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कोरिया/सूरजपुर@ दवा व्यापार की ‘ऑनलाइन’ घेराबंदी के खिलाफ आर-पार की लड़ाई

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20 मई को सूरजपुर-कोरिया सहित देशभर की दवा दुकानें रहेंगी बंद,ऑनलाइन फार्मेसी के खिलाफ केमिस्टों का बड़ा आंदोलन
यह सिर्फ व्यापार का नहीं,जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा का सवाल’ : औषधि विक्रेता संघ
कोरिया/सूरजपुर,16 मई 2026 (घटती-घटना)।
देशभर में तेजी से फैलते ऑनलाइन फार्मेसी कारोबार के खिलाफ अब दवा व्यापारियों ने खुला मोर्चा खोल दिया है,57 अखिल भारतीय रसायनज्ञ एवं औषध विक्रेता संगठन के आह्वान पर आगामी 20 मई 2026,बुधवार को देशव्यापी दवा व्यापार बंद का ऐलान किया गया है,इस आंदोलन को जिला सूरजपुर औषधि विक्रेता संघ और कोरिया जिला औषधि विक्रेता संघ ने पूर्ण समर्थन देते हुए जिले की सभी मेडिकल दुकानों को एकदिवसीय बंद रखने का निर्णय लिया है,दवा व्यापारियों का कहना है कि यह लड़ाई केवल व्यापारिक प्रतिस्पर्धा की नहीं,बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा और दवाओं की विश्वसनीयता बचाने की लड़ाई है। संघ का आरोप है कि बिना मजबूत निगरानी और स्पष्ट नियमों के ऑनलाइन दवा बिक्री आने वाले समय में बड़ा स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है।
कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन प्रशासन से मांगा सहयोग
आंदोलन की तैयारी को लेकर सूरजपुर और कोरिया जिले के औषधि विक्रेता संघों ने प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर सहयोग की मांग की है, सूरजपुर में संघ के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर एवं एडीसी को ज्ञापन सौंपा,इस दौरान संरक्षक राजेश गोयल, प्रदेश सदस्य दीपक मित्तल, उपाध्यक्ष अंबिकेश्वर त्रिपाठी, राकेश प्रजापति, नितिन गुप्ता और योगेंद्र साहू सहित कई केमिस्ट उपस्थित रहे, वहीं कोरिया जिले में संघ अध्यक्ष शैलेश गुप्ता और सचिव नंद किशोर राजवाड़े ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए प्रशासन से आवश्यक समन्वय और सहयोग की मांग की।
नशीली दवाओं के दुरुपयोग की आशंका- संघ ने चेतावनी दी है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए आदत बनाने वाली और प्रतिबंधित दवाओं की होम डिलीवरी युवा पीढ़ी के लिए बड़ा खतरा बन सकती है, बिना प्रत्यक्ष पहचान और सत्यापन के दवाओं की उपलब्धता नशे और दवा दुरुपयोग को बढ़ावा दे सकती है।
मरीज की सुरक्षा पर बड़ा सवाल
ऑफलाइन मेडिकल स्टोर्स में मरीज और डॉक्टर के प्रिस्कि्रप्शन की प्रत्यक्ष जांच की जाती है, लेकिन ऑनलाइन माध्यम में यह प्रक्रिया कई बार केवल औपचारिकता बनकर रह जाती है, दवा व्यापारियों का आरोप है कि कई मामलों में बिना पर्याप्त मेडिकल सत्यापन के दवाएं भेजी जा रही हैं, जिससे मरीजों की जान तक जोखिम में पड़ सकती है।
यह आंदोलन व्यापार नहीं, स्वास्थ्य व्यवस्था बचाने की लड़ाई
संघ पदाधिकारियों का कहना है कि देशभर के लगभग 12 लाख से अधिक केमिस्ट इस आंदोलन में शामिल हो रहे हैं, उनका कहना है कि यह किसी प्रतिस्पर्धा का मामला नहीं,बल्कि देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुरक्षित रखने का प्रयास है, संघ ने आम जनता से अपील की है कि 20 मई के बंद को देखते हुए लोग अपनी जरूरी दवाओं की व्यवस्था पहले से कर लें ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो।
आखिर ऑनलाइन फार्मेसी से इतनी नाराजगी क्यों?
