सीतापुर में दिनदहाड़े ज्वेलर्स का बैग उड़ाने वाले गिरोह की तलाश तेज,चार संदिग्धों की तस्वीर आई सामने…

-संवाददाता-
सीतापुर,17 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। सीतापुर में ज्वेलर्स से दिनदहाड़े करीब एक करोड़ रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण से भरा बैग उठाने के मामले में पुलिस ने बड़ी सफलता का दावा किया है। घटना के बाद छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड और ओडिशा तक करीब 500 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगालने, तकनीकी विश्लेषण और दूसरे राज्यों की पुलिस से समन्वय के बाद पुलिस संदिग्धों तक पहुंची। ओडिशा के गंजाम जिले में एक संदिग्ध के घर की तलाशी से करीब 46 लाख रुपये कीमत के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। हालांकि,मामले में अभी कई सवाल अनसुलझे हैं। पुलिस के अनुसार घटना में चार संदिग्ध दो मोटरसाइकिलों पर सवार थे,लेकिन अब तक दो संदिग्धों की पहचान बताई गई है। वहीं पुलिस ने जिन दो नामों का उल्लेख किया है, उनमें से मुख्य संदिग्ध चांटी दास को अभी गिरफ्तार नहीं किया जा सका है। चोरी गई संपत्ति में से करीब 46 लाख रुपये की बरामदगी हुई है, जबकि शेष लगभग 54 लाख रुपये के आभूषणों का पता लगाया जाना बाकी है। इसलिए पुलिस की कार्रवाई को महत्वपूर्ण सफलता तो माना जा सकता है,लेकिन पूरे मामले का अंतिम खुलासा और पूरी बरामदगी अभी बाकी है।
दुकान खोलने पहुंचा था ज्वेलर्स,
स्कूटी से बैग लेकर भागे बदमाश
पुलिस के मुताबिक 26 जुलाई 2026 की सुबह करीब 11ः30 बजे अरुणदेव सोनी अपनी स्कूटी से ज्वेलरी का बैग लेकर हाईस्कूल सीतापुर के पास स्थित अपनी काशी विश्वनाथ ज्वेलर्स दुकान पहुंचे थे। उन्होंने स्कूटी में बैग रखा और दुकान का शटर खोलने लगे। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति स्कूटी के सामने रखा बैग लेकर फरार हो गया। बैग में सोने और चांदी के आभूषण बताए गए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब एक करोड़ रुपये आंकी गई। शिकायत पर थाना सीतापुर में अपराध क्रमांक 296/2026 के तहत बीएनएस की धारा 303(2) में मामला दर्ज किया गया। धारा 303(2) बीएनएस चोरी के अपराध के लिए अधिकतम तीन वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों का प्रावधान करती है।
घटना के बाद भागने का रूट बना पुलिस की सबसे बड़ी कड़ी : मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर साइबर सेल अंबिकापुर और थाना सीतापुर की संयुक्त टीम बनाई गई। घटनास्थल और आसपास के सीसीटीवी फुटेज जुटाए गए। पुलिस के अनुसार फुटेज में दो मोटरसाइकिलों पर चार संदिग्ध दिखाई दिए। इसके बाद पुलिस ने संदिग्धों के भागने के संभावित रूट को सीसीटीवी के जरिए फॉलो किया। जांच का दायरा सरगुजा के गेरसा से होते हुए जशपुर जिले के कांसाबेल, कुनकुरी और सिंगीबहार तक पहुंचा। इसके बाद झारखंड के कुरडेग, खैरनटोली और सिमडेगा तथा ओडिशा के सुंदरगढ़ सहित दूसरे संभावित इलाकों के फुटेज भी खंगाले गए। पुलिस का दावा है कि करीब 500 सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन और तकनीकी विश्लेषण से संदिग्धों की पहचान की दिशा में महत्वपूर्ण सुराग मिले।
