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अम्बिकापुर@ अंबिकापुर-अनूपपुर रेलखंड पर रोज 2-3 घंटे लेट हो रही ट्रेनें

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रेल संघर्ष समिति ने स्टेशन प्रबंधक को सौंपा ज्ञापन,डीआरएम से भी हुई बात,कहा…मरीज,विद्यार्थी और व्यापारियों की बढ़ रही परेशानी
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,11 अगस्त 202६ (घटती-घटना)।
अंबिकापुर-अनूपपुर रेलखंड पर यात्री ट्रेनों के लगातार विलंब से परिचालन को लेकर अब यात्रियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ट्रेनों के प्रतिदिन दो से तीन घंटे तक विलंब से चलने की शिकायत को लेकर सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने अंबिकापुर रेलवे स्टेशन के मुख्य स्टेशन प्रबंधक को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे,बिलासपुर के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा। समिति ने ट्रेनों का समयबद्ध परिचालन सुनिश्चित करने और लगातार हो रही देरी के कारणों का स्थायी समाधान करने की मांग की है। प्रतिनिधिमंडल ने इस संबंध में मंडल रेल प्रबंधक से दूरभाष पर भी चर्चा की। समिति के अनुसार डीआरएम ने समस्या के निराकरण के लिए सार्थक पहल का आश्वासन दिया है।
राजधानी जाने वाले यात्रियों की बढ़ी मुश्किल : जोनल रेलवे सलाहकार समिति के सदस्य मुकेश तिवारी ने कहा कि अंबिकापुर से चलने वाली कई ट्रेनें पिछले कुछ महीनों से नियमित रूप से विलंबित हो रही हैं। कई बार दो से तीन घंटे की देरी के कारण यात्रियों की पूरी यात्रा योजना प्रभावित हो जाती है। उन्होंने कहा कि अंबिकापुर-दुर्ग एक्सप्रेस (18241/ 18242) उत्तर छत्तीसगढ़ के लिए बेहद महत्वपूर्ण ट्रेन है। इस ट्रेन से प्रतिदिन गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीज,विद्यार्थी, व्यापारी और आम नागरिक राजधानी रायपुर सहित अन्य शहरों की ओर जाते हैं। ट्रेन के देर से पहुंचने के कारण कई यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए एक दिन अतिरिक्त रुकना पड़ता है। समिति का कहना है कि सुदूर आदिवासी अंचलों से राजधानी तक की यात्रा, जो सामान्य परिस्थितियों में करीब 10 घंटे में पूरी होनी चाहिए,ट्रेन के विलंब के कारण कई बार 13 से 14 घंटे तक खिंच जाती है। इसका सीधा असर गरीब और मध्यमवर्गीय यात्रियों की जेब पर पड़ता है।
पावर रिवर्सल में सुधार से 30-40 मिनट बच सकते हैं : मुकेश तिवारी ने रेलवे के समक्ष परिचालन व्यवस्था में सुधार के कुछ सुझाव भी रखे हैं। उनका कहना है कि अनूपपुर और शहडोल में अतिरिक्त पावर की व्यवस्था तथा पावर रिवर्सल प्रक्रिया में सुधार किया जाए तो ट्रेनों के डिटेंशन में करीब 30 से 40 मिनट तक की कमी लाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में रेलवे को तत्काल तकनीकी और परिचालन स्तर पर अध्ययन कर प्रभावी कदम उठाना चाहिए। यात्रियों के लिए कुछ मिनट की देरी भी महत्वपूर्ण होती है,लेकिन यहां समस्या घंटों के विलंब तक पहुंच गई है।
तीसरी लाइन के बाद भी समय-सारिणी में सुधार नहीं : रेल संघर्ष समिति ने बिलासपुर-अनूपपुर के बीच तीसरी रेल लाइन के निर्माण के बाद भी यात्री ट्रेनों के समय पालन में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर सवाल उठाया है। समिति का कहना है कि तीसरी लाइन बनने के बाद उम्मीद थी कि यात्री ट्रेनों के परिचालन में अधिक सुगमता आएगी और समय पालन बेहतर होगा। इसके बावजूद कोचिंग ट्रेनों के लगातार विलंबित होने से यात्रियों में निराशा है। समिति ने लॉन्ग हॉल मालगाडि़यों के परिचालन को भी यात्री ट्रेनों के विलंब का एक महत्वपूर्ण कारण बताते हुए कहा कि माल और यात्री ट्रेनों के संचालन के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
