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रायपुर@पहले नमूना सहायक बनिए,फिर खाद्य सुरक्षा अधिकारी—नौकरी का ‘शॉर्टकट’ या नियम का रास्ता?

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  • 13 नमूना सहायकों को बनाया खाद्य सुरक्षा अधिकारी, 30 पदों पर नई भर्ती ने खड़े किए बड़े सवाल
  • नमूना सहायक से खाद्य सुरक्षा अधिकारी तक ‘पदोन्नति एक्सप्रेस’, विभाग की नीति पर उठे सवाल
  • मई में नमूना सहायकों की भर्ती, अगस्त में 13 को खाद्य सुरक्षा अधिकारी की पदोन्नति—आखिर विभाग की दिशा क्या?
  • 13 पदोन्नतियां बनीं चर्चा का विषय, अर्चना तिवारी का नाम भी सूची में, डीपीसी के फैसले पर सवाल
  • 30 नए नमूना सहायक भर्ती होंगे, फिर 13 पुराने सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी क्यों बनाया गया?
  • खाद्य सुरक्षा विभाग में पदोन्नति का बड़ा खेल? 13 नमूना सहायकों को मिली अधिकारी की कुर्सी
  • नमूना सहायक बने खाद्य सुरक्षा अधिकारी, अर्चना तिवारी का नाम भी शामिल; अब नियमों की बारी
  • डीपीसी की अनुशंसा पर 13 पदोन्नतियां,लेकिन नियम और पात्रता अब भी सवालों के घेरे में…
  • भर्ती अलग,पदोन्नति अलग—खाद्य सुरक्षा विभाग में आखिर चल क्या रहा है?


-न्यूज डेस्क-

रायपुर,17 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ के खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग में पदोन्नति को लेकर उठ रहे सवाल अब एक नए आदेश के बाद और गंभीर हो गए हैं, कार्यालय नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन द्वारा 11 अगस्त 2026 को जारी आदेश में विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर 13 नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नत किया गया है। आदेश में स्पष्ट रूप से नमूना सहायक पद से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति और नई पदस्थापना का उल्लेख है,यही आदेश अब उस बहस को जन्म दे रहा है, जिस पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं की क्या खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे तकनीकी और वैधानिक पदों को मुख्य रूप से सीधी भर्ती के बजाय विभागीय पदोन्नति से भरने की दिशा में विभाग आगे बढ़ रहा है? मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसी वर्ष मई में जारी विभागीय विज्ञापन में 30 नमूना सहायकों की सीधी भर्ती के लिए पद निकाले गए हैं,उस विज्ञापन में नमूना सहायक पद के लिए विज्ञान संकाय से 12वीं उत्तीर्ण होना आवश्यक बताया गया है,यानी एक ओर विभाग नए नमूना सहायकों की भर्ती कर रहा है और दूसरी ओर पुराने नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद पर पदोन्नत कर रहा है,अब सवाल यह है कि विभाग की दीर्घकालिक मानव संसाधन नीति आखिर है क्या?
13 नमूना सहायक बने
खाद्य सुरक्षा अधिकारी

11 अगस्त 2026 के आदेश में कुल 13 कर्मचारियों को नमूना सहायक पद से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नत किए जाने का उल्लेख है, आदेश के अनुसार इन कर्मचारियों को पदोन्नति के बाद अलग-अलग जिलों में पदस्थ किया गया है,पदोन्नति के साथ वेतनमान में भी परिवर्तन दर्शाया गया है,सूची में सरगुजा से लेकर कोरिया, रायगढ़,सारंगढ़-बिलाईगढ़,मुंगेली,बालोद,कोंडागांव, सूरजपुर, दुर्ग, रायपुर, बेमेतरा, दंतेवाड़ा, राजनांदगांव, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, जांजगीर-चांपा, सक्ती, गरियाबंद और गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जैसे जिलों में पदस्थापना का उल्लेख है, सूची में सातवें क्रम पर डॉ. अर्चना तिवारी का नाम भी शामिल है,आदेश में उनकी वर्तमान स्थिति कार्यालय नियंत्रक, खाद्य एवं औषधि प्रशासन, अटल नगर, नवा रायपुर बताई गई है और यह भी दर्ज है कि वे राज्य खाद्य एवं औषधि परीक्षण प्रयोगशाला,कालीबाड़ी रायपुर में संलग्नीकरण के तहत कार्यरत थीं। पदोन्नति के बाद उन्हें गरियाबंद पदस्थ किया गया है,यही नाम पूर्व में उठाए गए सवालों के कारण अब चर्चा के केंद्र में है।
