- संपादक का जवाब– सवालों से नहीं बचेंगे, हिंदी में नोटिस दीजिए… हर बिंदु का दस्तावेज़ी जवाब मिलेगा
- 50 लाख का नोटिस भेजा…अब हिंदी में भेजने की बारी!
- हिंदी में खबर… अंग्रेजी में नोटिस! संपादक ने उठाया सवाल– संवाद चाहिए या कानूनी दबाव?
- हिंदी में नोटिस प्राप्त होने के बाद ही दिया जाएगा बिंदुवार विस्तृत उत्तर, जनहित में प्रकाशित समाचार को दबाने का प्रयास स्वीकार नहीं
दैनिक घटती-घटना ने कहा सार्वजनिक दस्तावेजों,उपलब्ध अभिलेखों और जनहित के आधार पर प्रकाशित समाचारों पर कायम है अखबार

-रवि सिंह-
अंबिकापुर/रायपुर,08 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के दो अधिकारियों की ओर से दैनिक घटती-घटना के संपादक को भेजे गए 50 लाख रुपये के मानहानि संबंधी विधिक नोटिस के मामले में अखबार के संपादक ने अपना प्रारंभिक उत्तर भेज दिया है,इस उत्तर में सबसे पहले विधिक नोटिस की भाषा पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा गया है कि जिस समाचार को आधार बनाकर यह नोटिस भेजा गया,वह पूरी तरह हिंदी भाषा में प्रकाशित हुआ था,जबकि विधिक नोटिस संपूर्ण रूप से अंग्रेजी भाषा में भेजा गया है। संपादक ने स्पष्ट किया है कि दैनिक घटती-घटना एक पंजीकृत हिंदी दैनिक समाचार पत्र है,जिसके समस्त संपादकीय कार्य,प्रकाशन, संवाद एवं पत्राचार हिंदी भाषा में संचालित होते हैं, ऐसे में यदि वास्तव में उद्देश्य समाचार पत्र से तथ्यात्मक उत्तर प्राप्त करना था,तो विधिक नोटिस हिंदी भाषा में अथवा उसका अधिकृत हिंदी अनुवाद भी भेजा जाना चाहिए था,जिससे समाचार पत्र बिना किसी भाषाई बाधा के नोटिस का परीक्षण कर अपना विधिसम्मत उत्तर प्रस्तुत कर सके।
भाषा पर उठाया पहला प्रश्न
संपादक द्वारा भेजे गए प्रारंभिक उत्तर में कहा गया है कि किसी हिंदी समाचार पत्र को, जिसकी पूरी कार्यप्रणाली हिंदी में संचालित होती है,केवल अंग्रेजी भाषा में विधिक नोटिस भेजना स्वाभाविक संवाद की भावना के अनुरूप प्रतीत नहीं होता, उत्तर में कहा गया है कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि तथ्यात्मक संवाद स्थापित करने की अपेक्षा औपचारिक कानूनी दबाव बनाने का प्रयास अधिक किया गया है, हालांकि, संपादक ने यह भी स्पष्ट किया है कि समाचार पत्र किसी भी प्रकार के वैधानिक दायित्व से पीछे नहीं हट रहा है और नोटिस का विधिसम्मत उत्तर देने के लिए तैयार है।
नोटिस के आरोपों को स्वीकार नहीं किया- प्रारंभिक उत्तर में स्पष्ट किया गया है कि समाचार पत्र नोटिस में लगाए गए किसी भी आरोप को स्वीकार नहीं करता, साथ ही कहा गया है कि नोटिस में लगाए गए सभी आरोपों का बिंदुवार उत्तर उचित भाषा में नोटिस प्राप्त होने के बाद दिया जाएगा, संपादक ने यह भी स्पष्ट किया कि समाचार पत्र अपने सभी संवैधानिक, वैधानिक एवं विधिक अधिकार सुरक्षित रखते हुए आगे की कार्रवाई करेगा।
