
सांसद ज्योत्स्ना महंत ने अपने हाथों से बाटा भंडारे का प्रसाद…
राजन पाण्डेय
कोरिया/सोनहत,19 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। हसदेव नदी के पावन उद्गम स्थल मेण्ड्रा स्थित प्रसिद्ध हसदेश्वर महादेव मंदिर में सोमवार को आस्था,भक्ति और जनविश्वास का अद्भुत संगम देखने को मिला। पवित्र सावन माह के अवसर पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत एवं कोरबा सांसद श्रीमती ज्योत्स्ना महंत सूरज महंत पूर्व विधायक गुलाब कमरो के साथ मेण्ड्रा पहुंचे और भगवान हसदेश्वर महादेव की विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर जलाभिषेक किया। इस दौरान मंदिर परिसर ‘बम-बम भोले’,‘हर-हर महादेव’ और भगवान शिव के जयकारों से गुंजायमान रहा,महंत दंपत्ति ने भगवान भोलेनाथ के समक्ष प्रदेशवासियों,क्षेत्र के लोगों एवं किसानों के सुख-समृद्धि, खुशहाली और उत्तम स्वास्थ्य की कामना की, वैदिक मंत्रोच्चार के बीच संपन्न विशेष पूजा-अर्चना ने पूरे वातावरण को आध्यात्मिक बना दिया,मंदिर के पुजारी पंडित अनित दुबे एवं प्रेमसागर तिवारी ने विधिवत पूजा एवं धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया।
सांसद ज्योत्स्ना महंत ने स्वयं बांटा प्रसाद,श्रद्धालुओं से हुआ आत्मीय संवाद- पूजा-अर्चना के बाद सांसद ज्योत्स्ना महंत ने स्वयं श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया,इस दौरान उनका ग्रामीणों और बुजुर्ग श्रद्धालुओं के साथ आत्मीय संवाद भी हुआ, सांसद को अपने बीच पाकर ग्रामीणों में खासा उत्साह दिखाई दिया,प्रसाद वितरण के दौरान कई बुजुर्गों एवं महिलाओं ने सांसद से बातचीत की और अपनी भावनाएं साझा कीं। ज्योत्स्ना महंत ने भी सहजता और आत्मीयता के साथ लोगों से मुलाकात की,मंदिर परिसर का यह दृश्य धार्मिक आयोजन के साथ-साथ जनप्रतिनिधि और आमजन के बीच बने आत्मीय संबंधों का भी प्रतीक बना।
दिग्गज नेताओं और कांग्रेस कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी- कार्यक्रम में क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि,कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। प्रमुख रूप से पूर्व विधायक गुलाब कमरो, पूर्व विधायक अंबिका सिंह देव,जिला कांग्रेस अध्यक्ष (एमसीबी) अशोक श्रीवास्तव, राजकुमार केशरवानी,योगेश शुक्ला,लालमुनि यादव, ज्योत्स्ना राजवाड़े,अविनाश पाठक, प्रकाश चंद्र साहू,सुरेश सिंह,बाल करण सोनपाकर,कृष्ण कुमार राजवाड़े,संतोष यादव एवं राजबहादुर सहित बड़ी संख्या में पदाधिकारी,जनप्रतिनिधि एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
भक्ति,जनविश्वास और प्रकृति का अनूठा संगम
मेण्ड्रा में हसदेश्वर महादेव के दरबार में आयोजित यह धार्मिक आयोजन केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं रहा। हसदेव के उद्गम की पावन धरती पर उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, गूंजते शिव जयकारे,महंत दंपत्ति का ग्रामीणों से संवाद और प्रसाद वितरण ने पूरे आयोजन को जनआस्था एवं आत्मीयता से भर दिया, हसदेश्वर महादेव के मंदिर में दिनभर भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन कर सुख-समृद्धि की कामना करते नजर आए,हसदेव के उद्गम स्थल पर आस्था का यह दृश्य लंबे समय तक क्षेत्रवासियों के बीच चर्चा का विषय बना रहा।
हसदेव उद्गम की धरती पर उमड़ा आस्था का सैलाब
हसदेव नदी के उद्गम स्थल मेण्ड्रा का धार्मिक एवं प्राकृतिक महत्व लंबे समय से लोगों की आस्था का केंद्र रहा है,यहां स्थित हसदेश्वर महादेव मंदिर में सावन के दौरान दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से श्रद्धालु पहुंचते हैं,महंत दंपत्ति के आगमन की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण,श्रद्धालु,कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता भी मंदिर परिसर में जुटे, पूजा के दौरान श्रद्धालुओं ने भगवान शिव का जयघोष किया। पूरा मंदिर परिसर भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया,महंत दंपत्ति ने श्रद्धालुओं के साथ पूजा में सहभागिता की और भगवान शिव से क्षेत्र की उन्नति एवं जनकल्याण की प्रार्थना की।
ग्रामीणों से सीधा संवाद,समस्याओं पर हुई चर्चा
धार्मिक अनुष्ठान के पश्चात सांसद ज्योत्स्ना महंत ने क्षेत्र के ग्रामीणों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं। ग्रामीणों ने सड़क,बिजली,पानी,आवागमन,शिक्षा, स्वास्थ्य सहित क्षेत्र से जुड़ी विभिन्न आवश्यकताओं और मांगों से उन्हें अवगत कराया,महंत दंपत्ति ने ग्रामीणों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और संबंधित विषयों पर अधिकारियों से चर्चा कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। कई स्थानीय समस्याओं के निराकरण के लिए मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से संपर्क किया गया,जिससे ग्रामीणों में संतोष दिखाई दिया। सांसद महंत ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के साथ उठाना और उनके समाधान के लिए हरसंभव प्रयास करना जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी है।
धार्मिक आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का भी संदेश
हसदेव नदी का उद्गम स्थल होने के कारण मेण्ड्रा का महत्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ पर्यावरणीय दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है,हसदेव अंचल की पहचान जल,जंगल और प्राकृतिक संपदा से जुड़ी हुई है,ऐसे में हसदेश्वर महादेव मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम ने क्षेत्र की प्राकृतिक एवं सांस्कृतिक विरासत की ओर भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया,श्रद्धालुओं ने हसदेव नदी के उद्गम स्थल की पवित्रता एवं प्राकृतिक स्वरूप को बनाए रखने का संकल्प लेने की आवश्यकता पर भी जोर दिया,लोगों का कहना था कि धार्मिक आस्था के इन प्रमुख केंद्रों के साथ-साथ जलस्रोतों और आसपास के प्राकृतिक क्षेत्र का संरक्षण भी सामूहिक जिम्मेदारी है।
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