डीपीसी की भूमिका भी जांच के दायरे में…
11 अगस्त के आदेश में साफ लिखा है कि पदोन्नति विभागीय पदोन्नति समिति की अनुशंसा के आधार पर की गई है,यही वह बिंदु है जहां सबसे महत्वपूर्ण सवाल पैदा होता है, डीपीसी ने किन नियमों,भर्ती नियमों, सेवा शर्तों और तकनीकी पात्रताओं को आधार बनाया? क्या डीपीसी के समक्ष खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद की तकनीकी प्रकृति और आवश्यक योग्यता से संबंधित सभी प्रावधानों का परीक्षण हुआ? क्या पदोन्नति के लिए निर्धारित प्रतिशत, वरिष्ठता, अनुभव और शैक्षणिक योग्यता की अलग-अलग जांच की गई? क्या प्रत्येक कर्मचारी की पात्रता का स्वतंत्र परीक्षण हुआ? इन सवालों के जवाब विभाग को सार्वजनिक करने चाहिए ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पदोन्नति केवल प्रशासनिक प्रक्रिया थी या इसके पीछे विस्तृत वैधानिक परीक्षण भी हुआ।
आदेश में हाईकोर्ट के मामलों का भी उल्लेख
पदोन्नति आदेश में छत्तीसगढ़ शासन, सामान्य प्रशासन विभाग के 14 जून 2024 के निर्देशों तथा उच्च न्यायालय बिलासपुर में ङ्खक्क(क्कढ्ढरु) हृश. 91/2019 और ङ्खक्क(स्) हृश. 9778/2019 में 16 अप्रैल 2024 को पारित अंतिम निर्णय के अधीन रहने की बात भी लिखी गई है, साथ ही आदेश में कहा गया है कि पदोन्नत कर्मचारियों की वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी, यह उल्लेख अपने आप में बताता है कि पदोन्नति आदेश पूरी तरह निर्विवाद प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं है और न्यायिक निर्णयों तथा शासन के निर्देशों के संदर्भ में भी इसे देखा जाना है,इसलिए विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जिन न्यायिक आदेशों और शासन निर्देशों का उल्लेख किया गया है, उनका पदोन्नति प्रक्रिया पर वास्तविक प्रभाव क्या है।
मई में 30 नमूना सहायकों की भर्ती
अगस्त में 13 की पदोन्नति
विभागीय दस्तावेजों में एक और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आता है,नमूना सहायक के 30 पदों पर सीधी भर्ती के लिए जारी विज्ञापन में कुल 30 रिक्तियों का उल्लेख है,इसके अतिरिक्त औषधि परीक्षण प्रयोगशाला में लैब असिस्टेंट के एक तथा खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला में लैब असिस्टेंट के एक पद सहित अन्य पदों का भी उल्लेख विज्ञापन में है,नमूना सहायक के लिए 30 पद दर्शाए गए हैं,विज्ञापन में नमूना सहायक के लिए शैक्षणिक योग्यता के रूप में मान्यता प्राप्त मंडल से विज्ञान संकाय में हायर सेकेंडरी यानी 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण होना बताया गया है,यहां से सवाल उठता है कि यदि विभाग को नमूना सहायकों की आवश्यकता इतनी अधिक है कि 30 पदों पर सीधी भर्ती की जरूरत पड़ रही है,तो क्या उसी संवर्ग से खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पदों को भरना विभाग की स्थायी रणनीति है या यह केवल पदोन्नति की मौजूदा व्यवस्था का हिस्सा है?
क्या सीधी भर्ती की भूमिका कमजोर होगी?
खाद्य सुरक्षा अधिकारी का पद विभाग के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी पद है, ऐसे में युवाओं के बीच यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठ सकता है कि यदि भविष्य में बड़ी संख्या में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के पद विभागीय पदोन्नति से ही भरे जाते रहे तो सीधी भर्ती के अवसरों का क्या होगा? दूसरी तरफ विभाग के पास यह तर्क हो सकता है कि पदोन्नति सेवा नियमों में उपलब्ध प्रावधानों के तहत की गई है और विभागीय कर्मचारियों को उनके अनुभव एवं पात्रता के आधार पर आगे बढ़ाने की प्रक्रिया सरकारी सेवा व्यवस्था का सामान्य हिस्सा है, इसलिए असली सवाल यह नहीं कि पदोन्नति हुई क्यों, बल्कि यह है कि पदोन्नति का वैधानिक आधार क्या है, पात्रता कैसे तय हुई, डीपीसी ने किन नियमों को आधार बनाया और क्या पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से अपनाई गई?
