जगत बैद और अधिवक्ता दीपक बैद की अग्रिम जमानत पर फैसला सुरक्षित,21 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
न्यायालय ने कहा…एफआईआर दर्ज होने से पहले अभियोजन के पास उपलब्ध तथ्यों और जानकारी के साथ एसपी हों उपस्थित
-संवाददाता-
बिलासपुर/बैकुंठपुर 06 अगस्त 2026 (घटती-घटना)। बहुचर्चित आईसी मार्ट व नाबालिक छात्रा आत्महत्या प्रकरण में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कोरिया जिले के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को अगली सुनवाई में व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं, न्यायालय ने यह निर्देश पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर लगाए गए गंभीर आरोपों का संज्ञान लेने के बाद दिया है, यह आदेश न्यायमूर्ति नरेंद्र कुमार व्यास की एकलपीठ ने 5 अगस्त 2026 को पारित किया, न्यायालय के समक्ष आईसी मार्ट प्रकरण में आरोपी बनाए गए जगत बैद और अधिवक्ता दीपक बैद द्वारा दायर अग्रिम जमानत याचिकाओं पर सुनवाई हुई, सुनवाई के बाद न्यायालय ने तत्काल कोई निर्णय नहीं सुनाया और आदेश सुरक्षित रखते हुए मामले को 21 अगस्त 2026 के लिए सूचीबद्ध कर दिया।
एसपी को किया तलब-हाईकोर्ट ने आदेश दिया है कि कोरिया जिले के पुलिस अधीक्षक अगली सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों, न्यायालय ने उन्हें विकल्प दिया है कि वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हों,अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जुड़ें।
एफआईआर से पहले क्या थे तथ्य? कोर्ट ने मांगी जानकारी- हाईकोर्ट ने एसपी को निर्देश दिया है कि वे न्यायालय को यह जानकारी उपलब्ध कराएं कि एफआईआर दर्ज किए जाने से पहले अभियोजन के पास कौन-कौन से तथ्य और सामग्री उपलब्ध थी,आदेश में कहा गया है कि एसपी अभियोजन द्वारा एफआईआर दर्ज करने से पूर्व संकलित की गई जानकारी और तथ्यों के साथ न्यायालय के समक्ष उपस्थित हों, यह निर्देश इस दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि न्यायालय ने सीधे एफआईआर के पूर्व उपलब्ध तथ्यों के संबंध में जानकारी मांगी है।
दो अग्रिम जमानत याचिकाओं पर हुई संयुक्त सुनवाई…
हाईकोर्ट के आदेश पत्र के अनुसार CRA No.. 1795/2026 तथा CRA No. 1800/2026 पर एक साथ सुनवाई की गई,याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा,जबकि राज्य शासन की ओर से उप महाधिवक्ता न्यायालय में उपस्थित हुए।
पीडि़ता के पिता ने जताई जमानत पर आपत्ति
आदेश पत्र में उल्लेख है कि न्यायालय के पूर्व निर्देश के पालन में पीडि़ता के पिता जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के माध्यम से न्यायालय में उपस्थित हुए, उन्होंने आरोपियों को अग्रिम जमानत दिए जाने का विरोध करते हुए अपनी आपत्ति दर्ज कराई, न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पीडि़त पक्ष की आपत्ति को रिकॉर्ड पर लिया जा रहा है।
पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोपों का उल्लेख
सुनवाई के दौरान न्यायालय के समक्ष पुलिस प्रशासन के कार्य निष्पादन को लेकर गंभीर आरोप रखे गए, आदेश पत्र में न्यायालय ने स्पष्ट रूप से उल्लेख किया है कि- ÒSerious allegation against the functioning of the Police administration has been lodged’अर्थात न्यायालय के समक्ष पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली के संबंध में गंभीर आरोप लगाए गए हैं,यद्यपि आदेश पत्र में इन आरोपों का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है,लेकिन इन्हीं आरोपों के मद्देनज़र न्यायालय ने आगे का महत्वपूर्ण निर्देश जारी किया।
21 अगस्त को फिर होगी सुनवाई…
हाईकोर्ट ने मामले को 21 अगस्त 2026 के लिए सूचीबद्ध किया है, उस दिन— एसपी कोरिया न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे,न्यायालय के समक्ष मांगी गई जानकारी प्रस्तुत की जाएगी,साथ ही जगत बैद एवं अधिवक्ता दीपक बैद की अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी आदेश आने की संभावना है, हालांकि अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा उसी दिन पारित किया जाएगा या नहीं, यह न्यायालय की कार्यवाही पर निर्भर करेगा।
मामले की पृष्ठभूमि
आईसी मार्ट आत्महत्या प्रकरण में बैकुंठपुर सिटी कोतवाली में अपराध दर्ज होने के बाद आईसी मार्ट संचालक विनोद बैद, उनके बड़े भाई जगत बैद तथा अधिवक्ता दीपक बैद को आरोपी बनाया गया था, विनोद बैद की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि अन्य दोनों आरोपियों ने गिरफ्तारी से संरक्षण के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिकाएं दायर की हैं।
हाईकोर्ट के आदेश का महत्व
5 अगस्त को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने किसी भी पक्ष के आरोपों पर अंतिम टिप्पणी नहीं की है, न्यायालय ने केवल यह दर्ज किया है कि पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं और इन्हीं आरोपों के मद्देनज़र पुलिस अधीक्षक से एफआईआर दर्ज होने से पूर्व उपलब्ध तथ्यों और अभियोजन की जानकारी प्रस्तुत करने को कहा है,अब इस बहुचर्चित प्रकरण में 21 अगस्त 2026 की सुनवाई महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उसी दिन एसपी न्यायालय के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे और अग्रिम जमानत याचिकाओं पर भी आगे की न्यायिक कार्रवाई होने की संभावना है।
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