- प्रिंस की मौत ने खोली आश्रम की निगरानी व्यवस्था की पोल, अधीक्षक पर गिरी गाज
- कक्षा 4 के छात्र की मौत के बाद कलेक्टर-एसपी पहुंचे आश्रम, शुरू हुई जांच
- मझारटोला आश्रम में मासूम की मौत, अधीक्षक निलंबित, एसडीएम करेंगे जांच
- डबरी में मिली मासूम की लाश, आश्रम अधीक्षक निलंबित—कलेक्टर ने लिया जायजा
- बच्चे की मौत से हड़कंप, कलेक्टर-एसपी ने खंगाली आश्रम की सुरक्षा व्यवस्था
- मासूम प्रिंस की मौत पर प्रशासन का एक्शन, अधीक्षक निलंबित और जांच के आदेश
- प्रिंस की मौत के बाद प्रशासन सख्त, जिलेभर के आश्रमों की सुरक्षा पर नजर
-राजन पाण्डेय-
सोनहत/कोरिया,11 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। आदिवासी बालक आश्रम मझारटोला में कक्षा 4 में अध्ययनरत छात्र प्रिंस, पिता बिजेन्द्र सिंह की मौत के मामले ने जिला प्रशासन को झकझोर दिया है,आश्रम से छात्र के बिना सूचना अनुपस्थित होने और उसकी जानकारी समय पर उच्चाधिकारियों तक नहीं पहुंचाए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रोक्तिमा यादव ने आश्रम अधीक्षक अशोक एक्का को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है,साथ ही पूरे प्रकरण की विस्तृत जांच के लिए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, सोनहत को जिम्मेदारी सौंपी गई है। घटना की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुक्रवार को कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव और पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर स्वयं मझारटोला आश्रम पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने आश्रम की व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया,वहां रह रहे बच्चों से बातचीत की और उनकी सुरक्षा, उपस्थिति,स्वास्थ्य तथा निगरानी व्यवस्था के संबंध में जानकारी ली,इसके बाद अधिकारियों ने उस घटनास्थल का भी निरीक्षण किया, जहां डबरी से छात्र का शव बरामद हुआ था।
8 सितंबर की घटना ने खड़े किए गंभीर सवाल
प्रशासन के अनुसार 8 सितंबर 2026 को आदिवासी बालक आश्रम मझारटोला में अध्ययनरत कक्षा 4 का छात्र प्रिंस सुबह करीब 7 बजे से आश्रम में अनुपस्थित था, बाद में एक डबरी से बच्चे का शव बरामद हुआ, एक आवासीय आश्रम में रहने वाले छोटे बच्चे की अनुपस्थिति और उसके बाद उसकी मौत ने आश्रम की सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं,सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि बच्चे के आश्रम से अनुपस्थित होने की जानकारी कब हुई और उसके बाद उसकी तलाश के लिए तत्काल क्या कदम उठाए गए? क्या आश्रम में बच्चों की उपस्थिति की नियमित निगरानी हो रही थी? क्या प्रत्येक बच्चे के आने-जाने पर नजर रखने की व्यवस्था थी? क्या किसी बच्चे के बिना सूचना अनुपस्थित होने पर तत्काल उच्चाधिकारियों,पुलिस और अभिभावकों को सूचना देने की व्यवस्था का पालन किया गया? इन तमाम बिंदुओं की जांच अब एसडीएम सोनहत द्वारा की जाएगी।
अधीक्षक का निलंबन—प्रारंभिक कार्रवाई- मामले में प्रशासन ने आश्रम अधीक्षक अशोक एक्का के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है, यह कार्रवाई छात्र के बिना सूचना अनुपस्थित रहने और इसकी जानकारी उच्चाधिकारियों को नहीं दिए जाने के मामले में की गई है,हालांकि निलंबन को पूरे प्रकरण की अंतिम जिम्मेदारी नहीं माना जा सकता, जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि घटना से पहले और बाद में आश्रम स्तर पर कौन-कौन से कदम उठाए गए थे और किस स्तर पर चूक हुई,इसीलिए एसडीएम सोनहत को विस्तृत जांच सौंपी गई है।
एसडीएम की जांच में सामने आएगा असली घटनाक्रम-जांच के दौरान छात्र के आश्रम से अनुपस्थित होने की परिस्थितियों से लेकर उसकी तलाश और घटना की जानकारी प्रशासन तक पहुंचने तक के पूरे घटनाक्रम का परीक्षण किया जाएगा, जांच में यह भी देखा जाएगा कि छात्र की उपस्थिति आश्रम में किस समय दर्ज हुई थी? सुबह 7 बजे के आसपास उसकी अनुपस्थिति कैसे सामने आई? आश्रम प्रबंधन को छात्र के गायब होने की जानकारी कब हुई? जानकारी मिलने के बाद उसकी तलाश के लिए क्या कार्रवाई की गई? क्या उच्चाधिकारियों को तत्काल सूचना दी गई? क्या पुलिस अथवा अभिभावकों को समय पर सूचित किया गया? आश्रम में बच्चों की निगरानी के लिए निर्धारित व्यवस्था क्या थी? ड्यूटी पर तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी क्या थी? घटना के समय आश्रम प्रबंधन की भूमिका क्या रही? जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पूरे मामले में जिम्मेदारी की स्थिति और स्पष्ट होगी।
सिर्फ एक आश्रम नहीं,पूरे जिले की व्यवस्था पर सवाल