30 नए नमूना सहायक क्यों?
विभाग के मई 2026 के विज्ञापन का एक और पहलू है,विज्ञापन में नमूना सहायक के 30 पदों पर सीधी भर्ती प्रस्तावित की गई है, चयन के लिए लिखित परीक्षा का प्रावधान भी दिया गया है और अंतिम मेरिट के आधार पर चयन की प्रक्रिया बताई गई है,अर्थात नमूना सहायक बनने के लिए नए अभ्यर्थियों को प्रतियोगी परीक्षा से गुजरना होगा,यहीं से युवाओं का सवाल उठ सकता है—एक अभ्यर्थी नमूना सहायक बनने के लिए प्रतियोगी परीक्षा देगा और दूसरा कर्मचारी उसी संवर्ग से विभागीय प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़कर खाद्य सुरक्षा अधिकारी बन सकता है तो दोनों प्रक्रियाओं के बीच योग्यता और अवसर का संतुलन कैसे तय किया गया है? यह सवाल भावनात्मक नहीं बल्कि प्रशासनिक और नीतिगत है।
क्या विभाग में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की सीधी भर्ती भी होगी?
सबसे बड़ा सवाल अब यही है कि क्या भविष्य में खाद्य सुरक्षा अधिकारी पदों के लिए भी सीधी भर्ती निकाली जाएगी? यदि हां, तो कितने पदों पर? यदि नहीं, तो क्या विभाग की आवश्यकता पूरी तरह विभागीय पदोन्नति से पूरी की जाएगी? और यदि विभागीय पदोन्नति से ही बड़ी संख्या में पद भरे जाएंगे तो राज्य के उन युवाओं के लिए अवसर कहां होंगे जो खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद के लिए निर्धारित तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं? इन प्रश्नों का जवाब विभाग को देना चाहिए।
‘तानाशाही’ का आरोप नहीं,पारदर्शिता की मांग जरूरी
सोशल मीडिया और सार्वजनिक चर्चा में अब विभाग के कामकाज को लेकर ‘तानाशाही’ जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं। लेकिन दस्तावेजों के आधार पर पत्रकारिता का सवाल इससे अलग है, क्या निर्णय नियम से हुआ? क्या डीपीसी ने नियमों का परीक्षण किया? क्या सभी पात्रता शर्तों को समान रूप से लागू किया गया? क्या पदोन्नति का पूरा आधार सार्वजनिक किया जा सकता है? क्या विभागीय पदोन्नति के समानांतर खाद्य सुरक्षा अधिकारी के रिक्त पदों को भरने के लिए सीधी भर्ती का प्रस्ताव है? यदि विभाग इन सवालों के स्पष्ट दस्तावेजी जवाब देता है तो विवाद स्वतः समाप्त हो सकता है।
अर्चना तिवारी का नाम फिर चर्चा में…
इस पूरे मामले में डॉ. अर्चना तिवारी का नाम विशेष रूप से इसलिए चर्चा में है क्योंकि पूर्व में खाद्य प्रयोगशाला में उनके संलग्नीकरण को लेकर सवाल उठाए गए थे,अब 11 अगस्त के पदोन्नति आदेश में उनका नाम सातवें क्रम पर सामने आया है,आदेश में उनकी प्रयोगशाला में संलग्नीकरण की स्थिति भी दर्ज है और पदोन्नति के बाद गरियाबंद पदस्थापना दी गई है,इससे पहले इस विषय में जिन आशंकाओं और आरोपों को लेकर शिकायतें एवं खबरें सामने आई थीं, उनका अंतिम निष्कर्ष क्या है,यह अलग जांच का विषय है,लेकिन दस्तावेज यह जरूर दिखाता है कि जिनका नाम चर्चा में था,उनमें से डॉ. अर्चना तिवारी अब पदोन्नति सूची में शामिल हैं।
‘नमूना सहायक’ से तकनीकी पद तक पहुंचने की बहस
इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि नमूना सहायक संवर्ग से खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नति का नियम आखिर किस तरह लागू किया गया,यहां दो पक्ष हैं,पहला पक्ष कहता है कि यदि सेवा नियमों में पदोन्नति का रास्ता उपलब्ध है और कर्मचारी निर्धारित योग्यता एवं अनुभव पूरा करते हैं, तो विभागीय पदोन्नति पर सवाल नहीं उठना चाहिए, दूसरा पक्ष यह सवाल उठा रहा है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी तकनीकी एवं वैधानिक जिम्मेदारियों वाला पद है, इसलिए इसकी पात्रता को केवल विभागीय सेवा अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि संबंधित केंद्रीय कानून, नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के संदर्भ में भी परखा जाना चाहिए, यही वह बिंदु है जहां स्वतंत्र जांच आवश्यक हो जाती है।
सरकार और विभाग से सात सवाल इस पूरे मामले में राज्य सरकार और खाद्य एवं औषधि प्रशासन से अब सात प्रमुख सवाल हैं…
– पहलाः 13 नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी बनाने के लिए कौन से सेवा नियम लागू किए गए?