दवा व्यापारियों का कहना है कि वर्तमान ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट उस दौर में बना था जब ऑनलाइन दवा बिक्री जैसी कोई व्यवस्था नहीं थी,डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते विस्तार के बीच मौजूदा कानून ऑनलाइन दवा कारोबार की चुनौतियों को नियंत्रित करने में पूरी तरह सक्षम नहीं दिख रहे हैं,संघ ने ऑनलाइन फार्मेसी से जुड़े कई गंभीर खतरे गिनाए हैं।
नकली प्रिस्क्रिप्शन का बढ़ता खतरा
औषधि विक्रेताओं का कहना है कि आज एआई और एडिटिंग एप्स की मदद से फर्जी प्रिस्क्रिप्शन बनाना बेहद आसान हो गया है, ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इन प्रिस्क्रिप्शन की वास्तविक जांच के लिए मजबूत व्यवस्था नहीं होने से गलत, प्रतिबंधित या जरूरत से ज्यादा दवाओं की आपूर्ति का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का बढ़ता संकट
विशेषज्ञ लंबे समय से चेतावनी देते रहे हैं कि एंटीबायोटिक दवाओं का अनियंत्रित उपयोग भविष्य में वैश्विक स्वास्थ्य संकट बन सकता है, संघ का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर आसानी से एंटीबायोटिक दवाएं उपलब्ध होने से लोग बिना डॉक्टर की सलाह के दवाएं ले रहे हैं,इसका परिणाम ‘एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस’ के रूप में सामने आ सकता है,जहां सामान्य संक्रमण पर भी दवाएं असर करना बंद कर देंगी।
दवाओं की गुणवत्ता और तापमान पर भी सवाल
औषधि विक्रेताओं ने यह भी सवाल उठाया कि ऑनलाइन डिलीवरी के दौरान दवाओं के भंडारण और तापमान नियंत्रण की निगरानी कौन करता है? कई जीवनरक्षक दवाएं निश्चित तापमान पर सुरक्षित रखी जाती हैं, यदि परिवहन या डिलीवरी के दौरान तापमान नियंत्रण नहीं हुआ तो दवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है और मरीज को गंभीर नुकसान हो सकता है।
सरकार से सख्त कानून बनाने की मांग…
संघ के पदाधिकारियों ने मांग की है कि सरकार ऑनलाइन फार्मेसी के लिए स्पष्ट,पारदर्शी और सख्त नियम बनाए, मरीजों के मेडिकल डेटा, निजी जानकारी और स्वास्थ्य से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है, संघ का कहना है कि यदि ऑनलाइन दवा बिक्री जारी रखनी है तो ऐसी नीति बनाई जाए जिसमें मरीजों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता हो और हर दवा बिक्री की जवाबदेही तय हो।
20 मई को दिखेगा व्यापक असर1
देशव्यापी बंद का असर सूरजपुर,कोरिया और आसपास के जिलों में व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है,अधिकांश मेडिकल स्टोर्स बंद रहने की संभावना है,हालांकि अस्पतालों और आपातकालीन सेवाओं के लिए प्रशासन द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था को लेकर चर्चा जारी है,फिलहाल 20 मई का यह बंद केवल एक दिन का विरोध नहीं, बल्कि ऑनलाइन फार्मेसी को लेकर देशभर के दवा व्यापारियों की बढ़ती चिंता,असंतोष और स्वास्थ्य सुरक्षा को लेकर उठ रहे सवालों का बड़ा संकेत माना जा रहा है।


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