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खड़गवां/पोड़ी बचरा@जनप्रतिनिधि या अघोषित ठेकेदार?पोड़ी बचरा स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में भ्रष्टाचार के आरोप

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  • 11 लाख के स्वास्थ्य भवन में घटिया निर्माण! ग्रामीणों ने खोली अनियमितताओं की पोल
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण बना कमाई का जरिया? मानकों की उड़ रही धज्जियां
  • पोडी बचरा स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में बड़ा खेल! घटिया सामग्री और मिलीभगत के आरोप
  • खनिज न्यास की राशि पर सवाल, स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में गुणवत्ता से समझौता
  • जनपद उपाध्यक्ष पर ठेकेदारी के आरोप, स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में धांधली से ग्रामीण नाराज़
  • ईंट हाथ लगाते ही टूट रही, गिट्टी भी मानक विहीन! स्वास्थ्य भवन निर्माण पर उठे सवाल
  • 11 लाख का निर्माण, लेकिन सुरक्षा और गुणवत्ता दोनों गायब
  • स्वास्थ्य केंद्र निर्माण में भ्रष्टाचार की बू: मजदूर बिना सुरक्षा, भवन बिना गुणवत्ता


-राजेन्द्र शर्मा-
खड़गवां/पोड़ी बचरा,20 मई 2026 (घटती-घटना)। स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पोड़ी बचरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत अतिरिक्त कक्ष निर्माण कार्य अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है, खनिज न्यास मद से लगभग 11 लाख 32 हजार रुपये की लागत से बनने वाले इस अतिरिक्त कक्ष के निर्माण में भारी अनियमितता, घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग,गुणवत्ता से समझौता और नियम विरुद्ध तरीके से कार्य कराए जाने के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पूरा निर्माण कार्य एक जनप्रतिनिधि के संरक्षण में अघोषित ठेकेदारी के रूप में संचालित हो रहा है, जिससे शासन की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा है, ग्रामीणों के अनुसार यह निर्माण कार्य मार्च 2026 तक पूर्ण होना था,लेकिन लंबे समय तक कार्य प्रारंभ ही नहीं किया गया। बाद में पंचायत प्रतिनिधियों पर दबाव और भुगतान प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल्दबाजी में निर्माण कार्य शुरू किया गया, जिसमें गुणवत्ता और तकनीकी मानकों की पूरी तरह अनदेखी की जा रही है।
मजदूरों की सुरक्षा के नाम पर शून्य व्यवस्था
निर्माण कार्य में लगे मजदूरों की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर लापरवाही सामने आई है,मौके पर काम कर रहे मजदूर बिना हेलमेट,सेफ्टी शूज और अन्य सुरक्षा उपकरणों के कार्य करते दिखाई दे रहे हैं,ग्रामीणों ने कहा कि निर्माण कार्य के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है,लेकिन न तो ठेकेदार और न ही विभागीय अधिकारी मजदूरों की सुरक्षा को लेकर गंभीर दिखाई दे रहे हैं,विशेषज्ञों के अनुसार निर्माण कार्य में सुरक्षा उपकरण उपलब्ध कराना अनिवार्य होता है, लेकिन यहां सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
ऊपर से नीचे तक मिलीभगत का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरे मामले में ऊपर से नीचे तक मिलीभगत होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही,लोगों का कहना है कि 11 लाख से अधिक की राशि स्वीकृत होने के बावजूद यदि घटिया निर्माण हो रहा है तो यह स्पष्ट रूप से भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है,ग्रामीणों ने पूरे निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने, उपयोग की गई सामग्री का गुणवत्ता परीक्षण करवाने तथा दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
स्वास्थ्य केंद्र भवन की गुणवत्ता पर उठी चिंता
स्थानीय लोगों ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सुविधा केंद्र है,यदि यहां बनने वाला अतिरिक्त कक्ष ही कमजोर और घटिया गुणवत्ता का होगा तो भविष्य में मरीजों, डॉक्टरों और कर्मचारियों की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है,ग्रामीणों का कहना है कि शासन लाखों रुपये इसलिए खर्च करता है ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हो सकें,लेकिन भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के कारण योजनाओं का उद्देश्य ही खत्म हो जाता है।
जनप्रतिनिधि पर ठेकेदारी करने का आरोप
मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि बैकुंठपुर जनपद पंचायत उपाध्यक्ष स्वयं निर्माण कार्य को प्रभावित कर रहे हैं और अप्रत्यक्ष रूप से ठेकेदार की भूमिका निभा रहे हैं, ग्रामीणों का कहना है कि नियमों के अनुसार जनप्रतिनिधि निर्माण कार्यों में प्रत्यक्ष रूप से ठेकेदारी नहीं कर सकते,लेकिन यहां प्रभाव और पहुंच का उपयोग कर निर्माण कार्य को नियंत्रित किया जा रहा है,स्थानीय लोगों का आरोप है कि पंचायत के सरपंच और सचिव को दबाव में लेकर निर्माण सामग्री सप्लायर प्रियांश ट्रेडर्स के नाम लगभग 3 लाख 99 हजार रुपये की राशि आहरित करवाई गई। भुगतान होने के बावजूद निर्माण कार्य लंबे समय तक अधूरा पड़ा रहा, जिससे पंचायत प्रतिनिधि भी परेशान हो गए थे,ग्रामीणों के मुताबिक जब लगातार दबाव बढ़ा और सवाल उठने लगे तब जाकर निर्माण कार्य शुरू किया गया, लेकिन उसमें भी गुणवत्ता की खुली अनदेखी शुरू हो गई।
निर्माण स्थल पर मानकों की खुलेआम अनदेखी
निर्माण स्थल पर उपयोग हो रही सामग्री को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं,उनका कहना है कि भवन के कॉलम निर्माण में जहां 20 एमएम गिट्टी का उपयोग होना चाहिए,वहां 30 से 40 एमएम आकार की बड़ी गिट्टी डाली जा रही है। तकनीकी जानकारों के अनुसार गलत आकार की गिट्टी उपयोग करने से कॉलम की मजबूती प्रभावित होती है और भविष्य में भवन कमजोर पड़ सकता है,ग्रामीणों ने निर्माण में उपयोग हो रही ईंटों की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि ईंटें इतनी कमजोर हैं कि हाथ लगाने और हल्का दबाव पड़ते ही टूट जा रही हैं। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि निर्माण कार्य केवल खानापूर्ति के उद्देश्य से किया जा रहा है,इतना ही नहीं, पीसीसी कार्य में भी निर्धारित अनुपात का पालन नहीं किया जा रहा, ग्रामीणों के अनुसार केवल गिट्टी और सीमेंट डालकर काम पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मिश्रण में आवश्यक गुणवत्ता नहीं दिखाई दे रही।
मिक्सर मशीन की जगह बेलचा-फावड़े से हो रहा मिश्रण
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में आधुनिक मिक्सर मशीन का उपयोग नहीं किया जा रहा, मजदूर हाथों से बेलचा और फावड़े के माध्यम से सीमेंट, रेत और गिट्टी का मिश्रण तैयार कर रहे हैं। इससे सामग्री का सही अनुपात नहीं बन पाता और निर्माण की मजबूती प्रभावित होती है, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि करोड़ों रुपये की सरकारी योजनाओं में इसी प्रकार काम होगा तो सरकारी भवन कुछ ही वर्षों में जर्जर हो जाएंगे। लोगों ने इसे शासन की राशि का खुला दुरुपयोग बताया है।
सरिया की गुणवत्ता पर भी उठे सवाल
ग्रामीणों ने निर्माण में उपयोग किए जा रहे सरिया की गुणवत्ता को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं, लोगों का कहना है कि सरिया पतला और कमजोर दिखाई दे रहा है, जिससे भवन की दीर्घकालिक मजबूती संदिग्ध हो गई है, ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा हर स्तर पर लागत बचाने की कोशिश की जा रही है, ताकि अधिक से अधिक राशि बचाकर निजी लाभ कमाया जा सके।
इंजीनियर और विभागीय अधिकारियों की चुप्पी से बढ़े संदेह-
ग्रामीणों ने विभागीय इंजीनियर और एसडीओ की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं, उनका कहना है कि निर्माण स्थल पर न तो इंजीनियर निरीक्षण करने पहुंचते हैं और न ही किसी प्रकार की तकनीकी निगरानी दिखाई देती है, स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण कार्य समय पर शुरू हुआ या नहीं, इसका भी कोई परीक्षण नहीं किया गया। यही कारण है कि ठेकेदार खुलेआम नियमों और गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर रहा है, ग्रामीणों का कहना है कि यदि विभागीय अधिकारी समय-समय पर निरीक्षण करते और गुणवत्ता की जांच कराते, तो इस प्रकार की लापरवाही सामने नहीं आती।
ग्रामीणों ने की उच्च स्तरीय
जांच की मांग

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग और खनिज न्यास समिति से मांग की है कि निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराई जाए, साथ ही निर्माण कार्य में उपयोग हो रही सामग्री की लैब जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, लोगों ने यह भी मांग की कि जब तक गुणवत्ता की जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक निर्माण कार्य पर रोक लगाई जाए।

मामले की शिकायत मुझे भी मिली है। मैं स्वयं जाकर निर्माण कार्य का निरीक्षण करूंगा। निरीक्षण में जो भी कमियां पाई जाएंगी, उनमें सुधार कराया जाएगा तथा निर्माण कार्य कराने वाले के खिलाफ उचित कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जाएगा।
— भानप्रताप सिंह


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