- कोरिया जिले की कई पंचायतों में अपात्रों को आवास…पात्र गरीब अब भी बेघर
- एक ही परिवार के कई सदस्यों को लाभ, अविवाहित युवाओं तक के नाम सूची में होने के आरोप, सूची से नाम न काटने के बदले वसूली की चर्चाएं…
- विशेष पड़ताल : बैकुंठपुर जनपद पंचायत की ग्राम पंचायतों से उठे सवाल
बैकुंठपुर/कोरिया,01 जुलाई 2026 (घटती-घटना)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना था कि देश का कोई भी गरीब परिवार बिना पक्के घर के न रहे, इसी उद्देश्य से शुरू की गई प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) करोड़ों गरीब परिवारों के लिए सम्मानजनक जीवन का आधार बनी,लेकिन कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद पंचायत की कई ग्राम पंचायतों में इस योजना की दूसरी चरण की हितग्राही सूची ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ग्रामीणों के अनुसार सूची में बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के नाम शामिल हैं जो योजना की पात्रता पूरी नहीं करते,जबकि वास्तव में गरीब और कच्चे मकानों में रहने वाले अनेक परिवार सूची से बाहर हैं,आरोप केवल अपात्रों को लाभ दिलाने तक सीमित नहीं हैं,बल्कि सर्वे प्रक्रिया, ग्राम सभा, नाम जोड़ने और नाम न काटने के नाम पर कथित अवैध वसूली तक की चर्चाएं गांव-गांव में हो रही हैं,यदि इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होती है तो यह केवल पंचायत स्तर की अनियमितता नहीं,बल्कि पूरी चयन प्रक्रिया पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर सकती है।
प्रधानमंत्री की सबसे बड़ी गरीब कल्याण योजना पर आखिर किसकी नजर?– प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है, योजना में निर्माण की राशि सीधे हितग्राही के बैंक खाते में भेजी जाती है तथा मजदूरी का भुगतान मनरेगा के माध्यम से किया जाता है ताकि भ्रष्टाचार की संभावना कम हो, लेकिन बैकुंठपुर जनपद की कई पंचायतों से सामने आ रही शिकायतें इस व्यवस्था की पारदर्शिता पर प्रश्न उठा रही हैं, ग्रामीणों का कहना है कि योजना की भावना के विपरीत प्रभावशाली और आर्थिक रूप से सक्षम लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई है।
पात्र कौन,अपात्र कौन…नियम कुछ और, सूची कुछ और?- योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार ऐसे परिवार सामान्यतः पात्र नहीं माने जाते जिनके पास—पहले से पक्का मकान हो, चार पहिया वाहन अथवा पर्याप्त आर्थिक संसाधन हों, निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि हो,सरकारी नौकरी या नियमित उच्च आय हो,आयकरदाता हों, संयुक्त परिवार में अलग पात्रता न बनती हो,इसी प्रकार एक ही राशन कार्ड में शामिल संयुक्त परिवार के सभी सदस्यों को अलग-अलग आवास देने का भी प्रावधान सामान्य परिस्थितियों में नहीं होता, ग्रामीणों का आरोप है कि इन नियमों की खुलेआम अनदेखी की गई।
पंचायतों में क्यों मची है सूची को लेकर हलचल?- विशेष ग्राम सभाओं में जैसे-जैसे हितग्राहियों की सूची सामने आ रही है, वैसे-वैसे विरोध भी बढ़ रहा है,ग्रामीणों का कहना है कि जिनके पास पहले से पक्के मकान हैं, उनके नाम सूची में हैं,कई परिवारों के पास ट्रैक्टर और चार पहिया वाहन हैं,कुछ लोगों के पास निर्धारित सीमा से अधिक कृषि भूमि है, कई प्रभावशाली परिवारों को लाभार्थी बनाया गया है, वास्तविक गरीबों के नाम सूची से गायब हैं, यदि यह सही है तो यह केवल पात्रता का मामला नहीं बल्कि गरीबों के अधिकारों से जुड़ा विषय है।
क्या सर्वे में ही हो गया पूरा खेल?- पूरे मामले की जड़ सर्वे प्रक्रिया को माना जा रहा है, प्रधानमंत्री आवास योजना के लिए पात्र परिवारों का ऑनलाइन सर्वे पंचायत सचिव,रोजगार सहायक तथा संबंधित कर्मचारियों द्वारा किया गया,ग्रामीणों का आरोप है कि सर्वे निष्पक्ष तरीके से नहीं किया गया,कई लोगों का कहना है कि गरीब परिवारों के घर तक टीम नहीं पहुंची, जिनका सर्वे होना चाहिए था,उनका नाम दर्ज नहीं किया गया,प्रभावशाली लोगों के नाम प्राथमिकता से जोड़े गए,कथित रूप से पैसे लेकर पात्रता तैयार की गई, हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