मझारटोला की घटना ने केवल एक आश्रम की व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े नहीं किए हैं, बल्कि जिले के सभी आश्रमों और छात्रावासों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी सामने ला दी है, आदिवासी अंचलों में संचालित आवासीय संस्थानों में बड़ी संख्या में बच्चे रहकर शिक्षा प्राप्त करते हैं,ऐसे में उनकी सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पढ़ाई और भोजन तक सीमित नहीं होती,बच्चे कब परिसर में हैं, कब बाहर जा रहे हैं,कौन अनुपस्थित है और उसकी सूचना किसे दी जानी है—इन सभी पहलुओं की प्रभावी निगरानी आवश्यक है, एक छोटे बच्चे के बिना सूचना अनुपस्थित होने की स्थिति में समय पर कार्रवाई कितनी महत्वपूर्ण है, यह घटना इसी ओर गंभीर संकेत करती है।
कलेक्टर ने सभी आश्रमों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के दिए निर्देश-मझारटोला की घटना के बाद कलेक्टर ने जिले के सभी आश्रमों और छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की नियमित उपस्थिति, सुरक्षा,स्वास्थ्य और सतत निगरानी को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं,संबंधित अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि बच्चों की उपस्थिति का नियमित सत्यापन हो और किसी बच्चे के बिना सूचना अनुपस्थित पाए जाने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाए, प्रशासनिक स्तर पर यह भी महत्वपूर्ण होगा कि केवल निरीक्षण और निर्देशों तक कार्रवाई सीमित न रहे, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में पाई जाने वाली कमियों का वास्तविक निराकरण भी किया जाए।
कलेक्टर-एसपी ने खुद पहुंचकर देखी व्यवस्था
घटना के बाद शुक्रवार को कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक का आश्रम पहुंचना प्रशासन की गंभीरता को दर्शाता है, अधिकारियों ने केवल कागजी जानकारी लेने के बजाय मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया, आश्रम में बच्चों से बातचीत के दौरान उनकी दिनचर्या, सुरक्षा व्यवस्था, नियमित उपस्थिति, स्वास्थ्य परीक्षण सहित अन्य व्यवस्थाओं के संबंध में जानकारी ली गई। अधिकारियों ने यह समझने का प्रयास किया कि आश्रम में बच्चों की निगरानी किस तरह की जाती है और किसी बच्चे के अनुपस्थित होने पर तत्काल सूचना देने की प्रक्रिया क्या है, इसके बाद कलेक्टर और एसपी घटनास्थल पहुंचे और वहां की परिस्थितियों का भी निरीक्षण किया।
बच्चों की सुरक्षा में लापरवाही बर्दाश्त नहीं
कलेक्टर श्रीमती रोक्तिमा यादव ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि आश्रम और छात्रावासों में रहने वाले बच्चों की सुरक्षा तथा निगरानी व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए, उन्होंने कहा कि बच्चों की जिम्मेदारी संभालने वाले संस्थानों में प्रशासनिक लापरवाही के लिए कोई स्थान नहीं है, प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा, उपस्थिति और स्वास्थ्य की सतत निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए, कलेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में इस तरह की लापरवाही सामने आने पर संबंधित अधिकारी-कर्मचारी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
पुलिस जांच भी अहम
छात्र की मौत के मामले में पुलिस द्वारा भी आवश्यक कार्रवाई की जा रही है,पुलिस घटना से जुड़े तथ्यों और परिस्थितियों की जांच कर रही है, डबरी से शव बरामद होने के बाद घटना के कारणों और परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच का महत्व और बढ़ जाता है,मौत किन परिस्थितियों में हुई और घटनाक्रम की वास्तविक कड़ी क्या थी,इसका अंतिम निष्कर्ष पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगा,इसलिए फिलहाल किसी संभावित कारण या किसी व्यक्ति की भूमिका को अंतिम रूप से जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
शोकाकुल परिवार के साथ प्रशासन
कलेक्टर रोक्तिमा यादव और एसपी श्री हरीश राठौर ने घटना पर गहरा दुःख व्यक्त किया है, अधिकारियों ने कहा कि एक बच्चे की इस तरह मौत अत्यंत दुखद है और जिला प्रशासन शोकाकुल परिवार के साथ है,प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि पूरे प्रकरण की गंभीरता से जांच की जाएगी और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
अब सवाल सिर्फ निलंबन का नहीं,जवाबदेही का है…
मझारटोला आश्रम में हुई घटना के बाद अधीक्षक का निलंबन प्रशासन की पहली बड़ी कार्रवाई है,लेकिन पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए अब सबसे ज्यादा नजर एसडीएम सोनहत की जांच रिपोर्ट पर रहेगी,क्योंकि इस घटना में कई सवालों के जवाब जरूरी हैं-बच्चा आश्रम से कब निकला, उसकी अनुपस्थिति का पता कब चला,उसकी तलाश कब शुरू हुई, उच्चाधिकारियों को सूचना कब दी गई और घटना के बीच कितना समय बीता? इन सवालों का जवाब ही यह तय करेगा कि प्रशासनिक स्तर पर वास्तविक चूक कहां हुई, एक मासूम की मौत के बाद कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित न रहे,बल्कि जांच से सामने आने वाली हर जिम्मेदारी तय हो और जिले के अन्य आश्रमों में ऐसी घटना दोबारा न हो, यही इस पूरे मामले की सबसे बड़ी अपेक्षा है।
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