श्रीराम कथा के तीसरे दिन माता कौशल्या जन्म प्रसंग सुन भावविभोर हुए श्रद्धालु, जय श्रीराम के जयघोष से गूंजा चिरमिरी
चिरमिरी/एमसीबी,20 मई 2026 (घटती-घटना)। चिरमिरी में आयोजित भव्य श्रीराम कथा के तीसरे दिन श्रद्धा,भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा पंडाल में हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच जगद्गुरु स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने माता कौशल्या के जन्म प्रसंग का अत्यंत मार्मिक और भावपूर्ण वर्णन किया,उनके श्रीमुख से निकली रामकथा ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया और पूरा वातावरण जय श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा,कथा के दौरान स्वामी रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि माता कौशल्या का जन्म छत्तीसगढ़ की पवित्र धरती पर हुआ था, इसलिए छत्तीसगढ़ भगवान श्रीराम का ननिहाल है। उन्होंने श्रद्धालुओं से कहा कि इस दृष्टि से यहां के लोग भगवान श्रीराम के मामा कहलाते हैं। यह बात सुनते ही कथा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा।
राम से विशेष जुड़ी है छत्तीसगढ़ की धरती
जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि छत्तीसगढ़ केवल प्राकृतिक सौंदर्य और संस्कृति की भूमि ही नहीं,बल्कि भगवान श्रीराम की स्मृतियों और आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी पावन धरा है,उन्होंने कहा कि वनवास काल में भगवान श्रीराम ने छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्रों में समय बिताया था और यहां की धरती आज भी राममय संस्कृति को अपने भीतर समेटे हुए है, उन्होंने माता कौशल्या के जीवन,त्याग और मातृत्व का वर्णन करते हुए कहा कि माता कौशल्या केवल अयोध्या की महारानी नहीं थीं, बल्कि सनातन संस्कृति की आदर्श माता थीं। उनके संस्कारों ने ही भगवान श्रीराम जैसे मर्यादा पुरुषोत्तम को जन्म दिया,कथा के दौरान महाराज ने जैसे ही माता कौशल्या जन्म प्रसंग का उल्लेख किया,श्रद्धालुओं में भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा,कई श्रद्धालु भक्ति में डूबे नजर आए,वहीं पूरे पंडाल में लगातार सियावर रामचंद्र की जय और जय श्रीराम के जयघोष गूंजते रहे।
भक्ति रस में डूबा कथा पंडाल
श्रीराम कथा के तीसरे दिन सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ कथा स्थल पर उमड़ने लगी थी। महिलाओं,युवाओं, बुजुर्गों और बच्चों सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण के लिए पहुंचे, कथा स्थल पर बैठने की व्यवस्था पूरी तरह भर गई और देर से पहुंचने वाले श्रद्धालु बाहर खड़े होकर कथा सुनते नजर आए,पूरे आयोजन स्थल को आकर्षक धार्मिक सजावट से सजाया गया था। मंच पर भगवान श्रीराम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की भव्य झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही। कथा के दौरान भजन-कीर्तन और संगीतमय प्रस्तुतियों ने वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।
स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने लिया आशीर्वाद
आज की कथा में प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल अपनी धर्मपत्नी कांति जायसवाल के साथ पहुंचे,उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज का आशीर्वाद प्राप्त कर कथा श्रवण किया, इस दौरान स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि ऐसे धार्मिक आयोजन समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं और रामकथा भारतीय संस्कृति और मूल्यों को मजबूत करने का माध्यम है।
महिला एवं बाल विकास मंत्री सहित कई जनप्रतिनिधि रहे मौजूद
श्रीराम कथा में महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े भी शामिल हुईं। उन्होंने कथा श्रवण कर प्रदेश और क्षेत्र की सुख-समृद्धि की कामना की, इसके अलावा भाजपा के कई जनप्रतिनिधि,स्थानीय नेता,सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य नागरिक भी कथा में उपस्थित रहे, कथा स्थल पर नेताओं और श्रद्धालुओं का एक साथ धार्मिक वातावरण में शामिल होना आयोजन की विशेषता बन गया।
रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं,संस्कारों की पाठशाला
अपने प्रवचन में जगद्गुरु रामभद्राचार्य महाराज ने कहा कि रामकथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं है,बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाली संस्कारों की पाठशाला है,उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का जीवन त्याग, मर्यादा, सेवा और आदर्शों का प्रतीक है,जिससे हर व्यक्ति को सीख लेने की आवश्यकता है, उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा से जुड़े रहने का आह्वान करते हुए कहा कि रामकथा समाज को जोड़ने और नैतिक मूल्यों को मजबूत करने का सबसे बड़ा माध्यम है।
राममय हुआ चिरमिरी शहर
श्रीराम कथा के आयोजन से पूरा चिरमिरी क्षेत्र इन दिनों राममय दिखाई दे रहा है। शहर में जगह-जगह भगवान श्रीराम के पोस्टर,भगवा ध्वज और स्वागत द्वार लगाए गए हैं। कथा स्थल तक पहुंचने वाले मार्गों को भी विशेष रूप से सजाया गया है, आयोजन समिति द्वारा श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, प्रसाद, बैठने और पार्किंग की विशेष व्यवस्था की गई है। बड़ी संख्या में स्वयंसेवक व्यवस्था संभालते नजर आए।
आगामी दिनों में और बढ़ेगी श्रद्धालुओं की भीड़
आयोजन समिति के सदस्यों के अनुसार आगामी दिनों में कथा में श्रद्धालुओं की संख्या और अधिक बढ़ने की संभावना है, दूर-दराज क्षेत्रों से भी लोग कथा श्रवण के लिए चिरमिरी पहुंच रहे हैं, शहरवासियों का कहना है कि लंबे समय बाद चिरमिरी में इतना बड़ा धार्मिक आयोजन हो रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माहौल बना हुआ है।
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