– दूसराः डीपीसी ने पात्रता निर्धारित करते समय किन केंद्रीय एवं राज्य नियमों का परीक्षण किया?
– तीसराः क्या प्रत्येक पदोन्नत कर्मचारी की शैक्षणिक योग्यता और आवश्यक अनुभव की स्वतंत्र जांच हुई?
– चौथाः खाद्य सुरक्षा अधिकारी के कितने पद वर्तमान में रिक्त हैं?
– पांचवांः क्या इन रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरने का कोई प्रस्ताव शासन को भेजा गया है?
– छठाः मई 2026 में 30 नमूना सहायकों की सीधी भर्ती का विज्ञापन जारी करने के बावजूद अगस्त में 13 नमूना सहायकों को खाद्य सुरक्षा अधिकारी पद पर पदोन्नत करने के पीछे विभाग की मानव संसाधन नीति क्या है?

– सातवांः क्या पूरी पदोन्नति प्रक्रिया की नोटशीट और डीपीसी की अनुशंसा सार्वजनिक की जा सकती है?
अब सामने आया विभागीय पदोन्नति का पूरा विवाद
इस पदोन्नति आदेश को केवल 11 अगस्त की एक प्रशासनिक कार्रवाई मानकर छोड़ देना पूरे विवाद की तस्वीर को अधूरा कर देगा, इस मामले की पृष्ठभूमि में खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पद की पात्रता,विभागीय पदोन्नति की व्यवस्था,नमूना सहायक संवर्ग की भूमिका,विभाग में लंबे समय से रिक्त पद,सीधी भर्ती की स्थिति,डीपीसी की भूमिका और स्थापना शाखा में लिए गए निर्णयों को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं, उपलब्ध दस्तावेज और पूर्व में सामने रखे गए तथ्यों को साथ रखकर देखने पर यह मामला एक व्यापक प्रशासनिक जांच की मांग करता है, खबरों और शिकायतों में यह सवाल भी उठाया गया है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारी जैसे तकनीकी पद पर पदोन्नति के लिए क्या केवल विभागीय सेवा अनुभव पर्याप्त माना गया या संबंधित केंद्रीय खाद्य सुरक्षा कानून एवं उसके अधीन जारी नियमों तथा राज्य के भर्ती नियमों का भी समान रूप से परीक्षण किया गया, आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट होना चाहिए कि 13 कर्मचारियों की पात्रता किस नियम, किस पदोन्नति कोटे और किस सेवा अवधि के आधार पर तय हुई।
भाग-1 के बाद भाग-2 में पढि़ए- 13 नमूना सहायकों की पदोन्नति का असली नियम क्या है?
डीपीसी ने किस आधार पर मुहर लगाई,केंद्रीय खाद्य सुरक्षा कानून और राज्य के भर्ती नियमों में क्या अंतर है,अर्चना तिवारी का नाम सूची में कैसे आया,नितेश कुमार मिश्रा की भूमिका को लेकर क्या सवाल हैं, नियंत्रक शर्मा और दीपक अग्रवाल से जुड़े आरोपों का सच क्या है,तथा 30 नए नमूना सहायकों की भर्ती के बीच खाद्य सुरक्षा अधिकारी के पदों पर सीधी भर्ती क्यों नहीं—इन सभी सवालों की पड़ताल जारी।


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