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अम्बिकापुर@शराब कोचियों पर उठे सवालों के बीच बड़ी कार्रवाई…

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  • आबकारी उपनिरीक्षक अनिल गुप्ता हुये निलंबित
  • जिला आबकारी अधिकारी और मंडल प्रभारी को मिला नोटिस…
  • क्या शराब कोचियों के संरक्षणदाता थे जिम्मेदार अधिकारी? कार्रवाई
  • ने तेज की बहस…


-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 जून 2026 (घटती-घटना)। सरगुजा में अवैध शराब कारोबार,शराब कोचियों की सक्रियता और आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लंबे समय से उठ रहे सवालों के बीच आबकारी आयुक्त छत्तीसगढ़ की बड़ी कार्रवाई सामने आई है। विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकान बौरीपारा में निर्धारित दर से अधिक कीमत पर शराब बेचने के मामले में आबकारी उपनिरीक्षक एवं वृत्त प्रभारी अंबिकापुर अनिल गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है,जबकि जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मीकांत गायकवाड़ और मंडल प्रभारी शीला बाड़ा को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब शहर में लंबे समय से यह चर्चा रही है कि सरकारी शराब दुकानों के अलावा भी कई इलाकों में कथित कोचियों के माध्यम से आसानी से शराब उपलब्ध हो जाती है। जनमानस में लगातार यह सवाल उठ रहा था कि यदि विभाग नियमित अभियान चला रहा है तो फिर अवैध बिक्री और ओवररेटिंग जैसी शिकायतें बार-बार क्यों सामने आ रही हैं।
आयुक्त ने कहा…क्षेत्र में गंभीर अनियमितता नियंत्रणहीनता का प्रमाण : आबकारी आयुक्त द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट कहा गया है कि यह दुकान अनिल गुप्ता के प्रभार क्षेत्र के अंतर्गत आती है। उनके क्षेत्र में इस प्रकार की गंभीर अनियमितता पाया जाना उनके कर्तव्य के प्रति लापरवाही, उदासीनता और शिथिल नियंत्रण का परिचायक है। इसी आधार पर उन्हें छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत निलंबित कर दिया गया। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संभागीय उड़नदस्ता कार्यालय सरगुजा निर्धारित किया गया है।
जिला आबकारी अधिकारी और मंडल प्रभारी से भी मांगा जवाब : केवल उपनिरीक्षक पर कार्रवाई तक मामला सीमित नहीं रहा। आबकारी आयुक्त ने जिला आबकारी अधिकारी लक्ष्मीकांत गायकवाड़ और मंडल प्रभारी शीला बाड़ा को भी कारण बताओ सूचना जारी की है। नोटिस में कहा गया है कि उनके अधिकार क्षेत्र में इस प्रकार की अनियमितता सामने आना नियंत्रण की कमी और प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। दोनों अधिकारियों से सात दिनों के भीतर समाधानकारक जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर विभागीय कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
संरक्षण के आरोप सिद्ध नहीं, लेकिन कार्रवाई ने बढ़ाई शंकाएं
शहर में आबकारी विभाग के कुछ अधिकारियों को लेकर समय-समय पर चर्चाएं होती रही हैं। हालांकि किसी भी अधिकारी के खिलाफ संरक्षण देने का आरोप अभी तक किसी न्यायिक या विभागीय जांच में सिद्ध नहीं हुआ है। इसलिए ऐसे आरोपों को तथ्यात्मक रूप से स्थापित दावा नहीं माना जा सकता। लेकिन अब जबकि स्वयं आबकारी आयुक्त ने अनिल गुप्ता को गंभीर लापरवाही और शिथिल नियंत्रण के आधार पर निलंबित किया है तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों को भी नोटिस जारी किया है, तब यह प्रश्न और प्रासंगिक हो गया है कि आखिर विभागीय निगरानी व्यवस्था में चूक कहां हुई।
उड़नदस्ता टीम ने किया था छद्म खरीदार के जरिए परीक्षण
राज्य स्तरीय उड़नदस्ता टीम ने 16 जून को विदेशी कम्पोजिट मदिरा दुकान बौरीपारा का आकस्मिक निरीक्षण किया था। जांच के दौरान छद्म ग्राहक बनाकर शराब खरीदी गई। जांच में पाया गया कि विक्रयकर्ता नरेन्द्र कुमार यादव ने गोल्डन गोवा व्हिस्की के 20 पाव की बिक्री शासन द्वारा निर्धारित 2400 रुपये के बजाय 2500 रुपये में की। यानी ग्राहक से 100 रुपये अतिरिक्त वसूले गए। उड़नदस्ता ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए विक्रयकर्ता के खिलाफ छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम की धारा 39(ग) के तहत प्रकरण दर्ज किया।
अब उठ रहे बड़े सवाल…
यह कार्रवाई सामने आने के बाद शहर में पहले से चल रही चर्चाओं को नया बल मिला है। लंबे समय से लोग पूछते रहे हैं किः
– यदि आबकारी विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा था तो शराब कोचियों का नेटवर्क समाप्त क्यों नहीं हुआ?
– क्या कार्रवाई केवल छोटे विक्रेताओं और अंतिम स्तर के लोगों तक सीमित रही?
– क्या विभाग को पहले से शिकायतें मिलती रही थीं?
– यदि मिलती थीं तो उन पर क्या कार्रवाई हुई?
– क्या ओवररेटिंग और अवैध बिक्री के मामलों में उच्च अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई थी?
– जिन क्षेत्रों से लगातार शिकायतें आती रहीं, वहां निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी थी?


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