तरगवां की चार खसरों की जमीन में नाम विलोपन और स्वामित्व को लेकर मामला,पूर्व में व्यवहार न्यायालय से लेकर हाईकोर्ट तक पहुंच चुका है विवाद
-संवाददाता-
बैकुंठपुर,19 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। ग्राम तरगवां, तहसील पटना क्षेत्र की भूमि के राजस्व अभिलेख में नाम दर्ज करने और विलोपित किए जाने को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद ने एक बार फिर नया मोड़ लिया है, बैकुंठपुर के अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) न्यायालय द्वारा संबंधित पक्षकारों एवं आम लोगों के लिए इश्तहार जारी कर मामले में आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है,दस्तावेज के अनुसार विवादित भूमि के स्वामित्व और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नाम को लेकर मामला व्यवहार न्यायालय से लेकर उच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है और अब राजस्व अभिलेखों में दुरुस्ती का प्रकरण तहसीलदार पटना के समक्ष विचाराधीन है, एसडीएम न्यायालय से जारी इश्तहार में ग्राम तरगवां,तहसील पटना,जिला कोरिया की भूमि से संबंधित मामले का उल्लेख किया गया है,दस्तावेज के अनुसार आवेदक ने दावा किया है कि ग्राम तरगवां स्थित भूमि के खसरा नंबर 143,484,499 तथा 510/2 राजस्व रिकॉर्ड में उसके स्वामित्व एवं आधिपत्य की भूमि के रूप में दर्ज रही है। इन जमीनों का कुल रकबा अलग-अलग खसरों के अनुसार 1.160,0.290,0.160 एवं 0.100 हेक्टेयर बताया गया है।
पूर्वजों की मृत्यु के बाद नाम दर्ज होने का दावा-इश्तहार में उल्लेखित दावे के अनुसार आवेदक का कहना है कि संबंधित भूमि उसके पूर्वजों के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज थी, पूर्वजों की मृत्यु के बाद उत्तराधिकार के आधार पर भूमि आवेदक के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हुई थी,बाद में हल्का पटवारी स्तर पर हुई कार्रवाई के कारण आवेदक का नाम राजस्व अभिलेख से विलोपित किए जाने का आरोप लगाया गया है,इसी नाम विलोपन और भूमि के स्वामित्व को लेकर विवाद न्यायिक प्रक्रिया तक पहुंचा,दस्तावेज में उल्लेख है कि आवेदक ने व्यवहार न्यायालय के समक्ष प्रकरण प्रस्तुत किया था,व्यवहार वाद क्रमांक 193/2019 में आवेदक और उसकी बहन रामबाई के संयुक्त स्वामित्व की घोषणा किए जाने का उल्लेख इश्तहार में किया गया है।
जिला न्यायालय से हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला-मामला यहीं समाप्त नहीं हुआ,दस्तावेज के अनुसार अतिरिक्त जिला न्यायाधीश,बैकुंठपुर,जिला कोरिया के समक्ष भी अपील प्रकरण प्रस्तुत हुआ,इसके बाद मामला उच्च न्यायालय तक पहुंचा,इश्तहार में अपील प्रकरण क्रमांक 197/2019 का उल्लेख करते हुए बताया गया है कि इसके निराकरण के बाद संबंधित पक्ष द्वारा उच्च न्यायालय बिलासपुर के समक्ष भी अपील प्रस्तुत की गई थी,दस्तावेज के अनुसार उच्च न्यायालय बिलासपुर में अपील प्रकरण क्रमांक 110/2019 में आवेदक की अपील निरस्त किए जाने का उल्लेख है,इसके बाद उच्च न्यायालय के आदेश के पश्चात आवेदक द्वारा माननीय सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष भी अपील प्रस्तुत किए जाने की जानकारी इश्तहार में दी गई है,जो वर्तमान में विचाराधीन बताई गई है।
अब राजस्व रिकॉर्ड में दुरुस्ती का मामला-इश्तहार में बताया गया है कि उक्त न्यायिक प्रकरणों के आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में दुरुस्ती से संबंधित मामला वर्तमान में तहसीलदार पटना के समक्ष विचाराधीन है, प्रकरण की सुनवाई के दौरान विवादित भूमि के रिकॉर्ड में आवेदक के नाम को विलोपित कर अन्य प्रविष्टि किए जाने को लेकर भी आपत्ति सामने आई है,आवेदक द्वारा संबंधित खसरा नंबरों की भूमि को अपने स्वामित्व एवं आधिपत्य की बताते हुए राजस्व अभिलेखों में उचित प्रविष्टि किए जाने की मांग की गई है,इस संबंध में एसडीएम न्यायालय द्वारा संबंधित पक्षकारों को सार्वजनिक रूप से सूचना देते हुए आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर दिया गया है।
आपत्ति के लिए दिया गया अवसर- जारी इश्तहार में संबंधित हितबद्ध व्यक्तियों से कहा गया है कि यदि उन्हें इस प्रकरण के संबंध में कोई आपत्ति हो तो वे निर्धारित तिथि के पूर्व स्वयं अथवा अपने अधिकृत प्रतिनिधि/अभिभाषक के माध्यम से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर सकते हैं, निर्धारित तिथि के बाद प्राप्त होने वाली आपत्तियों पर विचार नहीं किए जाने की बात भी इश्तहार में स्पष्ट की गई है,इस पूरे मामले ने एक बार फिर राजस्व रिकॉर्ड में नामांतरण, उत्तराधिकार और भूमि स्वामित्व से जुड़े मामलों में अभिलेखों की शुद्धता और राजस्व अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं, हालांकि,इश्तहार स्वयं अंतिम स्वामित्व का निर्णय नहीं है,बल्कि संबंधित पक्षों को अपना पक्ष और आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर देने की न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है,मामले में अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई और सक्षम न्यायालय/राजस्व अधिकारी के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur