होली क्रॉस कॉन्वेंट स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम,विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को दिए तनाव,नशे और सोशल मीडिया से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,28 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। विद्यार्थियों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सकारात्मक सोच विकसित करने तथा उन्हें तनाव,नशे और सामाजिक कुरीतियों से दूर रहने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से होली क्रॉस कॉन्वेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल (अंग्रेजी माध्यम) में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा,चिकित्सा, पुलिस प्रशासन, समाजसेवा एवं आध्यात्मिक क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मानसिक रूप से सशक्त बनने,जीवन में अनुशासन अपनाने और सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का संदेश दिया। कार्यक्रम की संयोजक समाजसेवी श्रीमती शिल्पा पाण्डेय थीं। कार्यक्रम में पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) सरगुजा दीपक कुमार झा,नगर निगम सभापति हरमिन्दर सिंह टिन्नी, प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखा प्रमुख विद्या दीदी, बिशप राइट रेवरेन्ड एन्टनी बड़ा,वरिष्ठ समाजसेवी उमाकांत पाण्डेय,मनोचिकित्सक डॉ. इन्द्रप्रकाश तथा डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता सहित अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। विद्यालय परिवार एवं विद्यार्थियों ने अतिथियों का आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ वरिष्ठ शिक्षक सुनील तिवारी के स्वागत उद्बोधन से हुआ। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए केवल शैक्षणिक उपलब्धियां ही पर्याप्त नहीं हैं,बल्कि मानसिक रूप से स्वस्थ, आत्मविश्वासी और नैतिक मूल्यों से परिपूर्ण होना भी उतना ही आवश्यक है।
कार्यक्रम की संयोजक श्रीमती शिल्पा पाण्डेय ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज समाज में सामने आने वाली अनेक आपराधिक घटनाओं में किशोरों की संलिप्तता चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि बच्चों को केवल पढ़ाई में ही नहीं,बल्कि संस्कार, संवेदनशीलता और सामाजिक उत्तरदायित्व में भी आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे अपने व्यवहार, विचार और मित्रों के चयन में सजग रहें तथा समाज के लिए उपयोगी नागरिक बनने का संकल्प लें। समाजसेवी उमाकांत पाण्डेय ने बच्चों के अधिकारों और कर्तव्यों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि अधिकारों के साथ जिम्मेदारियों का निर्वहन भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने विद्यार्थियों को संविधान में प्रदत्त अधिकारों की जानकारी दी और उन्हें अनुशासित एवं जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा दी। मनोचिकित्सक डॉ. इन्द्रप्रकाश ने मानसिक स्वास्थ्य के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए बताया कि परीक्षा का दबाव,पारिवारिक अपेक्षाएं, प्रतिस्पर्धा और सोशल मीडिया का अत्यधिक उपयोग कई बार बच्चों में तनाव और अवसाद का कारण बन जाता है। उन्होंने विद्यार्थियों को क्रोध पर नियंत्रण रखने,अपनी भावनाओं को परिवार और शिक्षकों से साझा करने तथा आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की सलाह लेने की सीख दी। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है और इसकी अनदेखी नहीं की जानी चाहिए। डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता ने विद्यार्थियों को नशे के दुष्परिणामों से अवगत कराते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का नशा व्यक्ति के स्वास्थ्य,शिक्षा, परिवार और भविष्य को प्रभावित करता है। उन्होंने कहा कि नशे की लत रिश्तों में दूरी पैदा करती है और व्यक्ति को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से भी कमजोर बना देती है। उन्होंने विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने और दूसरों को भी इसके प्रति जागरूक करने का आह्वान किया। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय की शाखा प्रमुख विद्या दीदी ने आध्यात्मिक जीवन और सकारात्मक सोच के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मन की शांति और आत्मबल ही जीवन की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन अपनाने तथा अपने परिवार और समाज में भी इसके प्रति जागरूकता फैलाने का संकल्प दिलाया। बिशप राइट रेवरेन्ड एन्टनी बड़ा ने कहा कि इस संसार में कोई भी व्यक्ति पूर्ण नहीं है। हर व्यक्ति सीखते हुए आगे बढ़ता है। उन्होंने विद्यार्थियों से आत्मिक शांति, क्षमा, प्रेम और सेवा की भावना को जीवन में अपनाने का आग्रह करते हुए कहा कि यही मूल्य उन्हें सफलता और संतुलित जीवन की ओर ले जाएंगे। पुलिस महानिरीक्षक सरगुजा दीपक कुमार झा ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि अपराधों पर नियंत्रण केवल कठोर दंड से संभव नहीं है, बल्कि अपराध होने से पहले उसकी रोकथाम अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि अच्छी संगति, परिवार के साथ संवाद, अनुशासित जीवन और सोशल मीडिया का सकारात्मक उपयोग युवाओं को गलत रास्ते पर जाने से बचा सकता है। उन्होंने विद्यार्थियों से तकनीक का सदुपयोग करने और अपने चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। नगर निगम सभापति हरमिन्दर सिंह टिन्नी ने गुरु पूर्णिमा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गुरु और माता-पिता का सम्मान जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपने शिक्षकों का आदर करने, माता-पिता की आज्ञा का पालन करने और अनुशासित जीवनशैली अपनाने की अपील की। विद्यालय की प्राचार्य डॉ. सि. जेस्सी ने अपने संबोधन में कहा कि यदि इस कार्यशाला से मिली दो अच्छी बातें भी विद्यार्थी अपने घर जाकर अभिभावकों के साथ साझा करते हैं और उन्हें अपने जीवन में अपनाते हैं, तो कार्यक्रम का उद्देश्य सार्थक हो जाएगा। उन्होंने कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं,बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का भी महत्वपूर्ण माध्यम है। कार्यक्रम के अंत में विद्यालय संसद की छात्र उपाध्यक्ष शाम्भवी सिंह ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का प्रभावी संचालन शिक्षक अंजनी कुमार पाण्डेय ने किया। पूरे आयोजन के दौरान विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया तथा विशेषज्ञों द्वारा दिए गए सुझावों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
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