Breaking News

अम्बिकापुर@विश्व आदिवासी दिवस पर सरकारी आयोजन नहीं होने से गरमाई सियासत

Share

  • कांग्रेस का आरोप…आदिवासी बहुल छत्तीसगढ़ में सरकार ने दिवस की उपेक्षा की…न सार्वजनिक कार्यक्रम हुआ न बधाई संदेश
  • 15 आदिवासी बहुल जिलों में प्रेसवार्ता कर भाजपा सरकार पर साधा निशाना,कहा…आदिवासी समाज को वोट बैंक समझ रही भाजपा

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,11 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में शासकीय स्तर पर कोई बड़ा सार्वजनिक आयोजन नहीं होने को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर सोमवार को छत्तीसगढ़ के 15 आदिवासी बहुल जिलों में कांग्रेस ने एक साथ प्रेसवार्ता कर भाजपा सरकार पर आदिवासी समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि जिस छत्तीसगढ़ की आबादी में आदिवासी समाज की हिस्सेदारी करीब 32 प्रतिशत है, वहां 9 अगस्त जैसे महत्वपूर्ण दिवस पर सरकार की ओर से सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित नहीं किया जाना गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी इसे आदिवासी अस्मिता और संस्कृति की उपेक्षा बताते हुए सरकार पर निशाना साधा था। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं और देश की राष्ट्रपति भी आदिवासी समाज से हैं,इसके बावजूद विश्व आदिवासी दिवस पर सरकार की ओर से कोई विशेष सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हुआ। कांग्रेस ने यहां तक आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति की ओर से भी आदिवासी समाज के लिए बधाई संदेश जारी नहीं किया गया। कांग्रेस ने इसे आदिवासी समाज की भावनाओं की अनदेखी बताते हुए भाजपा पर सवाल खड़े किए।
आदिवासी समाज के समर्थन से बनी सरकार,फिर भी एक संदेश तक नहीं : कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक ने कहा कि भाजपा को यह नहीं भूलना चाहिए कि सरगुजा संभाग की 14 विधानसभा सीटों सहित बस्तर, कोरबा और अन्य आदिवासी क्षेत्रों से मिले समर्थन ने 2023 में भाजपा को सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका दी। उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले भाजपा विश्व आदिवासी दिवस पर बधाई और शुभकामनाएं देती रही,लेकिन सत्ता में आने के बाद उसी समाज के लिए सार्वजनिक आयोजन तक नहीं किया गया। पाठक ने कहा कि प्रदेश की करीब 32 प्रतिशत आबादी आदिवासी समाज की है। ऐसे में विश्व आदिवासी दिवस जैसे अवसर पर सरकार की ओर से कोई बड़ा सार्वजनिक आयोजन नहीं होना केवल प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि राजनीतिक और सामाजिक संदेश भी देता है। उन्होंने भाजपा द्वारा आदिवासी समाज के लिए ‘वनवासी’ शब्द के इस्तेमाल की भी आलोचना की और कहा कि आदिवासी समाज की अपनी ऐतिहासिक पहचान, संस्कृति, परंपरा और अधिकार हैं, जिन्हें किसी दूसरे संबोधन से प्रतिस्थापित नहीं किया जा सकता।
‘आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते उपेक्षा क्यों?’आदिवासी कांग्रेस के जिलाध्यक्ष अनिल पैकरा ने कहा कि प्रदेश में एक आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते विश्व आदिवासी दिवस की उपेक्षा होना गंभीर विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब संघ परिवार के दबाव का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज केवल राजनीतिक वोट बैंक नहीं है। उसकी अपनी संस्कृति, परंपरा, भाषा, जीवन पद्धति और जल-जंगल-जमीन से जुड़ा अधिकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश और प्रदेश में भाजपा की सरकारें आदिवासी समाज के आरक्षण से जुड़े हितों को भी कमजोर करने की दिशा में काम कर रही हैं।
कांग्रेस ने उठाए ये सवाल…
प्रेसवार्ता के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सरकार से सवाल किया कि—
– आदिवासी बहुल राज्य छत्तीसगढ़ में 9 अगस्त को शासकीय स्तर पर सार्वजनिक आयोजन क्यों नहीं किया गया?
– आदिवासी मुख्यमंत्री के रहते विश्व आदिवासी दिवस पर सरकारी स्तर पर कोई बड़ा कार्यक्रम क्यों नहीं हुआ?
– प्रदेश में आदिवासी समाज की बड़ी आबादी होने के बावजूद सरकार की ओर से औपचारिक बधाई संदेश तक क्यों नहीं दिया गया?
– आदिवासी समाज के मंत्री और विधायक इस कथित उपेक्षा पर मौन क्यों हैं?
– आदिवासी समाज की संस्कृति और पहचान को राजनीतिक आयोजनों तक सीमित क्यों किया जा रहा है?

