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खड़गवां@ आधीवार में फिर पकड़ी गई कच्ची महुआ शराब

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एक माह में दूसरी बड़ी कार्रवाई,20 लीटर अवैध महुआ शराब बरामद,आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर उठे सवाल
-संवाददाता-
खड़गवां,14 अगस्त 2026 (घटती-घटना)।
खड़गवां मुख्यालय के आधीवार क्षेत्र में अवैध कच्ची महुआ शराब के कारोबार के खिलाफ आबकारी विभाग ने एक बार फिर कार्रवाई करते हुए करीब 20 लीटर महुआ शराब बरामद की है, खास बात यह है कि एक महीने के भीतर इसी क्षेत्र में अवैध महुआ शराब पकड़े जाने का यह दूसरा मामला सामने आया है,लगातार दूसरी कार्रवाई के बाद अब क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। एक ही इलाके में कम समय के अंतराल में दूसरी बार शराब बरामद होने से सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नियमित निगरानी के बावजूद अवैध शराब का निर्माण और बिक्री कैसे जारी रही, क्या विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी या फिर अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई केवल सूचना अथवा शिकायत मिलने के बाद ही की जा रही है? इन सवालों का जवाब आबकारी विभाग की कार्रवाई और आगे की जांच से ही सामने आएगा।
एक महीने में दूसरी बार बरामदगी- आधीवार क्षेत्र में पहले भी अवैध महुआ शराब के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, इसके बावजूद करीब एक महीने के भीतर फिर से 20 लीटर कच्ची महुआ शराब की बरामदगी ने पहली कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, यदि पहली कार्रवाई के बाद क्षेत्र में नियमित निगरानी और गश्त की गई थी तो दोबारा अवैध शराब का कारोबार शुरू होने की स्थिति कैसे बनी, यह भी जांच का विषय है, वहीं यह भी पता लगाया जाना जरूरी है कि बरामद शराब केवल किसी एक व्यक्ति तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है।
कार्रवाई के बाद भी नहीं थमा कारोबार-लगातार दूसरी बार शराब पकड़े जाने के बाद स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठ रहा है कि क्या पहली कार्रवाई का अवैध कारोबारियों पर अपेक्षित असर नहीं हुआ, केवल शराब बरामद कर प्रकरण दर्ज करना पर्याप्त है या विभाग को इसके निर्माण और बिक्री के स्रोत तक पहुंचने की भी जरूरत है, यह अब चर्चा का विषय बन गया है, विभाग को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि पहली कार्रवाई के बाद आधीवार क्षेत्र में कितनी बार आबकारी टीम ने गश्त या निरीक्षण किया। कितने संदिग्ध ठिकानों की जांच की गई और अवैध शराब के निर्माण एवं बिक्री को रोकने के लिए क्या स्थायी कदम उठाए गए।
निगरानी व्यवस्था पर सवाल-एक ही क्षेत्र में एक माह के भीतर दूसरी बार अवैध शराब मिलने से आबकारी विभाग की नियमित निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है,यदि क्षेत्र में लगातार निगरानी की जा रही थी तो अवैध शराब का निर्माण और बिक्री विभाग की नजर से कैसे बची रही? साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि विभाग इस कार्रवाई के बाद शराब के स्रोत, निर्माण स्थल और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच करता है या नहीं, अब सवाल यह भी है कि क्या क्षेत्र में अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें पहले भी विभाग को मिलती रही हैं और यदि शिकायतें मिली थीं तो उन पर क्या कार्रवाई की गई।
बरामदगी से आगे नेटवर्क तक पहुंचना जरूरी-20 लीटर कच्ची महुआ शराब की बरामदगी निश्चित रूप से आबकारी विभाग की कार्रवाई है, लेकिन असली चुनौती अवैध शराब के स्रोत और पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की होगी, यदि एक ही क्षेत्र में बार-बार अवैध शराब मिल रही है तो केवल बरामदगी और प्रकरण दर्ज करने के बजाय यह पता लगाना भी जरूरी है कि शराब कहां तैयार हो रही थी, इसे कहां पहुंचाया जाना था और इसके कारोबार से कौन-कौन लोग जुड़े हैं, आधीवार में एक महीने के भीतर दूसरी बार हुई कार्रवाई ने आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है, अब देखना होगा कि विभाग इस कार्रवाई को केवल एक और प्रकरण के रूप में दर्ज करता है या अवैध महुआ शराब के कारोबार की जड़ तक पहुंचकर स्थायी कार्रवाई करता है।


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