काम दिखे,लखनऊ अग्निकांड के बाद सख्ती,स्टेटस रिपोर्ट मांगी
बिलासपुर,26 जून 2026। लखनऊ अग्निकांड के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने फायर सेफ्टी सिस्टम की लचर व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने कहा कि केवल टेंडर दिखाने से काम नहीं चलेगा। जमीन पर काम होना चाहिए। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने उन सभी टेंडरों की स्टेटस रिपोर्ट मांगी है, जो फायर ब्रिगेड के आधुनिक वाहनों और उपकरणों की खरीद के लिए जारी किए गए हैं। हाल ही में मोपका स्थित विद्युत वितरण कंपनी के सब स्टेशन और दुकानों में आग लगने की घटना के बाद यह मामला फिर से चर्चा में आया। मीडिया में खबरें आने के बाद हाईकोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका के रूप में सुनवाई शुरू की। कोर्ट ने राज्य शासन से शपथपत्र के साथ जवाब भी मांगा है। वहीं, हाईकोर्ट की सख्ती के बाद सरकार ने भी आदेश जारी कर लिफ्ट सुरक्षा और फायर सेफ्टी नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। लिफ्ट की नियमित जांच, मेंटेनेंस, इमरजेंसी अलार्म और संचार व्यवस्था अनिवार्य की गई है। इस मामले में राज्य शासन की तरफ से जवाब में बताया गया कि राज्य में 72.70 करोड़ के फायर उपकरणों की खरीदी प्रक्रिया जारी है।
16 जगहों पर नए फायर स्टेशन बनाने की योजना है। इसके लिए कई जिलों में अब तक जमीन नहीं मिल पाई है। उपकरणों की खरीदी के लिए टेंडर की प्रक्रिया चल रही है। हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने मामले की सुनवाई के दौरान फायर सेफ्टी व्यवस्था पर कड़ी नाराजगी जताई और कहा कि केवल टेंडर दिखाने से काम नहीं चलेगा। जमीन पर काम होना चाहिए। वर्क ऑर्डर भी दिखना जरूरी है। डिवीजन बेंच ने फायर ब्रिगेड वाहनों और उपकरणों की खरीदी पर शासन को स्टेटस रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।
11 जिलों में जमीन आवंटन की प्रक्रिया नहीं हो पाई शुरू
गरियाबंद, बेमेतरा, बालोद, सक्ती और सूरजपुर में जमीन मिल चुकी है और निर्माण के लिए फंड भी जारी कर दिया गया है। मुंगेली, जीपीएम, बीजापुर, सारंगढ़, सुकमा, नारायणपुर समेत 11 जिलों में अभी भी जमीन का आवंटन होना बाकी है।
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