पिछली सरकारों के आयोजनों
का भी कांग्रेस ने किया जिक्र

कांग्रेस नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ में विश्व आदिवासी दिवस को सार्वजनिक महत्व देने की परंपरा पहले से रही है। राज्य सरकार के एक पुराने आधिकारिक दस्तावेज में भी 9 अगस्त को आयोजित विश्व आदिवासी दिवस समारोह में सरकारी संस्थानों की सहभागिता का उल्लेख मिलता है। वहीं पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के दौरान विश्व आदिवासी दिवस पर सार्वजनिक अवकाश और आदिवासी संस्कृति से जुड़े आयोजनों को बढ़ावा देने का दावा सरकारी जनसंपर्क सामग्री में किया गया था। कांग्रेस का कहना है कि इसी पृष्ठभूमि में 2026 में सरकारी स्तर पर आयोजन नहीं होने का फैसला और अधिक सवाल खड़े करता है।
प्रेसवार्ता में ये रहे मौजूद : प्रेसवार्ता में मो. इस्लाम,इंद्रजीत सिंह धंजल, राशिद अहमद, लोकेश कुमार,जमील खान,आलोक सिंह, गुरुप्रीत सिद्धू,नरेंद्र विश्वकर्मा,दिनेश शर्मा, चंद्रप्रकाश सिंह,सोहन जायसवाल,रजनीश सिंह और अमित सिंह सहित कांग्रेस के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
सियासी संदेश साफ
आदिवासी सम्मान का मुद्दा बना राजनीतिक हथियार…

विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस के हमले ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में आदिवासी अस्मिता को फिर से केंद्र में ला दिया है। बस्तर से लेकर सरगुजा तक आदिवासी समाज प्रदेश की राजनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में 9 अगस्त को सरकारी आयोजन नहीं होने का मुद्दा अब केवल एक दिन के कार्यक्रम तक सीमित नहीं रह गया है। कांग्रेस इसे भाजपा की आदिवासी नीति और आदिवासी समाज के प्रति उसके दृष्टिकोण से जोड़ रही है। हालांकि, कांग्रेस के इन आरोपों पर भाजपा अथवा राज्य सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने आने पर ही तस्वीर का दूसरा पक्ष स्पष्ट होगा। फिलहाल विश्व आदिवासी दिवस को लेकर कांग्रेस ने सरकार के खिलाफ राजनीतिक मोर्चा खोल दिया है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा आदिवासी बहुल क्षेत्रों की राजनीति में और जोर पकड़ सकता है।
भाजपा हमें आदिवासी नहीं,वनवासी कहती है…
राजीव भवन में आयोजित प्रेसवार्ता को संबोधित करते हुए पूर्व मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि संघ परिवार और भाजपा आदिवासी समाज को आदिवासी के रूप में स्वीकार ही नहीं करते,बल्कि उन्हें ‘वनवासी’ कहकर संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद कांग्रेस की कल्याणकारी नीतियों के कारण आदिवासी समाज के लोग शिक्षा और विकास की मुख्यधारा से जुड़े हैं तथा देश के विकास में दूसरे समुदायों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर योगदान दे रहे हैं। डॉ. प्रेमसाय सिंह ने कहा कि वर्तमान सरकार में मुख्यमंत्री सहित बड़ी संख्या में आदिवासी मंत्री और विधायक हैं, लेकिन विश्व आदिवासी दिवस पर अपने ही समाज की कथित उपेक्षा के बावजूद वे चुप हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वे किस दबाव में हैं और उन्हें इस मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा आदिवासी समाज की महान विरासत और महापुरुषों को चौक-चौराहों पर मूर्तियों तक सीमित कर ‘टोकनिज्म’ की राजनीति कर रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि एक ओर आदिवासियों को ‘वनवासी’ कहा जाता है और दूसरी ओर उनके जल,जंगल,जमीन और प्राकृतिक संसाधनों पर लगातार दबाव बढ़ रहा है।
जल-जंगल-जमीन से लेकर पहचान तक का मुद्दा
कांग्रेस ने विश्व आदिवासी दिवस को केवल एक औपचारिक दिवस नहीं बल्कि आदिवासी समाज की पहचान,संस्कृति और अधिकारों से जोड़ते हुए सरकार पर हमला बोला। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आदिवासी समाज की अस्मिता जल,जंगल और जमीन से जुड़ी हुई है। ऐसे में आदिवासी दिवस पर सरकारी आयोजन नहीं होना उस समाज की सांस्कृतिक पहचान को सम्मान न देने के रूप में देखा जा रहा है। कांग्रेस ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर जैसे आदिवासी नायकों के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि आदिवासी समाज ने देश की आजादी और अपने अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष किए हैं। विश्व आदिवासी दिवस इन्हीं संघर्षों, संस्कृति और अधिकारों को याद करने का अवसर है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी 9 अगस्त को आदिवासी सभ्यता, संस्कृति और परंपराओं को सम्मान देने वाला दिवस बताते हुए जल-जंगल-जमीन के अधिकारों से समझौता नहीं करने की बात कही थी।


Share

Check Also

अम्बिकापुर@पैंथर क्लब की दोनों टीमें फाइनल में,खिताबी भिडंत आज

Share संत मदर टेरेसा गोल्ड कप फुटबॉल प्रतियोगिता में दोनों सेमीफाइनल पेनल्टी शूटआउट से हुए …

Leave a Reply