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सूरजपुर@ 9 दिन का आंदोलन,6 माह का इंतजार…फिर भी अंधेरे में 17 गांव

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ठंड में मिला था बिजली का आश्वासन,गर्मी गुजर गई,अब बरसात भी शुरू…लेकिन आज भी नहीं पहुंची बिजली
महुली से नवडीहा तक लाइन विस्तार का था वादा,वनांचल के अन्य गांवों में सौर ऊर्जा व्यवस्था भी पूरी तरह ठप्प… 12 हजार से अधिक ग्रामीण परेशान
ओंकार पाण्डेय
सूरजपुर,03 जुलाई 2026 (घटती-घटना)।
सूरजपुर जिले के दूरस्थ वनांचल चांदनी-बिहरपुर क्षेत्र के 17 गांव आज भी बिजली की रोशनी का इंतजार कर रहे हैं, करीब छह माह पहले कड़ाके की ठंड में बिजली की मांग को लेकर बिहरपुर तहसील मैदान में नौ दिनों तक चले आंदोलन के बाद जिला प्रशासन ने जल्द विद्युत लाइन विस्तार और सौर ऊर्जा व्यवस्था बहाल करने का भरोसा दिया था,लेकिन ठंड बीत गई,भीषण गर्मी निकल गई और अब बरसात का मौसम भी शुरू हो चुका है,फिर भी न बिजली के खंभे लगे,न तार खिंचे और न ही बंद पड़ी सौर ऊर्जा व्यवस्था को चालू किया जा सका, ग्रामीणों का कहना है कि आंदोलन के दौरान प्रशासन ने महुली,कोल्हूआ,कछवारी, खैरा, चोगा,कछिया और नवडीहा तक विद्युत लाइन विस्तार कराने का आश्वासन दिया था, वहीं इन गांवों से आगे स्थित दुर्गम पहाड़ी और वन क्षेत्रों में क्रेडा के माध्यम से सौर ऊर्जा आधारित बिजली व्यवस्था विकसित करने की बात कही गई थी। लेकिन छह माह बीत जाने के बाद भी दोनों योजनाएं केवल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही हैं।
करीब 12 हजार ग्रामीण अब भी अंधेरे में-चांदनी-बिहरपुर क्षेत्र के इन 17 गांवों में लगभग 12 हजार से अधिक ग्रामीण निवास करते हैं, बिजली नहीं होने से बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, मरीजों को रात में इलाज कराने में दिक्कत होती है,मोबाइल चार्ज करना भी चुनौती बना हुआ है और घरेलू कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं,बरसात शुरू होने के बाद अंधेरे में जहरीले सांप-बिच्छू और जंगली जानवरों का खतरा बढ़ गया है,जिससे लोगों की चिंता और बढ़ गई है।
कड़ाके की ठंड में नौ दिन तक चला था आंदोलन-ग्रामीणों के अनुसार बिजली की मांग को लेकर सैकड़ों महिला-पुरुष,बुजुर्ग और युवा लगातार नौ दिनों तक बिहरपुर तहसील मैदान में धरने पर बैठे रहे, भीषण ठंड के बावजूद आंदोलन जारी रहा। इस दौरान कई आंदोलनकारियों की तबीयत बिगड़ी,वहीं कुछ ग्रामीणों ने विरोध स्वरूप मुंडन कराकर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया,आंदोलन के नौवें दिन प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर शीघ्र कार्य शुरू कराने का आश्वासन दिया,जिसके बाद आंदोलन समाप्त किया गया।
दो वर्षों से बंद पड़े हैं सोलर प्लांट- ग्रामीणों ने बताया कि क्षेत्र में क्रेडा द्वारा वर्षों पहले स्थापित दो दर्जन से अधिक सोलर पावर प्लांट, होम लाइट सिस्टम और इनवर्टर पिछले लगभग दो वर्षों से बंद पड़े हैं,अधिकांश बैटरियां खराब हो चुकी हैं, इनवर्टर जवाब दे चुके हैं और रखरखाव के अभाव में पूरी व्यवस्था निष्कि्रय हो गई है, कई गांवों में सोलर प्लांट केवल लोहे के ढांचे बनकर रह गए हैं,जबकि ग्रामीण मजबूरी में फिर लालटेन और अन्य पारंपरिक साधनों का सहारा ले रहे हैं।
’प्रक्रिया जारी है’ का जवाब, लेकिन काम शुरू नहीं-ग्रामीणों का आरोप है कि जब भी संबंधित अधिकारियों से जानकारी ली जाती है तो केवल ‘प्रक्रिया जारी है’ कहकर मामला टाल दिया जाता है, छह माह बाद भी न लाइन विस्तार का कार्य प्रारंभ हुआ और न ही सौर ऊर्जा व्यवस्था को पुनर्जीवित करने की दिशा में कोई ठोस पहल दिखाई दे रही है,इससे लोगों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।
बरसात में बढ़ी चिंता,फिर आंदोलन की चेतावनी- ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और राज्य शासन से मांग की है कि आंदोलन के दौरान किए गए वादे को तत्काल पूरा किया जाए, महुली, कोल्हूआ, कछवारी, खैरा,चोगा, कछिया और नवडीहा तक विद्युत लाइन विस्तार का कार्य बिना और विलंब के शुरू कराया जाए, साथ ही वनांचल के अन्य गांवों में नई सौर ऊर्जा व्यवस्था स्थापित कर वर्षों से बंद पड़े सोलर पावर प्लांट,होम लाइट और इनवर्टर की मरम्मत अथवा प्रतिस्थापन कराया जाए, ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र ही कार्य प्रारंभ नहीं किया गया तो वे एक बार फिर लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करने को विवश होंगे,उनका कहना है कि छह माह पहले मिला आश्वासन आज भी अधूरा है और 17 गांवों के हजारों लोग अब भी बिजली की रोशनी का इंतजार कर रहे हैं।


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