नाम न काटने के बदले वसूली?- ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे गंभीर चर्चा इस बात को लेकर है कि सूची सार्वजनिक होने के बाद जिन लोगों के नाम पात्रता पर सवालों के घेरे में आए, उनसे कथित रूप से यह कहा गया कि यदि नाम कटने से बचाना है तो पैसे देने होंगे, यदि इस प्रकार की शिकायतें जांच में सही पाई जाती हैं तो यह केवल भ्रष्टाचार नहीं बल्कि गरीबों के अधिकारों का आर्थिक शोषण भी माना जाएगा।
एक ही परिवार के कई लोगों को आवास?- ग्रामीणों का आरोप है कि कई पंचायतों में एक ही राशन कार्ड वाले परिवार के कई सदस्यों के नाम सूची में हैं,संयुक्त परिवार के सदस्यों को अलग-अलग लाभार्थी बनाया गया, अविवाहित युवाओं तक के नाम सूची में दर्ज हैं, यदि ऐसा हुआ है तो पात्रता निर्धारण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
पहले चरण में भी उठे थे सवाल- ग्रामीण बताते हैं कि प्रधानमंत्री आवास योजना के पहले चरण में भी कई ऐसे लोगों को लाभ मिला था जिनकी आर्थिक स्थिति मजबूत थी, अब दूसरे चरण में भी उसी प्रकार की शिकायतें सामने आने से लोगों में असंतोष बढ़ रहा है।
जांच हुई तो कई पंचायतों में खुल सकते हैं बड़े राज
कितने लाभार्थियों के पास पहले से पक्का मकान है?
कितनों के पास चार पहिया वाहन हैं?
कितनों के पास निर्धारित सीमा से अधिक भूमि है?
कितनों का राशन कार्ड संयुक्त है?
कितने लाभार्थी वास्तव में अलग परिवार हैं?
सर्वे किसने किया?
ग्राम सभा में कितनी आपत्तियां दर्ज हुईं?
कितनी आपत्तियों का निराकरण हुआ?
जिम्मेदारी आखिर किसकी?-यदि पंचायत स्तर पर अनियमितता हुई है तो पंचायत सचिव,रोजगार सहायक और आवास मित्र की भूमिका की जांच आवश्यक होगी,यदि जनपद स्तर पर बिना परीक्षण के सूची आगे भेजी गई तो जनपद पंचायत की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए,यदि जिला स्तर पर भी बिना सत्यापन सूची स्वीकृत हुई है तो प्रशासनिक निगरानी पर भी प्रश्न उठेंगे।
प्रधानमंत्री आवास योजना के प्रमुख पात्रता बिंदु…
पक्का मकान नहीं होना चाहिए।
पात्रता का निर्धारण शासन के दिशा-निर्देशों के अनुसार।
निर्धारित आर्थिक एवं सामाजिक मानकों का पालन आवश्यक।
सर्वे एवं ग्राम सभा के सत्यापन के बाद अंतिम सूची।
गलत जानकारी देकर लाभ लेना नियम विरुद्ध है।
प्रशासन से मांग…
प्रत्येक ग्राम पंचायत की सूची का पुनः भौतिक सत्यापन।
अपात्रों के नाम तत्काल हटाए जाएं।
छूटे पात्र परिवारों को शामिल किया जाए।
सर्वे प्रक्रिया की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई।
कथित अवैध वसूली की स्वतंत्र जांच।
पूरी सूची सार्वजनिक कर पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
प्रशासन का पक्ष- इस संबंध में जनपद पंचायत बैकुंठपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी,संबंधित पंचायत सचिवों एवं जिला प्रशासन का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका, उनका पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
‘घटती-घटना’ के 10 बड़े सवाल
क्या सूची जारी होने से पहले प्रत्येक हितग्राही का भौतिक सत्यापन हुआ?
जिनके पास पहले से पक्का मकान है, वे सूची में कैसे पहुंचे?
क्या एक ही राशन कार्ड वाले कई लोगों को लाभ दिया जा रहा है?
क्या अविवाहित युवाओं को भी हितग्राही बनाया गया?
सर्वे का आधार क्या था?
ग्राम सभा में उठी आपत्तियों का क्या हुआ?
पात्र गरीबों के नाम क्यों छूटे?
क्या सूची में नाम बनाए रखने के लिए अवैध वसूली हुई?
यदि शिकायतें सही हैं तो जिम्मेदार कौन?
क्या जिला प्रशासन स्वतंत्र जांच कराएगा?
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