जांच दल की कार्यप्रणाली पर गंभीर आरोप,मानवाधिकार फाउंडेशन ने कलेक्टर-एसडीएम से निष्पक्ष जांच की मांग की…
-संवाददाता-
बलरामपुर,२6 जून 2026 (घटती-घटना)। ग्राम नवकी निवासी किसान की जमीन का सीमांकन न्यायालयीन आदेश के बावजूद दो साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। मामले में अब प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन के जिला अध्यक्ष सुदामा राजवाड़े ने कलेक्टर एवं अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) राजपुर को शिकायत पत्र सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता भगवत पिता चेतन ने बताया कि उनकी स्वामित्व वाली भूमि खसरा क्रमांक 394/31,रकबा 0.0710 हेक्टेयर के सीमांकन के लिए 27 दिसंबर 2023 को तहसीलदार न्यायालय राजपुर में आवेदन प्रस्तुत किया गया था। आवेदन पर कार्रवाई करते हुए तहसीलदार न्यायालय ने 12 अप्रैल 2024 को पत्र क्रमांक 485 के माध्यम से सीमांकन के लिए जांच दल गठित किया था। गठित दल में प्रभारी राजस्व निरीक्षक विजय गुप्ता, प्रभारी राजस्व निरीक्षक पवन पांडे, पटवारी आनंद पांडे, रजाउल हसन सहित अन्य कर्मचारियों को शामिल किया गया था। शिकायत के अनुसार विवाद की संभावना को देखते हुए पुलिस बल की मांग भी की गई थी,लेकिन इसके बावजूद आज तक मौके पर पहुंचकर सीमांकन की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई।
सीमांकन नहीं होने से खेती प्रभावित, अवैध कब्जे की आशंका : किसान का आरोप है कि सीमांकन नहीं होने के कारण वह अपनी ही जमीन पर खेती नहीं कर पा रहा है। वहीं कुछ लोगों द्वारा भूमि पर कब्जे का प्रयास किए जाने की आशंका भी जताई गई है। शिकायतकर्ता ने कहा कि समय पर कार्रवाई नहीं होने से भविष्य में भूमि विवाद और कानून व्यवस्था की स्थिति बन सकती है।
राजस्व निरीक्षक पर दूसरे अधिकारी को काम से रोकने का आरोप : किसान ने वीडियो के माध्यम से आरोप लगाया है कि बासेन में पदस्थ राजस्व निरीक्षक विजय गुप्ता ने राजपुर में पदस्थ राजस्व निरीक्षक धर्मजीत को सीमांकन संबंधी कार्य करने से रोका। आरोप है कि उन्होंने कहा कि ‘तुमको अपना कलम फंसाना है तो जाओ।’ शिकायतकर्ता का कहना है कि इसके बाद भूमि संबंधी नक्शा तैयार करने की प्रक्रिया भी आगे नहीं बढ़ सकी। हालांकि,लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
मानवाधिकार फाउंडेशन ने उठाई जांच की मांग
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार फाउंडेशन ने शिकायत में कहा है कि न्यायालय के आदेश के बावजूद सीमांकन लंबित रहना प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। संगठन ने कलेक्टर और एसडीएम से पूरे मामले की जांच कर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।
संगठन ने यह भी मांग की है कि पुलिस बल की मौजूदगी में तत्काल सीमांकन कराया जाए, जिससे किसान को उसकी भूमि का अधिकार मिल सके। शिकायत के साथ न्यायालयीन आदेश, बी-1, खसरा नक्शा और ऋण पुस्तिका की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं।
लोक सेवा गारंटी में तय समय के बावजूद देरी
शिकायत में बताया गया है कि छत्तीसगढ़ शासन के लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत भूमि सीमांकन को समयबद्ध सेवा में शामिल किया गया है। निर्धारित अवधि में सीमांकन नहीं होने पर जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद लंबे समय से प्रकरण लंबित रहने पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
लंबित प्रकरणों को लेकर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
राजपुर तहसील क्षेत्र में सीमांकन सहित अन्य राजस्व प्रकरणों के लंबित रहने को लेकर पहले भी शिकायतें सामने आती रही हैं। हाल ही में क्षेत्रीय विधायक उद्देश्वरी पैंकरा ने भी सीमांकन मामलों में देरी को लेकर अधिकारियों को शीघ्र निराकरण के निर्देश दिए थे। अब सवाल यह है कि न्यायालय के आदेश के बाद भी दो साल तक सीमांकन क्यों नहीं हो सका और इसके लिए जिम्मेदार कौन है? जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। इस संबंध में राजपुर एसडीएम देवेंद्र प्रधान से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
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