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राजपुर@विश्व आदिवासी दिवस पर सरकार की चुप्पी को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर साधा निशाना

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पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम बोले…32 प्रतिशत आदिवासी आबादी वाले प्रदेश में आयोजन तक नहीं,यह समाज की अस्मिता की उपेक्षा


-संवाददाता-
राजपुर,11 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के आह्वान पर विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर भाजपा सरकार की कथित उपेक्षा के विरोध में राजपुर कांग्रेस कार्यालय में जिलास्तरीय पत्रकारवार्ता आयोजित की गई। पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश सरकार और भाजपा पर आदिवासी समाज की उपेक्षा करने तथा उसकी सांस्कृतिक एवं स्वतंत्र पहचान को कमजोर करने का आरोप लगाया। पत्रकारवार्ता को संबोधित करते हुए लुंड्रा के पूर्व विधायक डॉ. प्रीतम राम ने कहा कि 9 अगस्त को जब दुनिया भर में विश्व आदिवासी दिवस उत्साह और गौरव के साथ मनाया जा रहा था,तब छत्तीसगढ़ में सत्तारूढ़ भाजपा की ओर से आदिवासी समाज के लिए अपेक्षित स्तर पर कोई सार्वजनिक आयोजन नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा के शीर्ष नेतृत्व से लेकर स्थानीय आदिवासी नेताओं तक की ओर से समाज को बधाई संदेश नहीं दिया गया। डॉ. प्रीतम राम ने कहा कि राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री भी आदिवासी समाज से आते हैं, ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर सरकार की ओर से कार्यक्रम नहीं होना और बधाई संदेश जारी नहीं किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है।
2023 से पहले भाजपा देती थी बधाई,सत्ता में आने के बाद बदला रवैया : पूर्व विधायक ने कहा कि वर्ष 2023 से पहले भाजपा के नेता विश्व आदिवासी दिवस पर आदिवासी समाज को बधाई संदेश देते रहे हैं। लेकिन इस बार कथित तौर पर सरकारी स्तर पर आयोजन नहीं किया गया और सार्वजनिक रूप से भी अपेक्षित उत्साह नहीं दिखा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह भाजपा की आदिवासी समाज के प्रति मानसिकता को दर्शाता है। डॉ. प्रीतम राम ने कहा कि आरएसएस के कथित विरोध के कारण भाजपा के आदिवासी मुख्यमंत्री भी अपने ही समाज के महत्वपूर्ण दिवस को लेकर खुलकर आयोजन नहीं कर पा रहे हैं। कांग्रेस नेता ने इसे आदिवासी समाज की संस्कृति,पहचान और स्वाभिमान से जोड़ते हुए कहा कि विश्व आदिवासी दिवस महज एक औपचारिक अवसर नहीं,बल्कि आदिवासी समाज की एकता,गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को दुनिया के सामने रखने का दिन है।
आदिवासी नहीं,वनवासी कहकर पहचान बदलने की कोशिशः डॉ. प्रीतम राम ने भाजपा और आरएसएस पर आदिवासी समाज की स्वतंत्र सांस्कृतिक पहचान का विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अपनी विशिष्ट संस्कृति, परंपराएं, जीवन पद्धति और ऐतिहासिक पहचान है। उन्होंने आरोप लगाया कि आदिवासियों को‘आदिवासी’कहने के बजाय ‘वनवासी’ संबोधन देने की कोशिश उनकी मौलिक पहचान को कमजोर करने की राजनीतिक विचारधारा का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि जिस छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज की आबादी करीब 32 प्रतिशत है और जिसकी सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है, वहां विश्व आदिवासी दिवस पर सरकारी स्तर पर आयोजन नहीं होना पूरे समाज के लिए चिंता का विषय है।
विश्व आदिवासी दिवस अधिकार और स्वाभिमान का प्रतीक : कांग्रेस नेता ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल कैलेंडर की एक तारीख नहीं है। यह आदिवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान,संस्कृति और अपनी पहचान के लिए संघर्ष का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज को किसी की दया या राजनीतिक संरक्षण की आवश्यकता नहीं है। वह अपने अधिकारों और संवैधानिक संरक्षण के प्रति जागरूक है।
आदिवासी समाज के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। डॉ. प्रीतम राम ने कहा कि भाजपा और आरएसएस भले ही विश्व आदिवासी दिवस को लेकर अलग दृष्टिकोण रखते हों,लेकिन आदिवासी समाज अपनी संस्कृति और पहचान के गौरव के साथ इस दिवस को मनाता रहा है और आगे भी मनाता रहेगा।
ये रहे मौजूद : पत्रकारवार्ता में कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र तिवारी, जिला प्रवक्ता सुनील सिंह,महामंत्री जितेंद्र गुप्ता,लाल साय मिंज,डॉ. बीएन द्विवेदी, नारद तिवारी,मनोज अग्रवाल,सुरेश सोनी, विकास अम्बष्ट,सत्येंद्र पांडे,बृजेश मिश्रा, अश्वनी यादव,अमित यादव,सुदामा राजवाड़े, देवनारायण मरावी,विजय सिंह, मनपतिया सिंह,आनंद मसीह तिर्की,जीत सिंह पोर्ते,लोकनाथ,सुनील भगत,डोमनिक एक्का,सुभाष तिर्की एवं एडवीन मिंज सहित अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन जिला प्रवक्ता सुनील सिंह ने किया।
‘समाज सब समझ रहा है,समय आने पर जवाब देगा’
पूर्व विधायक ने चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि प्रदेश का आदिवासी समाज अपनी कथित उपेक्षा और अस्मिता पर हो रहे हमले को समझ रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज शांत जरूर है,लेकिन अपने अधिकारों और पहचान को लेकर पूरी तरह सजग है और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से इसका जवाब देगा। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता किसी राजनीतिक दल की मोहताज नहीं है। समाज अपने इतिहास,संस्कृति और परंपराओं को लेकर गौरवान्वित है तथा जल-जंगल-जमीन के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रहेगा।
कांग्रेस नेताओं ने उठाए सवाल…
पत्रकारवार्ता में कांग्रेस नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि आदिवासी बहुल प्रदेश में विश्व आदिवासी दिवस पर शासकीय स्तर पर व्यापक आयोजन क्यों नहीं किया गया? आदिवासी समाज की इतनी बड़ी आबादी होने के बावजूद सरकार की ओर से इस अवसर पर अपेक्षित संदेश और कार्यक्रम क्यों नहीं हुए? कांग्रेस ने इन सवालों को लेकर भाजपा सरकार पर राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर निशाना साधा।


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