जनहित की पत्रकारिता जारी रहेगी- उत्तर में कहा गया है कि दैनिक घटती-घटना अपने स्थापना काल से ही जनहित, निष्पक्षता और तथ्यपरक पत्रकारिता के सिद्धांतों पर कार्य करता आया है। भविष्य में भी सरकारी नियुक्तियों, प्रशासनिक निर्णयों तथा सार्वजनिक महत्व के विषयों पर उपलब्ध दस्तावेजों और अभिलेखों के आधार पर समाचार प्रकाशित किए जाते रहेंगे, समाचार पत्र ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार का विधिक नोटिस या दबाव उसकी संपादकीय स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं करेगा तथा यदि किसी समाचार में कोई तथ्यात्मक आपत्ति होती है तो उसका परीक्षण निष्पक्ष रूप से किया जाएगा।
अब दस्तावेजों के आधार पर होगी आगे की पड़ताल- दैनिक घटती-घटना ने संकेत दिया है कि इस पूरे मामले में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत विभिन्न विभागों, विश्वविद्यालयों तथा संबंधित संस्थाओं से अभिलेख प्राप्त करने की प्रक्रिया प्रारंभ की जा रही है, विभाग सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत मागे गए दस्तावेज तत्काल उपलब्ध कराए, इन अभिलेखों के आधार पर आगे की खोजी रिपोर्टें प्रकाशित की जाएंगी, ताकि भर्ती, शैक्षणिक योग्यता सत्यापन, वरिष्ठता और पदोन्नति से जुड़े सभी तथ्य सार्वजनिक रूप से सामने आ सकें।
हिंदी नोटिस मिलने के बाद दिया जाएगा विस्तृत जवाब
प्रारंभिक उत्तर में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि जैसे ही विधिक नोटिस हिंदी भाषा में अथवा उसका अधिकृत हिंदी अनुवाद प्राप्त होगा,उसके प्रत्येक बिंदु का दस्तावेजों,विधिक प्रावधानों तथा उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर विस्तृत उत्तर प्रस्तुत किया जाएगा, संपादक ने कहा है कि वर्तमान उत्तर केवल भाषा संबंधी प्रारंभिक आपत्ति है तथा इसे नोटिस में लगाए गए आरोपों की स्वीकृति के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
समाचार सार्वजनिक महत्व के विषयों पर आधारित
उत्तर में यह भी उल्लेख किया गया है कि जिन समाचारों को आधार बनाकर मानहानि का नोटिस भेजा गया है, वे किसी व्यक्ति के निजी जीवन से संबंधित नहीं थे,प्रकाशित समाचारों का विषय सार्वजनिक नियुक्तियां,विभागीय पदोन्नति,वरिष्ठता सूची,शैक्षणिक योग्यता,भर्ती प्रक्रिया,विभागीय निर्णय और उन पर उठे सार्वजनिक प्रश्न थे,संपादक ने कहा है कि ऐसे विषय लोकतांत्रिक व्यवस्था में स्वाभाविक रूप से सार्वजनिक विमर्श का हिस्सा होते हैं और मीडिया का दायित्व उपलब्ध तथ्यों एवं अभिलेखों के आधार पर जनहित से जुड़े प्रश्नों को समाज के सामने रखना है।
संपादक के प्रारंभिक जवाब के प्रमुख बिंदु
– हिंदी समाचार पत्र को अंग्रेजी में विधिक नोटिस भेजे जाने पर आपत्ति।
– हिंदी भाषा में नोटिस अथवा अधिकृत अनुवाद मिलने के बाद विस्तृत उत्तर देने की घोषणा।
– नोटिस में लगाए गए किसी भी आरोप को स्वीकार नहीं किया।
– समाचारों को जनहित एवं सार्वजनिक महत्व के विषयों पर आधारित बताया।
– संपादकीय स्वतंत्रता एवं निष्पक्ष पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई।
– सूचना के अधिकार के माध्यम से दस्तावेज जुटाकर आगे भी तथ्य आधारित रिपोर्टिंग जारी रखने की बात कही।
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