बड़ा सवाल—बाकी 54 लाख के जेवर कहां? पुलिस के अनुसार चोरी की कुल संपत्ति करीब एक करोड़ रुपये की थी और अब तक करीब 46 लाख रुपये कीमत के आभूषण बरामद हुए हैं। यानी घोषित अनुमान के हिसाब से लगभग 46 प्रतिशत संपत्ति ही बरामद हो पाई है। बाकी करीब 54 लाख रुपये के सोने-चांदी के आभूषणों का पता लगाना पुलिस के लिए अगली बड़ी चुनौती होगी। यदि यह रकम वास्तविक चोरी गई संपत्ति के मूल्य के अनुरूप है, तो जांच को केवल दो संदिग्धों तक सीमित न रखकर पूरे नेटवर्क, संभावित खरीदारों और चोरी के माल को खपाने वाले लोगों तक ले जाना जरूरी होगा।
अंतरराज्यीय गिरोह की आशंका की दिशा में भी जांच जरूरी : जिस तरह चोरी के बाद संदिग्धों का रूट सरगुजा से जशपुर, झारखंड और फिर ओडिशा तक जाता दिखाई दिया, उससे पुलिस की जांच में अंतरराज्यीय नेटवर्क की संभावना भी महत्वपूर्ण हो जाती है। हालांकि, पुलिस की ओर से अभी आधिकारिक तौर पर पूरे गिरोह के अंतरराज्यीय होने की पुष्टि नहीं की गई है। ऐसे में दूसरे राज्यों में दर्ज समान प्रकृति के ज्वेलरी चोरी या उठाईगिरी के मामलों से संदिग्धों का आपराधिक रिकॉर्ड मिलान करना, इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिलों की जानकारी जुटाना, मोबाइल लोकेशन और आपसी संपर्कों की जांच करना तथा चोरी के आभूषणों को खपाने वाले नेटवर्क तक पहुंचना जांच की अगली अहम कड़ी हो सकती है।
संयुक्त टीम की भूमिका
मामले के खुलासे में साइबर सेल अंबिकापुर के प्रभारी सउनि अजीत मिश्रा, प्रधान आरक्षक भोजराज पासवान,विकास सिन्हा,आरक्षक अशोक यादव, अनुज जायसवाल, मनीष सिंह, अमन पुरी और राहुल केरकेट्टा की भूमिका बताई गई है। थाना सीतापुर से थाना प्रभारी उपनिरीक्षक अखिलेश सिंह, उपनिरीक्षक रघुनाथ भगत, प्रशिक्षु उपनिरीक्षक अनिल कुमार, प्रधान आरक्षक तीजराम पैंकरा, आरक्षक राकेश यादव और महेंद्र नाग तथा थाना मणिपुर से आरक्षक उमाशंकर साहू, कुशकुमार सोनी सहित पुलिसकर्मी जांच में शामिल रहे। ओडिशा पुलिस की ओर से एसडीओपी आश्का सौरव रंजन, थाना प्रभारी/निरीक्षक आश्का सुधीर कुमार, निरीक्षक दीप्ती रंजन बेहरा, प्रधान आरक्षक पंचानन तथा आरक्षक मनोज कुमार, बरुण कुमार और हेमंत कुमार सहित अन्य पुलिसकर्मियों के सहयोग को भी पुलिस ने सराहनीय बताया है।
अब असली परीक्षा
सीतापुर की इस वारदात में करीब 500 सीसीटीवी फुटेज खंगालकर अंतरराज्यीय सीमा पार संदिग्धों तक पहुंचना पुलिस की तकनीकी जांच क्षमता को जरूर दर्शाता है। 46 लाख रुपये के आभूषणों की बरामदगी भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। लेकिन एक करोड़ की चोरी में केवल 46 लाख की बरामदगी,मुख्य संदिग्धों की गिरफ्तारी का लंबित रहना और चार संदिग्धों में से केवल दो की पहचान सामने आना बताता है कि जांच अभी अपने अंतिम पड़ाव पर नहीं पहुंची है।
