संगीत विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षक डॉ. मानक टंडन के मार्गदर्शन में लोकगीत,भजन सहित विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। एक छात्रा ने तीजन बाई की शैली में महाभारत के प्रसंग की प्रस्तुति देकर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। प्रेमानंद पातर ने भजन एवं गीत प्रस्तुत किए,जबकि गोधनपुर के रवि पाण्डेय ने गजलों की प्रस्तुति से समां बांध दिया। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती संध्या सिंह ने किया तथा आभार समिति के सचिव डॉ. सुधीर पाठक ने व्यक्त किया। समारोह में डॉ. पुष्पा सिंह,एम.एम. मेहता,हरिकिशन शर्मा,आर.डी. मिश्र, कन्हैया लाल गौड़,राम लोलार्क मिश्र,डॉ. राम कुमार मिश्र,देवेन्द्र दुबे सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, कलाकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रीतिभोज एवं शुभकामनाओं के साथ हुआ।
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