- सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की पहल,
- आलोक दुबे ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से की स्थापना की मांग
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,01 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने और वैश्विक पहचान दिलाने की मांग को लेकर वरिष्ठ भाजपा पार्षद एवं सरगुजा जिला पुरातत्व समिति के सदस्य आलोक दुबे ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को पत्र भेजकर सरगुजा में रामायण शोधपीठ एवं कालिदास शोध संस्थान की स्थापना का अनुरोध किया है। पत्र में आलोक दुबे ने कहा कि सरगुजा क्षेत्र भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ी पावन भूमि रही है। यहां मौजूद अनेक पुरातात्विक अवशेष इस क्षेत्र के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि संस्कृत साहित्य के महान कवि महाकवि कालिदास की अमर कृति ‘मेघदूत’ की प्रेरणा स्थली के रूप में भी सरगुजा का विशेष महत्व माना जाता है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि सरगुजा में रामायण शोधपीठ और कालिदास शोध संस्थान की स्थापना होने से न केवल प्राचीन संस्कृति, साहित्य और परंपराओं का संरक्षण होगा, बल्कि छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्र पर नई पहचान मिलेगी। आलोक दुबे ने अपने पत्र में तीन प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पहला, इन संस्थानों के माध्यम से सरगुजा की सांस्कृतिक विरासत, रामायणकालीन संदर्भों और कालिदास साहित्य से जुड़े तथ्यों का दस्तावेजीकरण किया जा सकेगा। दूसरा, इससे धार्मिक एवं साहित्यिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। तीसरा, यह संस्थान रामायण, संस्कृत साहित्य और आदिवासी संस्कृति पर शोध एवं अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों से संबद्ध पाठ्यक्रम, शोध कार्य, कार्यशालाएं और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों के आयोजन से युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री से आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि सरगुजा में इन संस्थानों की स्थापना छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक गरिमा को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला ऐतिहासिक कदम साबित होगा।
घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur घटती-घटना – Ghatati-Ghatna – Online Hindi News Ambikapur