अब पुलिस के सामने
तीन प्रमुख लक्ष्य है…
फरार संदिग्धों की गिरफ्तारी,शेष करीब 54 लाख रुपये की संपत्ति की बरामदगी और पूरे चोरी नेटवर्क का पर्दाफाश। इन तीनों कडि़यों के जुड़ने के बाद ही सीतापुर की इस बड़ी उठाईगिरी का पूर्ण खुलासा माना जा सकेगा।
सीसीटीवी से पहचान, ओडिशा के गंजाम तक पहुंची टीम
फुटेज में मिले हुलिए और अन्य तकनीकी सुरागों के आधार पर पुलिस ने अलग-अलग राज्यों की पुलिस से संपर्क किया। पुलिस के अनुसार संदिग्धों की पहचान ओडिशा के गंजाम जिले के सोर्डा निवासी चांटी दास और नारायणपुर थाना कोटिनाडा निवासी नागेश्वर राव के रूप में हुई। इसके बाद साइबर सेल और थाना सीतापुर की टीम को ओडिशा भेजा गया। पुलिस के मुताबिक स्थानीय पुलिस के सहयोग से करीब 10 दिनों तक संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश और सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
16 अगस्त की रात घर पहुंचा संदिग्ध, पुलिस पहुंची तो मिला ताला
जांच के दौरान स्थानीय पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि संदिग्ध चांटी दास 16 अगस्त की रात अपने घर पहुंचा था। सूचना पर सरगुजा पुलिस और ओडिशा पुलिस की संयुक्त टीम उसके घर पहुंची, लेकिन वहां ताला लगा मिला। पुलिस ने मुखबिर की सूचना के आधार पर नियमानुसार घर की तलाशी ली। चांटी दास मौके पर नहीं मिला, लेकिन पुलिस के अनुसार उसके घर से सीतापुर की घटना में चोरी किए गए आभूषण बरामद हुए।
300.92 ग्राम सोना और 1.168 किलो चांदी बरामद
पुलिस के मुताबिक तलाशी के दौरान 300.92 ग्राम सोने के आभूषण, जिनकी अनुमानित कीमत करीब 43 लाख रुपये, तथा 1 किलो 168 ग्राम चांदी के आभूषण, जिनकी कीमत करीब 3 लाख रुपये बताई गई है, बरामद किए गए। इस तरह कुल करीब 46 लाख रुपये की संपत्ति की बरामदगी का दावा किया गया है। यह बरामदगी मामले में महत्वपूर्ण कड़ी है, लेकिन पुलिस के सामने अब भी लगभग 54 लाख रुपये की बताई गई शेष संपत्ति की बरामदगी बड़ी चुनौती है। साथ ही यह भी स्पष्ट होना बाकी है कि बरामद आभूषणों की पहचान किस प्रक्रिया से पीडि़त व्यापारी की चोरी गई संपत्ति के रूप में सुनिश्चित की गई है।
‘खुलासा’ हुआ, लेकिन गिरफ्तारी और पूरी बरामदगी अभी बाकी
पुलिस ने कार्रवाई को मामले का खुलासा बताया है, लेकिन उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक चांटी दास और नागेश्वर राव की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस स्वयं कह रही है कि दोनों के साथ-साथ मामले में शामिल अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। इस लिहाज से इसे ‘मामले में महत्वपूर्ण सुराग और आंशिक बरामदगी’ कहना अधिक सटीक होगा। चार संदिग्धों के सीसीटीवी में सामने आने के बावजूद अभी केवल दो की पहचान बताई गई है। यह भी जांच का विषय है कि घटना की योजना किसने बनाई, स्थानीय स्तर पर रेकी किसने की, चोरी के बाद आभूषण कहां-कहां ले जाए गए और संभावित खरीदार अथवा रिसीवर कौन हैं।
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