43.42 प्रतिशत पंक्चुअलिटी गंभीर चिंता का विषय : समिति ने रेलवे परिचालन की समयबद्धता को लेकर एक आंकड़े का हवाला देते हुए कहा कि बिलासपुर रेल मंडल की पंक्चुअलिटी 43.42 प्रतिशत बताई जा रही है और इसके आधार पर मंडल का स्थान 68वां बताया गया है। समिति ने कहा कि यदि यह आंकड़ा संबंधित अवधि और रेलवे के आधिकारिक पंक्चुअलिटी मानकों के अनुरूप है, तो यह यात्रियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। रेलवे देश की सबसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक परिवहन सेवाओं में से एक है और इसकी सबसे बड़ी अपेक्षा समयबद्धता है।
जवाबदेही तय करने की मांग : सरगुजा क्षेत्र रेल संघर्ष समिति ने रेलवे से मांग की है कि अंबिकापुर-अनूपपुर रेलखंड पर संचालित सभी यात्री ट्रेनों का समय पालन सुनिश्चित किया जाए। लगातार विलंब के वास्तविक कारणों की पहचान कर उनका स्थायी समाधान किया जाए। समिति ने यह भी मांग की कि यदि किसी अधिकारी या परिचालन व्यवस्था की लापरवाही के कारण ट्रेनें नियमित रूप से विलंबित हो रही हैं तो जिम्मेदारी तय कर संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध समुचित कार्रवाई की जाए। समिति का कहना है कि रेलवे केवल यात्री को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने का माध्यम नहीं, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, रोजगार, शिक्षा, चिकित्सा और व्यापार से जुड़ी आवश्यक सेवा है। इसलिए समयबद्ध परिचालन को प्राथमिकता देना जरूरी है।
डीआरएम ने दिया समाधान का भरोसा : प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य स्टेशन प्रबंधक के माध्यम से दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर के महाप्रबंधक के नाम ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही मंडल रेल प्रबंधक से दूरभाष पर चर्चा कर समस्या की गंभीरता से अवगत कराया गया। समिति के अनुसार डीआरएम ने मामले में आवश्यक पहल कर समाधान का भरोसा दिलाया है। अब यात्रियों और रेल संघर्ष समिति की नजर रेलवे की आगामी कार्रवाई पर है। समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि ट्रेनों के समय पालन में जल्द सुधार नहीं हुआ तो इस मुद्दे को आगे भी प्रमुखता से उठाया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान वरिष्ठ भाजपा नेता कैलाश मिश्रा,नकुल सोनकर,जितेंद्र सिंह और विनोद जायसवाल सहित समिति के प्रतिनिधि मौजूद रहे।
कनेक्टिंग ट्रेन छूटने से श्रद्धालु परेशान
समिति ने बताया कि केवल अंबिकापुर-दुर्ग एक्सप्रेस ही नहीं,बल्कि अंबिकापुर-शहडोल एक्सप्रेस और मेमू ट्रेनों के परिचालन में भी लगातार देरी की शिकायत सामने आ रही है। इसका सबसे ज्यादा असर उन यात्रियों पर पड़ता है,जिन्होंने आगे की यात्रा के लिए दूसरी ट्रेन का आरक्षण कराया होता है। सावन के महीने में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन और देश के अन्य ज्योतिर्लिंगों के दर्शन के लिए यात्रा करते हैं। समिति के अनुसार अंबिकापुर-अनूपपुर रेलखंड पर ट्रेनें देर से पहुंचने के कारण कई यात्रियों को कनेक्टिंग नर्मदा एक्सप्रेस सहित दूसरी ट्रेनों की सुविधा नहीं मिल पाती। इससे उनकी पूरी यात्रा योजना बिगड़ जाती है।
ऐप में ‘राइट टाइम’,जमीन पर ट्रेन लेट
रेल संघर्ष समिति ने रेलवे के डिजिटल सूचना तंत्र पर भी सवाल उठाया। समिति का आरोप है कि कई बार रेल वन सहित विभिन्न रेलवे ऐप में विलंबित ट्रेन को ‘राइट टाइम’ प्रदर्शित किया जाता है,जबकि वास्तविकता में ट्रेन काफी देर से चल रही होती है। समिति ने कहा कि यात्रियों को सही और वास्तविक समय की जानकारी मिलना उनका अधिकार है। रेलवे के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेन की स्थिति अपडेट करने में किसी भी तरह की लापरवाही या विसंगति पर प्रभावी रोक लगाई जानी चाहिए।


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